पठानकोट हमले में जैश सरगना मसूद अजहर समेत चार आतंकी आरोपी

पठानकोट हमले में जैश सरगना मसूद अजहर समेत चार आतंकी आरोपी2 जनवरी 2016 को हुआ था आतंकी हमला।

नई दिल्ली (भाषा)। पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर हुए आतंकी हमले की साजिश रचने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आज आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मूसद अजहर, उसके भाई और दो अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया।

जनवरी में हुए इस भीषण आतंकी हमले में सात सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे और 37 अन्य घायल हुए थे। आरोपपत्र पंचकूला स्थित एनआईए अदालत में दायर किया गया। इसमें सभी चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र कानून तथा गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।

एनआईए ने बताया कि अजहर के अतिरिक्त, उसके भाई अब्दुल रउफ असगर और दो आतंकी आकाओं...शाहिद लतीफ तथा काशिफ जान के नाम इस विस्तृत आरोपपत्र में लिए गए हैं। तीन के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है, लेकिन जान के खिलाफ यह लंबित है।

चार आतंकियों का ब्योरा दिया

आरोपपत्र से हमले में शामिल आतंकवादियों की संख्या के बारे में कयासों पर भी विराम लगेगा क्योंकि एजेंसी ने केवल चार आतंकवादियों का ब्योरा दिया है। आतंकवादियों की संख्या को लेकर भ्रम था क्योंकि रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर तथा गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवादियों की संख्या छह बताई थी।

आरोपपत्र में पठानकोट स्थित सामरिक महत्व वाले वायुसेना स्टेशन में सुरक्षा में खामी के भी संकेत दिए गए हैं। इसमें कहा गया कि चार आतंकवादियों...नासिर हुसैन, हाफिज अबू बकर, उमर फारूक और अब्दुल कयूम ने एक जनवरी को सुबह आठ बजकर 40 मिनट पर वायुसेना परिसर में प्रवेश किया और एक नाले तथा पास में स्थित सैन्य इंजीनियरिंग सेवा के शेड में छिपे रहे। चारों आतंकवादी पाकिस्तानी नागरिक थे।

दो जनवरी को किया आतंकियों ने हमला

इसमें कहा गया कि आतंकवादियों ने 19 घंटे बाद अगले दिन दो जनवरी को तड़के तीन बजकर 20 मिनट पर हमला कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि इस आरोपपत्र को भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद रोधी कानून के तहत अजहर पर प्रतिबंधों के वास्ते अपने मामले की पैरवी के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।

अजहर को 1999 में इंडियन एअरलाइंस के अपहृत विमान आईसी...814 के बदले में रिहा कर दिया गया था। इस मामले की जांच के लिए भारत ने पाकिस्तान की एक टीम को पठानकोट आने की अनुमति दी थी। इस टीम को सभी दस्तावेज सौंपे गए थे और उसे आतंकी हमले को विफल करने के अभियान में शामिल सुरक्षाकर्मियों को छोड़कर हर किसी से सवाल...जवाब करने की अनुमति दी गई थी।

हालांकि, पाकिस्तानी टीम ने पाकिस्तान लौटने पर कहा कि भारत ने न तो ज्यादा साक्ष्य साझा किए और न ही हमले को विफल करने के अभियान में शामिल सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ करने दी। चार आतंकवादियों की घुसपैठ और गतिविधियों का ब्योरा देते हुए एनआईए ने अपने आरोपपत्र में कहा कि सभी चारों आतंकवादियों को व्यापक भडकाऊ, शारीरिक, सैन्य और रणनीतिक प्रशिक्षण मिला था और उन्हें भारत में आतंकी हमलों के लिए कट्टरपंथी बनाया गया था।

गोला बारूद और अन्य साजोसामान से लैस चारों आतंकवादियों ने भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए 30 दिसंबर को सिम्बाल सीमा चौकी के पास वनक्षेत्र से प्रवेश किया। जांच के दौरान सिम्बाल सीमा चौकी के पास स्थित वनक्षेत्र से पाकिस्तान में निर्मित खाने के सामान के खाली पैकेट और अन्य खाद्य वस्तुएं बरामद हुईं।

भारतीय की तरफ प्रवेश करने के बाद ये आतंकवादी भगवाल गांव से सड़क मार्ग से जानियाल पहुंचे। 31 दिसंबर को रात लगभग साढ़े नौ बजे उन्होंने पीबी06...जी...0061 नंबर वाली टैक्सी का उसके चालक इकागर सिंह के साथ अपहरण कर लिया जो भगवाल गांव से जानियाल जा रहा था। आतंकवादियों ने इकागर सिंह से मोबाइल छीन लिया और इसका इस्तेमाल पाकिस्तान आधारित जैश-ए-मोहम्मद के अपने आका काशिफ जान तथा जैश-ए-मोहम्मद के अन्य आतंकी नेताओं से बात करने के लिए किया। उन्होंने पाकिस्तान में तीन मोबाइल नंबरों....923453030479, 923213132786 और 923017775253 पर बात की।

उनका वाहन रावी नदी पुल पर धुसी मोड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसके बाद आतंकियों ने इकागर सिंह की बर्बर हत्या कर दी तथा उसका शव पास की झाड़ियों में फेंक दिया। इसके बाद आतंकी दुर्घटनाग्रस्त वाहन को चलाकर ले गए और इसे पठानकोट में कोलियां मोड पर एक सर्विस स्टेशन पर छोड़ दिया।

जांच के दौरान एक मृत आतंकवादी (निसार) के पास से मिली कृपाण से उठाया गया डीएनए परिचय इकागर सिंह से मेल खा गया जिससे इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया कि इन आतंकियों ने ही इकागर सिंह की हत्या की थी। कोलियां मोड पर इकागर सिंह के दुर्घटनाग्रस्त वाहन को छोडने के बाद आतंकी पास में गन्ने के खेत में छिप गए और किसी अन्य वाहन के आने का इंतजार करने लगे।

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