सरकोमा की सर्जरी करके बचाए आंख और मस्तिष्क

सरकोमा की सर्जरी करके बचाए आंख और मस्तिष्कप्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली (भाषा)। लखनऊ के रहने वाले ताकी हसन की दाईं आंख के ऊपर हुए ट्यूमर का कुप्रभाव मस्तिष्क की कोशिकाओं तक पहुंचने लगा था जिससे उनकी बाई आंख भी जा सकती थी लेकिन दिल्ली के एक अस्पताल में उनकी एंटीरियर कार्नियोफेशियल रिसेक्शन सर्जरी के बाद डॉक्टर उनके सामान्य जीवन की उम्मीद कर रहे हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक यह एक दुर्लभ सर्जरी थी जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं भी कैंसर के ट्यूमर से प्रभावित होने वाली थीं। मरीज की एक आंख तो ट्यूमर के प्रकोप से जा चुकी थी और डॉक्टरों के सामने उनके मस्तिष्क और दूसरी आंख को बचाने का चुनौतीपूर्ण काम था।

गत 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल में 35 वर्षीय ताकी हसन की एंटीरियर कॉनिर्योफेशियल रिसेक्शन सर्जरी की गयी। जिसमें उनके सरकोमा के ट्यूमर को निकाला गया। सर्जरी में एक और बड़ी बात थी कि इसमें उनकी कमर से त्वचा का एक हिस्सा लेकर सर्जरी वाली जगह पर प्रतिरोपित किया गया।

सर्जरी में एक बात यह भी खास रही कि अधिक पैसे की जरूरत थी तो ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले ताकी के एक रिश्तेदार ने सोशल मीडिया पर सहायता की अपील करने की सलाह दी। अपील का असर हुआ और भारत के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका समेत विभिन्न जगहों से मदद आने लगी। जिससे सर्जरी करना सुगम हो गया।

डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि वह सर्जरी की सफलता के बाद मरीज के सामान्य जीवन की उम्मीद कर रहे हैं और सबकुछ ठीक रहा तो ताकी हसन आगे लंबा जीवन जी सकते हैं। हालांकि इस मामले की जटिलता को ध्यान में रखते हुए उनकी टीम मामले में आगे नजर बनाए रखेगी।

16 घंटे तक हुई सर्जरी

अस्पताल के हैड, नेक और ब्रेस्ट आंकोप्लास्टी विभाग के प्रमुख डॉ. मनदीप एस मल्होत्रा ने कहा, “मरीज की स्थिति की जांच करने के बाद लगा कि सर्जरी जानलेवा हो सकती है क्योंकि मामला बेहद जटिल था और ट्यूमर बड़े हिस्से में फैल चुका था। पहले की जा चुकीं उनकी कुछ सर्जरियों से भी जटिलता बढ़ गयी थी और ताकी हसन को अपनी एक आंख गंवानी पड़ी।” हालांकि उन्होंने बताया कि 16 घंटे की लंबी सर्जरी के बाद हमें लगा कि ताकी के आत्मविश्वास ने इस लड़ाई को जीतने में हमारी मदद की। दिल्ली के वसंत कुंज स्थित अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक और विभागाध्यक्ष डॉ राणा पारित ने भी सर्जरी में देखरेख रखी। डॉ मल्होत्रा ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि ताकी की आंख के उपर हुआ ट्यूमर एक तरह का सिर का कैंसर या सरकोमा है जिसमें वह बाद में रेडियेशन भी करेंगे ताकि आगे कैंसर फिर से पनपने की आशंका को कम किया जा सके।

क्या है सरकोमा

सरकोमा एक अलग तरह का कैंसर होता है और इस बीमारी में हड्डियों, उपास्थियों, मासंपेशियों आदि में ट्यूमर हो जाता है। डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि उनके सामने इस तरह का यह पहला मामला था जिसमें मस्तिष्क तक प्रभावित होने वाला था। ऐसे मामले तो पहले सामने आये हैं जिनमें मरीज की आंख पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इस रोग के आनुवांशिक होने की संभावना तथा इसके पनपने के कारणों के सवाल पर डॉ. मल्होत्रा ने कहा, “इस बीमारी को लेकर हमारी जानकारी अभी सीमित है। बहुत ज्यादा आंकडे इसे लेकर उपलब्ध नहीं हैं। हो सकता है कि अगले पांच साल में हमें और जानकारी मिल जाए। अभी हमारा अध्ययन इस पर जारी है।” उन्होंने कहा कि यह मुख कैंसर की तरह नहीं है जिसके लिए तंबाकू सेवन को कारण माना जाता है।

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