दूरस्थ शिक्षा के जरिए मिली पीएचडी की डिग्री को नहीं मिलेगी मान्यता

दूरस्थ शिक्षा के जरिए मिली पीएचडी की डिग्री को नहीं मिलेगी मान्यतादूरस्थ शिक्षा से पीएचडी के कार्यक्रमों को नहीं मिलेगी मान्यता। 

लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने हाल ही में एक परिपत्र जारी किया है। आयोग की ओर से जारी किए गए परिपत्र के मुताबिक दूरस्थ शिक्षा (डिस्टैंस लर्निंग) के माध्यम से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) कार्यक्रमों के लिए प्राप्त डिग्री को मान्यता नहीं दी जाएगी।

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परिपत्र के मुताबिक केवल फुलटाइम और अंशकालिक (पार्टटाइम) कार्यक्रमों को ही डिग्री के रूप में माना जाएगा। यूजीसी के नियमों को कम से कम शिक्षकों की नियुक्ति के लिए और विश्वविद्यालयों में दूसरे शैक्षणिक कर्मचारियों को हाल ही में अपटेड किया गया है।

इस बदलाव के अनुसार केवल नियमित मोड पीएचडी मान्यता प्राप्त होगी। 17 मार्च के परिपत्र में इसकी घोषणा की गई है। यूजीसी विनियमों की संशोधित प्रति उच्च शिक्षा, 2010 में मानकों के रखरखाव के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ उपायों में अध्यापकों की नियुक्ति और अन्य शैक्षिक कर्मचारियों के लिए न्यूनतम योग्यता पर अधिसूचित किया गया है। इसे 11 जुलाई 2016 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया।

आयोग को 'नियमित मोड' की सटीक परिभाषा के आधार पर पूरे देश के कॉलेजों से कई प्रश्न प्राप्त हुए थे। इसे एक कदम आगे बढ़ाते हुए यूजीसी द्वारा एक और परिपत्र अब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से संबंधित वेबसाइटों पर अपलोड करने की सोच रहा है। कॉलेजों को यह जानकारी जल्द से जल्द यूजीसी के साथ साझा करने के लिए कहा गया है।

अधिकांश पंजीकृत विश्वविद्यालय केवल पूर्णकालिक या अंशकालिक पीएचडी कार्यक्रमों की पेशकश करते हैं। कुछ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) जैसे विश्वविद्यालयों के साथ ही यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपेन यूनिवर्सिटी (वाईसीएमयूयू) दूरस्थ शिक्षा मोड में डिग्री प्रदान करते हैं। इसके साथ ही एमयू सहित विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा मोड में पीएचडी की पेशकश नहीं करते हैं।

एमयू के रजिस्ट्रार एम ए खान ने कहा, "हम केवल पूर्णकालिक अनुसंधान छात्रों (छात्रवृत्ति के साथ या उसके बिना) को अंशकालिक काम करने की अनुमति देते हैं। इसके साथ ही निश्चित रूप से कभी इस तरह का कार्यक्रम नहीं हैं।"

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