‘नोट रद्द किए जाने से भारत भ्रष्टाचार मुक्त नहीं बन सकता’

Ashish DeepAshish Deep   14 Nov 2016 9:11 PM GMT

‘नोट रद्द किए जाने से भारत भ्रष्टाचार मुक्त नहीं बन सकता’प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

बीजिंग (आईएएनएस)| चीन के समाचार पत्र में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि 500 और 1000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण की पहल साहसिक और निर्णायक जरूर है, लेकिन इस जोखिम भरे कदम से देश भ्रष्टाचार मुक्त नहीं होगा।

चीनी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' में प्रकाशित इस लेख में नरेंद्र मोदी की 'चौंकाने वाली और अचानक पहल की' सराहना की है जिससे भारत में एक अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है और लाखों लोगों को घोर असुविधा हो रही है।

लेख में कहा गया है कि उच्च मूल्य वाले दो नोटों को अमान्य करने का फैसला जोखिम भरा जरूर है लेकिन साहसी और निर्णायक है। फिर भी देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के लिए नोट पर रोक लगाने से कहीं अधिक के उपायों की जरूरत होती है।

प्रकाशित लेख के लेखक एई जून ने कहा, "मोदी बेहतर चाहते हैं और उनका निर्णय भारत की हकीकत पर आधारित है, क्योंकि भूमिगत अर्थव्यवस्था में अधिकांश अवैध व्यापार केवल नगद में होते हैं और भारत में प्रचलित नकदी में 80 प्रतिशत हिस्सा 500 और 1000 नोटों का है। फिर भी, हम शायद ही कह सकते हैं कि नए नियम से भ्रष्टाचार पूर्णरूपेण खत्म हो जाएगा।"

प्रकाशित लेख के अनुसार, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए कई कदम उठा चुके हैं, पर ये कदम दंतहीन रहे हैं और इनसे समस्या की सतह पर खरोंच तक नहीं लगी थी।

लेख में कहा गया, "यह देखने के लिए अधिक समय चाहिए कि मोदी की नीति भारत में भ्रष्टाचार को कोई बड़ा झटका देगी। यह कटु सत्य है कि भ्रष्ट और धोखेबाज लोग केवल नकद में गैर कानूनी सौदे नहीं करते, बल्कि सोना, रीयल एस्टेट और विदेशों संपत्ति अर्जित करने में इस्तेमाल करते हैं। बड़े नोटों का चलन रोकना निसंदेह पर्याप्त नहीं है।"

लेख में कहा गया है कि भ्रष्टाचार खत्म करने का मूल मंत्र व्यवस्थागत सुधार है। दैनिक समाचार पत्र ने भारत को भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए चीन की प्रभावी पद्धति का सहारा लेने की भी सलाह दी है। लेख में कहा गया, "विगत कई वर्षो में चीन ने भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों को बढ़ावा दिया, न्यायिक प्रणली में व्यापक सुधार किया और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए।"

चीन सरकार के अनुसार, विगत तीन वर्षो में करीब दस लाख अधिकारी दंडित किए गए हैं जिसे वह शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का परिणाम मानती है।

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