प्रधानमंत्री कार्यालय को भी नहीं पता कि नोटबंदी के बारे में किन अधिकारियों से सलाह ली गई

प्रधानमंत्री कार्यालय को भी नहीं पता कि नोटबंदी के बारे में किन अधिकारियों से सलाह ली गईपीएमओ ने कहा है कि इस बारे में उसे भी कोई सूचना नहीं है कि 500 व 1000 रुपए के नोटों पर पाबंदी लगाने से पहले इस बारे में किन अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया गया था।

नई दिल्ली (भाषा)। आठ नवंबर को पीएम मोदी ने नोटंबदी का अचानक ऐलान कर सभी देशवासियों को चकमे में डाल दिया था। उसी के बाद से इस बात की खूब चर्चा रही कि प्रधानमंत्री के इस फैसले के बारे में बहुत कम लोगों को ही मालूम था। अब इस बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कहा है कि इस बारे में उसे भी कोई सूचना नहीं है कि 500 व 1000 रुपए के नोटों पर पाबंदी लगाने के निर्णय से पहले इस बारे में किन अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया गया था।

पीएमओ ने आरटीआई के तहत इस सवाल का भी जवाब देने से इनकार किया कि 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों पर पाबंदी लगाने से पहले क्या मुख्य आर्थिक सलाहकार व वित्त मंत्री की राय ली गयी थी। इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने जवाब में कहा कि सवाल सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत ‘सूचना’ की परिभाषा में नहीं आता।

आरटीआई में और क्या-क्या सवाल किए गए

  • -आरटीआई के तहत यह जानकारी मांगी गई थी कि नोटबंदी के निर्णय से पहले किन अधिकारियों की राय ली गयी थी, इसके जवाब में पीएमओ ने कहा, ‘जो सूचना मांगी गई है, वह इस कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।'
  • -आवेदनकर्ता ने यह भी जानना चाहा था कि क्या नोटबंदी की घोषणा से पहले इस मुद्दे पर व 500 और 1,000 रुपए के प्रतिबंधित नोटों को आसानी से बदलने के संदर्भ में सरकार की तैयारियों को लेकर कोई बैठकें हुई थी।
  • -सूचना में यह भी जानकारी मांगी गई कि क्या सरकार ने यह विचार किया था कि नए 2,000 रुपए के नोट लाने से एटीएम में सुधार की जरूरत होगी और क्या किसी अधिकारी या मंत्री ने निर्णय का विरोध किया था।
  • -आवेदनकर्ता ने यह भी जानना चाहा था कि कोई ऐसा अनुमान रिकॉर्ड में था कि प्रतिबंधित नोट को नए नोट में बदलने कितने समय की जरूरत होगी।

इन सभी सवालों के जवाब में पीएमओ ने कहा कि ये सब आरटीआई कानून के तहत सूचना की परिभाषा के दायरे में नहीं आते।

इससे पहले, रिजर्व बैंक ने भी छूट उपबंध का हवाला देते हुए इस प्रकार की सूचना का खुलासा करने से इनकार कर दिया था और कहा कि ये सवाल आरटीआई कानून के अंतर्गत नहीं आते हैं।

आरटीआई कानून के तहत आने वाली जानकारियां

आरटीआई कानून में सूचना की परिभाषा के दायरे में रिकॉर्ड, दस्तावेज, ज्ञापन, ई-मेल, राय, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, ऑर्डर, लॉगबुक, अनुबंध, रिपोर्ट, दस्तावेज, नमूने, मॉडल समेत किसी भी रूप में कोई सामग्री आती है। साथ ही इलेक्ट्रानिक रूप में आंकड़ा व किसी निजी निकाय से संबंधित सूचना जिसे सार्वजनिक रूप से प्राप्त किया जा सकता है, इसके दायरे में आते हैं।

नोटबंदी पर सलाह के सवाल आरटीआई दायरे में हैं

पूर्व सूचना आयुक्त शैलेष गांधी ने कहा, ‘किसी से सलाह ली गई या नहीं, यह रिकॉर्ड का मामला है और आरटीआई कानून के दायरे में आता है।' पीएमओ ने नोटबंदी के बाद लोगों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हो, यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछे गए सवाल को वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के प्रकोष्ठ को भेजा है। साथ ही बड़ी राशि के पुराने नोटों पर पाबंदी से पहले छापी गई 2,000 और 500 रुपए की नई मुद्रा की संख्या व नोटबंदी के कारणों के बारे में भी सवालों को आर्थिक मामलों के विभाग के पास भेजा गया है।

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