क्वीन मेरी अस्पताल में मशीन के हुक की खराबी की वजह से जल गया बच्चा

क्वीन मेरी अस्पताल में मशीन के हुक की खराबी की वजह से जल गया बच्चाक्वीन मैरी अस्पताल में बच्चे की हालत बनी हुई है गंभीर।

लखनऊ। क्वीन मेरी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बच्चे की जान पर मुसीबत बन गयी है। यह बच्चा आज जिन्दगी और मौत के बीच झूल रहा है। लापरवाही के बावजूद अस्पताल प्रशासन इसकी जांच तक कराने को तैयार नही है। बता दें कि अस्पताल में वॉर्मर मशीन के खराब हो जाने की वजह से बच्चे के शरीर का काफी हिस्सा झुलस गया है।

समय पर नहीं किया गया मेंटेनेंस

वार्मर एक ऐसी मशीन है। जिसमें जिन्दगी बचाने के लिए बच्चे को रखा जाता है। ऐसी मशीन का समय-समय पर मैकेनिक से मेंटेनेंस होता रहना चाहिए। मगर मेंटेनेस तो दूर की बात है, मशीन सही चल रही है या नहीं, इस बात पर भी कभी आलाधिकारियों का ध्यान नहीं गया। और अब जब इस लापरवाही से इतनी बड़ी घटना हो गयी है तो आलाधिकारी इसकी जांच कराने तक को तैयार नही है।

वॉर्मर पर ऑक्सीजन सपोर्ट के सहारे

घटना शनिवार रात की है। आशियाना निवासी रितेश वाजपेई की पत्नी कविता ने 15 दिसंबर को क्वीन मेरी में बेटे को जन्म दिया था। 19 दिसंबर को बच्चे की हालत बिगड़ गई और तेज बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ होने लगी। डॉक्टरों ने बच्चे की हालत गंभीर देख क्वीन मेरी के पहले तल पर स्थित नियो नेटल यूनिट (एनएनयू) में भर्ती कर दिया। शनिवार रात करीब नौ बजे बच्चा रेडिएंट हीटर से लैस वार्मर पर ऑक्सीजन सपोर्ट के सहारे सो रहा था।

पिता काट रहे चक्कर

इसी बीच रेडिएंट हीटर में स्पार्किंग हुई और आग नवजात के मुंह में लगी ऑक्सीजन हुड तक पहुंच गई। ऑक्सीजन हुड के सहारे आग बच्चे के चेहरे तक पहुंच थी और बच्चा बुरी तरह झुलस गया। अब बच्चे के पिता रितेश बाजपेयी घटना की जांच के लिए पुलिस से लेकर समाज सेवी एनजीओ तक के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न तो पुलिस सुन रही और न ही आलाधिकारी जांच कराने को तैयार है।

पिता का छलका दर्द

बच्चे के पिता का कहना है कि नियो नेटल यूनिट का स्टाफ पूरा सस्पेंड किया जाए। जब तक उनको काम से बर्खास्त नही किया जाएगा, तब तक मेरी रूह को सूकून नही मिलेगा। मेरे बच्चे का क्या हाल कर दिया, यहां के डाक्टरों ने। मैं यह सोचकर यहां आया था कि मेरी पत्नी और मेरा बच्चा दोनों सही सलामत घर जाएं, लेकिन इन लोगों ने मेरी बच्चे का बुरा हाल कर दिया है। मैं अपनी बेटे की इस तरह की फोटो पेपर में छपवाना नही चाहता था। लेकिन मैं चाहता हूँ कि जैसा मेरी बेटे के साथ हुआ है, वैसा किसी की भी बच्चे के साथ न हो। रितेश बाजपेई से जब गांव कनेक्शन के संवाददाता ने बात की तो एक पिता का दर्द आखों से छलक गया। उन्होंने आगे कहा कि मशीन का तापमान बढ़ गया था। डाक्टर को इस बात की भनक तक नही पड़ी और बच्चा झुलस गया। हम लोगों को बच्चे के जलने की जानकारी तक नहीं दी गयी। अस्पताल की लाइट काटकर अंधेरे में बच्ची को रूई और कागज से लपेटकर चुपचाप ट्रामा में भर्ती कर दिया। उसके बाद मुझे फोन किया कि बच्ची को एन्टीबायोटिक दवाएं दी गयी थी, जिस वजह से बच्ची को छालें निकल आए हैं। ट्रामा में जाकर पता चला कि बच्चा जल गया है।

जलने से बच गयी बच्चे

जिस वक्त यह घटना हुई उस समय मशीन में पांच बच्चे और भर्ती थे। गनीमत यह रही कि वह सही सलामत मशीन से निकाल लिए गए। जिससे यूनिट में भर्ती पांच बच्चों की जान बाल-बाल बच गई।

पुलिस वालों ने भी नही सुनी मेरी

वहीं, बच्चे के पिता ने आगे कहा कि हमने 100 नम्बर पर फोन किया। पुलिस आयी मगर उसने भी हमारी नही सुनी और न हमारी एफआईआर लिखी। उनका कहना है कि वह बच्ची को ठीक करके देंगे। जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नही होती, हमको सुकून नही मिलेगा। मैं चाहता हूँ कि जैसा मेरी बेटे के साथ हुआ वैसा किसी के साथ न हो।

मशीन के हुक की खराबी की वजह से जल गया बच्चा

जबसे क्वीन मेरी बना है, तब से एनएनयू काम कर रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। आज तक ऐसा नही हुआ। वार्मर का हुक थोड़ा नीचे हो गया था जिस वजह से शार्ट शर्किट हो गया। मगर अब वीसी ने उसको बनवा दिया है।
डॉ. एससी तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, केजीएमयू

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