नये साल में राजस्थान सरकार के लिए किसानों, युवाओं को संतुष्ट करना बड़ी चुनौती होगी

नये साल में राजस्थान सरकार के लिए किसानों, युवाओं को संतुष्ट करना बड़ी चुनौती होगीराजस्थान के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी।

जयपुर (भाषा)। राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष, किसान नेता और BJP के एक विधायक का मानना है कि राजस्थान सरकार के लिए नये साल में अपने वादों को पूरा करना, किसानों की समस्याओं का समाधान करना, मजदूरों की मजदूरी, युवाओं को रोजगार देने की घोषणा पर खरा उतरने की प्रमुख चुनौती होगी।

हालांकि राजस्थान के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने किसानों की अनदेखी के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को आत्म सम्मान दिया है। प्रकृति द्वारा किसानों के साथ किये गये उपहास को उसने उपहार में बदलने का काम किया है। सरकार किसानों के विकास के लिए सतत काम कर रही है।

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने कहा कि प्रदेश के किसान, मजदूर, नौजवान और आम जनता परेशान है। आने वाले साल में सरकार को इनकी चिंता करनी होगी। नोटबंदी के कारण किसान, मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुए है।

उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी नहर से किसानों को सिंचाई का पूरा पानी नहीं मिलने से किसान आन्दोलित है। इसके बावजूद सरकार ध्यान नहीं दे रही है जबकि केंद्र और पंजाब में इसी दल की सरकारे हैं। राजस्थान सरकार को पंजाब-राजस्थान जल बंटवारे को लेकर उपजे हालात पर विचार करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार कैशलेस की बात कर रही है, लेकिन कितने किसानों ओैर मजदूरों के पास मोबाइल है। कैशलेस करने की योजना अच्छी है, लेकिन सरकार इसके लिए मूलभूत जरुरतें तो उपलब्ध करवाये। नोटबंदी से किसान और मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। BJP सरकार में आन्तरिक कलह का खामियाजा जनता भुगत रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों को बरगलाना और ठगना बंद कर जनता से किये गए वादों को पूरा करना चाहिए।

BJP के वरिष्ठ विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने जनता से जुड़े मुद्दों पर अनदेखी को लेकर अपनी पार्टी की प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि सरकार को आने वाले साल में स्वयं का वित्तीय प्रबंधन सुधारना होगा। गलत वित्तीय प्रबंधन के कारण राजस्व घटा है। बीस हजार किलोमीटर सड़क बनाने की घोषणा की गयी, लेकिन बनी केवल पांच किलोमीटर सड़क। तेल शोधक संयंत्र का मुद्दा अटका हुआ है। सरकार को पार्टी कार्यकर्ताओं और जनभावना की कदर करना होगा।

अखिल भारतीय किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा ‘सरकार किसानों की अनदेखी, उपेक्षा बंद कर उनके प्रति समर्पित हो तो देश का भाग्य बदलेगा और आत्मसम्मान बढेगा। किसानों को उनकी फसल लागत का डेढ गुणा मूल्य दें ताकि किसान खुशहाल होगा और अपने पैरों पर खडा होगा तो देश भी आगे बढ़ेगा और किसी अन्य देश के आगे हाथ नहीं फैलायेगा।'' उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किसानों की अनदेखी की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार सही दिशा में चले वर्ना इसके दुष्प्ररिणाम भुगतने होंगे।

राजस्थान के कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी ने कहा कि सरकार किसानों के लिए बल्कि हर वर्ग के उत्थान और विकास के लिए काम कर रही है। सरकार ने तीन साल के दौरान एक लाख 98 हजार से अधिक किसानों को फसल बीमा के रुप में 429 करोड़ रुपये का भुगतान किया है जबकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने किसानों को नहीं बल्कि बीमा कम्पनियों को ही करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया।

सैनी ने कहा कि सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आमदानी को दुगुनी करने के लक्ष्य को पाने के लिए तेजी से काम कर रही है। उन्होंने राज्य सरकार को किसान हितैषी सरकार बताते हुए कहा कि सरकार कलेवा योजना के तहत 48 लाख किसानों को पांच रुपये में भर पेट खाना दे रही है।

उन्होंने नोटबंदी को जायज ठहराते हुए कहा कि किसानों को समय पर खाद, बीज और उर्वरक उपलब्ध करवाये गये। किसानों को नोटबंदी से किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई। दिक्कते हुई है केवल कांगे्रस और किसान विरोधियों को। बीकानेर जिले के लूणकरणसर से निर्दलीय विधायक और पूर्व वित्त मंत्री मानिक चंद सुराणा ने कहा कि सरकार आम लोगों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान दे। किसान, युवा वर्ग परेशान है। उन्होने कहा कि सरकार को अगले साल जनता से किये गये वादों को पूरा करने की ओर विशेष ध्यान देना होगा।

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