रिकॉर्ड 64 सप्ताह के समय में लखनऊ पहुंची पहली मेट्रो ट्रेन

रिकॉर्ड 64 सप्ताह के समय में लखनऊ पहुंची पहली मेट्रो ट्रेनसमय से पहले लखनऊ पहुंची मेट्रो।

लखनऊ। मेट्रो परियोजना की पहली रेल को परीक्षण से पहले ट्रैक पर सेट करने की कवायद रविवार को सरोजनी नगर स्थित मदर डिपो में शुरू कर दी गई। इस मौके पर अभी तक मेट्रो की बोगियों के कवर नहीं खोले गए हैं। उनको क्रेन की मदद से डिपो के ट्रायल ट्रैक पर व्यवस्थित करने का काम आला अधिकारियों के नेतृत्व में किया गया है। एलएमआरसी को अपनी पहली ट्रेन रिकॉर्ड समय में राजधानी पहुंची है। तय समय 65 सप्ताह की जगह एलएमआरसी को ये ट्रेन 64 सप्ताह में ही एलस्ट्राम कंपनी ने दी है। चेन्नई की श्री सिटी में मेट्रो ट्रेन का निर्माण किया गया है।

यह एक बड़ा मील का पत्थर

अमौसी में शनिवार की रात मेट्रो ट्रेन पहुंच गई थी। जबकि रविवार की सुबह पहली ट्रेन सेट के चार कोच ट्रांसपोर्ट नगर डिपो में पहुंच कर उतार दिये गये। एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव और अन्य निदेशकों समेत कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी इस दौरान डिपो में मौजूद रहे। एलएमआरसी के लिए यह एक बड़ा मील का पत्थर है। बोगी बनाने वाली कंपनी ने तय समय से पहले ही बोगियां एलएमआरसी को सौंप दी हैं।

कम से कम अवधि यही है

2 सितंबर, 2015 को लखनऊ मेट्रो की ओर से 20 मेट्रो ट्रेन का कांट्रेक्ट एल्स्ट्राम लिमिटेड को दिया गया था। इन 20 ट्रेनों में 80 बोगियां होंगी। जबकि पहली ट्रेन परीक्षण के लिए डिपो में आ चुकी है। यह अभी तक एक मील का पत्थर है कि सिर्फ 64 हफ्तों में मेट्रो ट्रेन की आपूर्ति हो रही है। दुनिया भर में किसी भी मेट्रो कंपनी के लिए मेट्रो रोलिंग स्टॉक (मेट्रो ट्रेन) की आपूर्ति के लिए कम से कम अवधि यही है।

सुरक्षा और सुंदरता में मिसाल होंगी बोगियां

मेट्रो ट्रेनों की मुख्य डिजाइन सुरक्षा सुविधाओं प्रणाली में डिजाइन श्रेष्ठ हैं। इसकी बोगियों में आपात स्थिति में अग्निरोधी सामग्री, आग के धुएं का पता लगाने और संरक्षण, सुरक्षित यात्री निकासी का इंतजाम है। सीधे कंट्रोलर से बात करने के लिए स्विच बोगी के भीतर दिया गया है। अंदर सीसीटीवी कैमरा है। जिसके जरिये ट्रेन की सारी गतिविधियां केंद्रीयकृत सुरक्षा नियंत्रण कक्ष में देखी जा सकेंगी। कुल 1100 लोग एक साथ गाड़ी में सफर कर सकेंगे, जबकि बैठने का स्थान 186 लोगों का होगा। बाकी लोग खड़े होकर सफर करेंगे। दिव्यांगों के लिए व्हील चेयर पर बैठ कर सफर करने की व्यवस्था होगी। आपातकाल की दशा में लोग सीधे ही ट्रेन ड्राइवर से एक बटन दबा कर बात कर सकेंगे। जबकि एक बोगी में कुल 18 मोबाइल चार्जिंग पोर्ट दिए जाएंगे।

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