उन्नाव में दो साल पहले हुए निर्माणों में हुए 22 लाख के घोटाले में 12 पर मुकदमा दर्ज

उन्नाव में दो साल पहले हुए निर्माणों में हुए 22 लाख के घोटाले में 12 पर मुकदमा दर्जप्रतीकात्मक तस्वीर (साभार गूगल इमेज)

नवाबगंज (उन्नाव)। कागजों पर काम दिखाकर सरकारी रुपए के गबन के मामले में आखिरकार बड़ी कार्रवाई हो ही गई। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नवाबगंज विकासखंड में हुए घालमेल पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख पुत्र समेत 12 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें तत्कालीन दो बीडीओ, दो ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, दो ग्राम प्रधान (एक मृतक), ब्लॉक के दो बाबू और दो टीए शामिल हैं। सोमवार को हुई इस कार्रवाई की चर्चा मंगलवार को दिनभर विभागों और संबंधित क्षेत्रों में होती रही।

अन्य विकासखंडों में भी हड़कंप मच गया

कार्रवाई की जद में आए लोगों पर फर्जी तरह से नौ निर्माण कार्यों को कागजों पर दिखाकर 22 लाख रुपए के गबन का आरोप है। इस घोटाले का एक वर्ष पूर्व ही खुलासा हो गया था। हालांकि, अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई थी। प्रशासन द्वारा सख्ती बरते जाने के बाद हुई कार्रवाई से जिले के अन्य विकासखंडों में भी हड़कंप मच गया है।

यह है पूरा मामला

7 जुलाई, 2015 नवाबगंज विकासखंड के मलांव से क्षेत्र पंचायत सदस्य रही प्रभुता सिंह ने तत्कालीन सीडीओ को शिकायती पत्र देकर ग्राम पंचायत हिम्मतगढ़, भैसौंरा, रानीपुर, कोटवा, अजैयाखेड़ा, भितरेपार आदि में वित्तीय वर्ष 2014—15 और 2015—16 में फर्जी तरह से निर्माण कार्य कराने का आरोप लगाया था। सीडीओ को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया था कि कागजों पर 9 कार्य दिखाकर मेसर्स बाबा ब्रिक्स व सूर्या ट्रेडर्स गौरा कठेरवा को लाखों रुपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया। जिन फर्मों को भुगतान किया गया उनमें बाबा ब्रिक्स के स्वामी धीरेंद्र प्रताप सिंह और सूर्या ट्रेडर्स के दुर्गेश प्रताप सिंह हैं। शिकायत के बाद तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट अर्चना द्विवेदी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। जांच में पता चला था किजिन फर्म को भुगतान किया गया है वह सीमेंट ईंट निर्माण व ठेकेदारी के लिए पंजीकृत हैं।

12 लोगों पर अजगैन थाने में मुकदमा दर्ज

हालांकि, इन्हीं फर्म पर सामाग्री के नाम पर 22 लाख 14 हजार 610 रुपए का भुगतान लिया गया। मामले की जानकारी में आने के बाद जब दबाव बढ़ा तो एक लाख 76 हजार 963 रुपए वापस भी कर दिए गए। उक्त मामले पर अब डीएम सुरेंद्र सिंह के आदेश के बाद सीडीओ संजीव सिंह ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए। इस पर बीडीओ नवाबगंज शेषमणि सिंह ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख पुत्र समेत 12 लोगों पर अजगैन थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।

पूर्व ब्लॉक प्रमुख पुत्र, दो बीडीओ समेत 12 पर दर्ज हुआ मुकदमा

बीडीओ द्वारा दी गई तहरीर में जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है उनमें धीरेंद्र प्रताप सिंह पूर्व प्रमुख पुत्र, सुषमा देवी तत्कालीन बीडीओ, मुकुल कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन बीडीओ, दुर्गेश प्रताप सिंह सूर्या ट्रेडर्स, देशरत्न शुक्ला सहायक लेखाकार, धर्मेंद्र सिंह सहायक लेखाकार, सुंदरलाल गुप्ता ग्राम पंचायत अधिकारी, चंद्रसेन पाल तकनीकी सहायक, अनिल रावत तकनीकी सहायक, राजेश कुमार ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी हिम्मतगढ़ और रामभरोसे ग्राम प्रधान भैंसौरा शामिल हैं।

नौ कार्यों में किया गबन

विकासखंड कार्यालय में जिन निर्माण कार्यों को कागजों पर दिखाकर फर्जी भुगतान कराने का आरोप लगाया गया है उनमें गढ़ी में कैथनखेड़ा मार्ग पर सड़क निर्माण कार्य शामिल है। इस कार्य में सामग्री के नाम पर 2,47,989 रुपए का भुगतान कराया गया था। हिम्मतगढ़ बड़ौर में संपर्क मार्ग से बाबू के दरवाजे तक नाली निर्माण में 2,9,959 रुपए, हिम्मतगढ़ में नथईखेड़ा में मुन्नीलाल के दरवाजे से राजाराम के दरवाजे तक नाली निर्माण में 2,95,69 रुपए, भैसौंरा कैथनखेड़ा में कुंवारे के दरवाजे से जगदीश के दरवाजे तक खड़ंजा कार्य में 3,03,00 रुपए, भितरेपार में मनोज के दरवाजे से दीपक के दरवाजे तक खड़ंजा निर्माण, अजैयाखेड़ा कसंडा में खड़ंजा निर्माण कार्य में 2,29,80 रुपए, रानीपुर डामररोड से डॉक्टर के घर तक खड़ंजा में 2,2,20 रुपए, कोटवा में बिंदा के दरवाजे से श्रीराम के दरवाजे तक मिट्टी खड़ंजा कार्य में 2,33,70 रुपए और सरोसा शीतलखेड़ा में विनोद के दरवाजे से अमरइया तालाब तक नाली निर्माण कार्य में 1,59,56३ रुपए के गबन का आरोप लगा है।

दबा दी गई थी घोटाले की आवाज

इस पूरी कार्रवाई के पीछे वर्षों से ब्लॉक में बादशाहत रखने वाले परिवार के हाथ से ब्लॉक जाना ही टर्निंग प्वाइंट माना जा रहा है। वर्षों से घोटालों की आवाज उठने के बाद भी दबती रही। मगर बीते ब्लॉक प्रमुख चुनाव में सपा के युवा कद्दावर अरुण सिंह ने बाहुबली माने जाने वाले परिवार को मात देकर ब्लॉक पर कब्जा जमा लिया था। तभी से माना जा रहा था की दबी घोटाले की फाइलें अब अफसरों की टेबल पर सरपट दौड़ेंगी। मगर कई महीने के बाद घोटालों की फाइल पहले की तरह दबी ही रही। मगर अब हुई इस कार्रवाई की चर्चा मंगलवार को भी चारों ओर होती रही।

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