उद्यान विभाग के जरिये निजी कंपनियों के बीज बिकवा रहे अफसर

उद्यान विभाग के जरिये निजी कंपनियों के बीज बिकवा रहे अफसरप्रतीकात्मक फोटो। (साभार: गूगल)

सुधा पाल

लखनऊ। जिला उद्यान विभाग के जरिये निजी कंपनियों के बीज बेचे जा रहे हैं। कर्मचारियों को 30-30 हजार रुपये के बीज बेचने का जिम्मा दे दिया गया है। आरोप है कि जिन कर्मचारियों ने इससे इन्कार किया, उनको सस्पेंड कर दिया गया है। जिला उद्यान अधिकारी, लखनऊ के द्वारा मनमाने तरीके से किसानों को नियमविरुद्ध बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। निजी कंपनियों की मिली भगत से अधिकारी अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव डालकर उनसे लाभार्थी किसानों को बीज बंटवाए जा रहे हैं। अधीनस्थ कर्मचारियों ने इस बात का खुलासा तब किया, जब किसानों ने बीजों में गुणवत्ता न होने पर उन्हें लेने से मना कर दिया। जिसके बाद अधिकारी ने कर्मचारियों को बीज वापस लाने पर निलंबित कर दिया है। इस तरह का मामला सामने आने के बाद उद्यान विभाग में विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई है।

30,000 रुपये के बीज नहीं बेच पाए तो कार्यमुक्त

जिला उद्यान अधिकारी डीके वर्मा के अधीनस्थ कर्मचारी कृष्ण कुमार (माली) का कहना है कि मिशन योजना के अंतर्गत डीके वर्मा ने उन्हें 1400 ग्रा. लौकी बीज (राशई कम्पनी), 3 किग्रा करेला बीज और 400 ग्राम तोरई बीज (वीएनआर सीड्स कम्पनी) किसानों को बेचने के लिए दिया था। कुल 60000 रुपए के बीज उन्हें दिए गए थे। इसमें से कृष्ण कुमार ने 30,000 रुपए के बीज किसानों को बेचकर शेष राशि के बीज अधिकारी को वापस लौटा दिए। इसके बाद अवशेष बीजों के बेचने के लिए उनपर अधिकारी द्वारा दबाव डाला, जिसका विरोध करने पर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया। वहीं दूसरे कर्मचारी रजवंत सिंह (माली) ने बताया कि उन्हें 760 ग्राम करेला बीज (वीएनआर सीड्स कम्पनी) और एक केजी लौकी बीज (रासी सीड कंपनी के) बांटने के बाद उसकी कीमत जमा करने के लिए निर्देशित किया गया था।

सतर्कता के बावजूद लापरवाही

उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण महासंघ (उप्र) के अध्यक्ष बलराम सिंह ने बताया कि लगभग 60,000 रुपए के बीज कर्मचारियों को किसानों को बांटने के लिए उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने बताया कि विभाग में हो रहे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सभी जनपदीय उद्यान अधिकारियों को पहले ही सतर्क किया गया था। इसके बावजूद यह लापरवाही की गई। निर्देशों के अनुसार, शाकभाजी बीजों और और अन्य रोपण सामग्री को किसानों तक डीबीटी के जरिए पहुंचाया जाएगा। इस तरह से बीज वितरण के दौरान निजी कंपनियां भी लगभग 40 फीसदी कमीशन लेती हैं। इसके साथ ही किसानों को भी खराब गुणवत्ता के बीज मिल रहे हैं। किसानों ने बीज की बढ़ी कीमतों पर भी शिकायत की हैं।

किसानों ने भी बीजों के लिए बढ़ी कीमत की शिकायत विभाग से की। किसानों ने यह बोलकर बीज नहीं लिया कि बुवाई का समय निकल गया है। इसलिए बीज वापस लाने पर अधिकारी ने बीज कंपनी को देने के लिए 11000 रुपए मेरे वेतन से मांगे। मेरे मना करने पर उन्होंने मुझपर झूठा आरोप लगाया और निलंबित कर दिया।
रजवंत सिंह, पीड़ित कर्मचारी

जहां मोदी भ्रष्टाचार खत्म करने के प्रयास में लगे हैं, वहीं यहां किसानों के साथ लूट मची है। अगर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो संघ द्वारा आंदोलन किया जाएगा।
बलराम सिंह, अध्यक्ष (उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण महासंघ)

कर्मचारियों द्वारा लगाया गया आरोप गलत है। वे अपने बचाव में ऐसा कर रहे हैं। अनुशासनहीनता, मदिरा पान और अपने दुर्व्यवहार के कारण तीन मालियों को अन्य सहकर्मियों की गवाही के साथ निलंबित किया गया है। इनमें जिला उद्यान, लखनऊ के रजवंत सिंह, अधीक्षक उद्यान के कृष्ण कुमार और उपनिदेशक उद्यान के सुनील कुमार शामिल हैं।
डीके वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी

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