नोटबंदी पर सरकार की आलोचक रही शिवसेना लोकसभा में आज समर्थन में उतरी

नोटबंदी पर सरकार की आलोचक रही शिवसेना लोकसभा में आज समर्थन में उतरीनोटबंदी के मुद्दे पर शिवसेना के आनंदराव अडसुल ने लोकसभा में कहा, ‘‘हमने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले का स्वागत किया है। यह जरुरी कदम था।’’

नई दिल्ली (भाषा)। नोटबंदी के मुद्दे पर शुरु में सरकार की आलोचना कर रही राजग सरकार में सहयोगी शिवसेना ने बडे नोटों को अमान्य करने के मोदी सरकार के कदम का बुद्धवार को समर्थन करते हुए कहा कि यह फैसला जरुरी था और सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाये हैं, जिनसे जनता को राहत मिलने लगी है।

नोटबंदी के मुद्दे पर शिवसेना के आनंदराव अडसुल ने लोकसभा में कहा, ‘‘हमने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले का स्वागत किया है। यह जरुरी कदम था।'' उन्होंने कहा कि पिछले ढाई साल से कालेधन को रोकने की बात हो रही थी और इसे चलन से बाहर करना जरुरी था।

अडसुल ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले से जनता को हो रही परेशानियों से चिंतित थी लेकिन बुद्धवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम लोगों को राहत देने का आश्वासन दिया और आज राहत भरे कदम सामने आये हैं।

शिवसेना सांसद ने कहा, ‘‘मंगलवार को शिवसेना सांसदों से बातचीत में प्रधानमंत्री ने हमें आश्वासन दिया था कि परेशान हो रही जनता को राहत प्रदान की जाएगी। बुद्धवार को कुछ राहत भरे निर्णय आये हैं।'' उन्होंने इस संबंध में नाबार्ड द्वारा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए 21000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता दिये जाने की आज हुई घोषणा का हवाला दिया। गौरतलब है कि कल शिवसेना कई सांसदों ने नोटबंदी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इससे पहले गत आठ नवंबर को नोटबंदी के मोदी सरकार के ऐलान के बाद शिवसेना ने सरकार की आलोचना की थी।

शिवसेना ने जनता को इस फैसले से हो रही परेशानियों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा था और राष्ट्रपति भवन तक तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में निकाले गये मार्च में हिस्सा लिया था। हालांकि तब शिवसेना ने राष्ट्रपति को ममता बनर्जी की ओर से दिये ज्ञापन में हस्ताक्षर नहीं किये थे। हालांकि तब भी शिवसेना सांसदों ने कहा था कि वह बड़े नोटों को बंद करने के फैसले के खिलाफ नहीं हैं लेकिन इससे जनता को बहुत परेशानी हो रही है।

हाल ही में शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया, ‘‘नोटबंदी के फैसले के कारण सरकार लोगों का ध्यान भूख, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और आतंकवाद जैसे मुद्दों से भटकाने में कामयाब रही है। सरकार बड़ी ही सफलतापूर्वक लोगों के ध्यान से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे भुला रही है।''

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