साहब, हमारी जान की कोई कीमत नहीं 

साहब, हमारी जान की कोई कीमत नहीं गोमतीनगर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण म्यूजियम में चल रहे निर्माण में भी सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

बसंत कुमार

लखनऊ। बुन्देलखण्ड के महोबा जनपद के रहने वाला बबलू कुशवाहा अपने गाँव से कुछ महीने पहले ही लखनऊ आया था। कुछ सपने थे। पैसे कमाकर अपने परिवार के लोगों को ख़ुश रखने के सपने। एक साल पहले ही बबलू की शादी हुई थी, लेकिन बबलू के सपने सोमवार सुबह उसके साथ ही खत्म हो गए। बबलू सुबह-सुबह क्रासिंग मशीन की सफाई कर रहा था, तभी किसी ने मशीन को चला दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गयी।

सिर्फ बबलू कुशवाहा ही नहीं, इसी तरह शकूर भी...

ऐसी कहानी सिर्फ बबलू कुशवाहा की ही नहीं है। कुछ दिन पहले ही हज़रतगंज स्थित साड़ी भवन में बहराइच जनपद के रहने वाले मजदूर शकूर की मौत करंट लगने से हो गयी थी। मजदूर शकूर के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि जेनरेटर खराब होने की सूचना शकूर ने कई बार मालिक को दिया था, लेकिन उन्होंने इसपर ध्यान नहीं दिया और करंट लगने से उसकी मौत हो गयी।

परिवार वालों ने लगाया आरोप

शकूर के परिवार वालों ने साड़ी भवन मालिक पर यह भी आरोप लगाया कि पहले तो मालिक ने शकूर की मौत की सूचना नहीं दी और दूसरी बात जानकारी मिलने के बाद जब हम लोग लखनऊ पहुंचे तो मालिक हमें डराने लगा कि पुलिस में मामले दर्ज़ करोगे तो ठीक नहीं होगा।

नहीं लेता है कोई जिम्मेदारी

गाँवों में गरीबी और काम नहीं मिलने की स्थिति में शहर कमाने आने वाले मजदूरों की स्थिति बेहद खराब है। उनसे ज्यादा काम कराया जाता है और पैसे कम दिए जाते हैं। पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण मजदूर कॉन्ट्रैक्ट वगैरह भी नहीं बनवाते, उस स्थिति में उनकी जान जाने के बाद भी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है।

सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाती कम्पनियां

इसी साल फरवरी में सचिवालय में बन रही बिल्डिंग से गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गयी थी। सचिवालय के निर्माणधीन बिल्डिंग पर काम कर रहे रवि और राजन सातवीं मंजिल पर बीम बांध रहे थे, तभी यह घटना घटी और उनकी मौत हो गयी। तब दोनों के परिजनों ने मौत का कारण सुरक्षा के इंतजाम नहीं होना बताया था।

कोई सुरक्षा कवच नहीं

राजधानी में चाहे बिल्डिंग निर्माण हो या सीवर की सफाई, हरेक जगह नियमों का उल्लंघन हो रहा है। शहर में सीवर की सफाई करने के लिए मजदूर बिना किसी सुरक्षा कवच के सीवर के अंदर घुस जाते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा रहता है।

क्या कहते हैं श्रमिक

सीवर का काम करने वाले शिवम बताते हैं कि सीवर में बिना किसी सुरक्षा उपकरण के घुसने पर अगर हम मौत से बच जाते हैं तो कई बीमारियों और पैर कटने से नहीं बच पाते है। सीवर के अंदर अँधेरा होता। कई बार लोग सीवर में कांच फेंक देते है, जब हम अंदर काम करने जाते हैं तो पैर कट जाता है। शिवम काफी सालों से सीवर का काम कर रहा है।

नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

राजधानी में जगह-जगह चल रहे लोक निर्माण विभाग के काम हो या व्यक्तिगत निर्माण हो, सभी जगह नियमों को ताक पर रखकर काम हो रहा है। गोमतीनगर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण म्यूजियम में चल रहे निर्माण में भी सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।

न पैरों में जूता, न सिर पर हेल्मेट

म्यूजियम के निर्माण में काम कर रहे मजदूरों के पैरों में ना जूता है और ना ही सिर पर सुरक्षा देने वाली हेल्मेट। बिल्डर ने बस कुछ कर्मचारियों को पतला सा जैकेट दे दिया है। मजदूर 10वीं और 12वीं मंजिल पर चढ़कर खाली पैर बीम बांध रहे हैं और काम कर रहे हैं। अगर मजदूर का हल्का सा पैर इधर-उधर हुआ तो उनका बचना मुश्किल होगा।

पेट के लिए जान से खेल रहे हैं

यहाँ काम करने वाले मजदूर बताते हैं कि हमें कोई भी सुरक्षा का उपकरण नहीं मिलता है। मजदूर बताते हैं कि हम दस फ्लोर तक जाकर बीम बांधते हैं। मगर क्या करें, पेट के लिए जान से खेल रहे हैं। काम नहीं करेंगे तो पेट कैसे भरेगा।

कहीं नहीं दर्ज होता है नाम

राजमिस्त्री का काम करने वाले रामधार बताते हैं कि साहब, हमारी जान की कोई कीमत नहीं है। कम्पनियां आजकल बेहद चालाकी से काम कर रही हैं। जब काम करने के लिए कोई ठेकेदार हमें ले जाता है तो किसी भी रजिस्टर में वो हमारा नाम दर्ज नहीं करता है। हमें एक उपस्थिति कार्ड थमा दिया जाता है। जिस पर ना ही कम्पनी का नाम लिखा होता है और ना ही ठेकेदार का। ऐसा कंपनियां इसलिए कर रही है ताकि किसी मजदूर की मौत के बाद उसे मुआवजा नहीं देना पड़े। रामधार भवन निर्माण कर्मकार मजदूर यूनियन के अध्यक्ष रह चुके हैं।

हमने सभी को सुरक्षा के मानकों को पालन करने का निर्देश दिया है। नियमों का मजाक उड़ाने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ जरूर कार्रवाई की जाएगी।
ओपी मिश्र, मुख्य इंजीनियर, लखनऊ विकास प्राधिकरण

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