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दो वर्ष में कनहर सिंचाई परियोजना का हुआ मात्र 50 फीसदी निर्माण

दो वर्ष में कनहर सिंचाई परियोजना का हुआ मात्र 50 फीसदी निर्माणपरियोजना पर चालू है निर्माण कार्य।

राकेश गुप्ता/भीम जायसवाल (कम्यूनिटी जर्नलिस्ट) 29 वर्ष

दुद्धी (सोनभद्र)। प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार कनहर सिंचाई परियोजना क्षेत्र के अति पिछड़े, सूखाग्रस्त व नक्सल प्रभावित ग्रामों की बंजर भूमियों के सिंचाई के लिए निर्माण की ओर अग्रसर है। कनहर सिंचाई परियोजना के निर्माण से सोनभद्र के दुद्धी व चोपन ब्लॉक के 108 ग्रामों के असिंचित भूमि को सिंचित कर किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।

कनहर सिंचाई परियोजना की वर्तमान लागत 2239 करोड़ निर्धारित की गयी है। इसे पूर्ण करने का लक्ष्य 2018 तक है। परियोजना का शिलान्यास यूं तो वर्ष 1976 में हो गया था लेकिन करीब 38 वर्ष से लम्बित होने के बाद सपा सरकार ने इस परियोजना के प्रति गम्भीरता दिखाते हुए निर्माण को शुरू कराया। वहीं, सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने वर्ष 2012 में शिलान्यास किया था। साथ ही, नवम्बर 2015 में हुए निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी किया था। कनहर सिंचाई परियोजना निर्माण की वर्तमान स्थिति यह है करीब 50 फीसदी निर्माण कार्य हो चुका है। 60 फीसदी विस्थापन पैकेज के वितरण का कार्य भी संपन्न हो चुका है। कनहर सिंचाई परियोजना निर्माण में शासन-प्रशासन विस्थापित व आम जनता का जितना सहयोग रहा उतना ही सिंचाई विभाग के शीर्ष अधिकारियों सहित अधिशासी अभियंताओं का भी। 4 दिसम्बर 2014 को तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश सिंह ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विजय कुमार व केपी पाण्डेय के साथ कनहर नदी में पूजा कर व विस्थापितों को पैकेज वितरित कर निर्माण की शुरुवात करायी। निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्र में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी थी।

मुख्यमंत्री का महत्वाकांक्षी परियोजना है कनहर।

निर्माण कार्यों पर गौर करें तो मुख्य बांध (स्पिल्वे) की निर्धारित ऊंचाई 39.9 मीटर है जो वर्तमान समय में लगातार हुए 18 ब्लॉक में कंक्रीट से स्पिल्वे की ऊंचाई 16 मीटर हो चुकी है। साथ ही, 3.24 किमी लम्बी व 39.9 मीटर ऊंची मिट्टी बांध का कार्य करीब 90 फीसदी पूरी हो चुकी है। साथ ही, साइफन सहित नहरों का कार्य प्रगति पर चल रहा है। कुड़वा में निर्माणधीन 2.6 किमी लम्बी टनल का निर्माण करीब 25 फीसदी व कोहलिन्डुबा में निर्माणाधीन एक्वाडकट 1.770 किमी करीब 25 फीसदी निर्माण हो गया है। वर्तमान समय में एक्वाडक्ट व टनल का निर्माण कार्य बंद चल रहा है। कारण, किसानों द्वारा भूमि अधिगृहीत नहीं हो पाना है। इन भूमियों को अधिग्रहित किया गया था उन पर निर्माण कार्य हो चुका है। शेष किसानों से भूमि अधिग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है। 2239 करोड़ रुपये की लागत की निर्माणाधीन कनहर सिंचाई परियोजना के लिए पिछले दो वर्षों में नाबार्ड द्वारा 850 करोड़ रुपये दिए गए। इसमें करीब 750 करोड़ रुपए निर्माण कार्य में खर्च हो चुके हैं। कनहर सिंचाई परियोजना की प्रथम सूचि के 1810 विस्थापितों में से अब तक 698 विस्थापितों को पैकेज की पूरी धनराशि दी गयी है। शेष विस्थापितों को दो लाख 11 हजार रुपए की धनराशि दी गयी है। कुल 1669 विस्थापितों को अब तक 71 करोड़ 13 लाख 87 हजार धनराधि वितरित की जा चुकी है। शेष को पैकेज राशि दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, 1400 विस्थापितों को पुनर्वास कॉलोनी में प्लॉट भी वितरित किया जा चुका है।

पुनर्वास कॉलोनी में लोगों ने नहीं बनाए मकान।

1906 विस्थापितों की सूची चस्पा

निर्माणाधीन कनहर सिंचाई परियोजना के ग्रेविटी बांध के निर्माण में लगने वाले कंक्रीटिंग के केंद्रीय मृदा एवं सामग्री परीक्षण संस्थान नई दिल्ली द्वारा चिन्हित क्षेत्र में पिछले छह माह से ब्रेक हुई ब्लास्टिंग का कार्य प्रशासनिक समझौते के बाद 9 दिसम्बर 2016 को शुरू हो गयी। बता दें कि परियोजना क्षेत्र के विस्थापितों द्वारा पैकेज राशि वितरित किये जाने के बाद ब्लास्टिंग किये जाने की मांग पिछले एक माह से कर रहे थे और इस बीच दर्जन भर बैठक प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ विस्थापितों की बैठक हुई थी लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका था लेकिन विगत बुधवार 7 दिसम्बर को जिलाधिकारी सीबी सिंह व एसपी लल्लन सिंह ने दुद्धी विधायक रूबी प्रसाद के साथ कनहर फील्ड हास्टल पर जाकर विस्थापितों को समझाया था और सुंदरी गाँव के लोगों से पहले पुनर्वास पैकेज दिए जाने के निर्देश दिए थे।

द्वितीय सूची के लोगों का नाम चस्पा कर दिया गया है। इनमें जिन विस्थापितों का नाम छूटा हो वे अपने साक्ष्य के साथ दस्तावेज जमा करें। जांच के बाद सही पाये जाने पर नाम जोड़ने की सम्भावना बनी तो जरूर जुटेगा।
हेमंत वर्मा, अधिशासी अभियंता।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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