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#स्वयंफेस्टिवल: ज़िंदगी जीने का सबक सिखाती कहानियों से बच्चों की हो रही मुलाक़ात 

Neeraj TiwariNeeraj Tiwari   3 Dec 2016 11:53 AM GMT

#स्वयंफेस्टिवल:  ज़िंदगी जीने का सबक सिखाती कहानियों से बच्चों की हो रही मुलाक़ात काहनी के संसार में बच्चों की खुशियां हुईं दोगुनी।

शाहजहांपुर। एक छत के नीचे कहानियों का संसार सा बस गया है। छोटे-छोटे बच्चों को स्वयं फेस्टिवल के तहत कहानी सुनाकर जीवन जीने का सलीका सिखाया जा रहा है। कोहरे को पार करते हुए कड़कड़ाती ठंड में स्कूल पहुंचे बच्चे स्वयं फेस्टिवल का लुत्फ ले रहे हैं।

बच्चों के हर सवाल का कहानी के जरिए दिया गया जवाब।

दरअसल, गाँव कनेक्शन की ओर से यूपी के 25 जिलों में आयोजित किए जा रहे स्वयं फेस्टिवल के तहत जनपद में दो से आठ दिसंबर तक विभिन्न ब्लॉक में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस बीच अजीजंगज में प्रीतम लाल पब्लिक स्कूल में कहानी पाठ का आयोजन किया गया। इसमें तोता और बहेलिया की कहानी सुनाकर बच्चों को संगत से होने वाली सफलता और असफलता की कहानी के बारे में बताया गया। कहानी पाठ के साथ ही बच्चों को अच्छे लोगों की संगत में रहने और बुरे लोगों से दूर रहने के लिए संकल्प दिलाया गया। कक्षा एक में पढ़ने वाले छह साल के श्याम यादव ने अपनी तुतलाती आवाज़ में कहा, “आज कहानी सुनकर बहुत मजा आया। क्या कल भी कहानी सुनाई जाएगी?” वहीं, केजी में पढ़ने वाले आदित्य वर्मा ने बताया, “बहेलिया की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुरे के साथ रहोगे तो बुरे बनोगे और अच्छे के साथ रहोगे तो अच्छे बनोगे।”

मार्शल आर्ट प्रशक्षण पाकर छात्राओं का चेहरा खिला।

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग पाकर छात्राएं हो रहीं मजबूत

गाँव कनेक्शन फाउंडेशन की ओर से आयोजित किए जा रहे इस स्वयं फेस्टिवल का नज़ारा कुछ ऐसा दिख रहा है कि हर उम्रवर्ग के लोगों के लिए इसमें कुछ खास है। इसी के तहत प्रीतम लाल स्कूल के प्रांगण में मार्शल आर्ट प्रशिक्षण का भी आयोजन किया गया। इसमें छोटी कक्षा से लेकर इंटर तक की छात्राओं को मार्शल आर्ट के दांव-पेंच सिखाते हुए खुद को मजबूत बनाने और औरों की मदद करने के लिए प्रेरणा दी गई।

मार्शल आर्ट प्रशक्षण पाकर छात्राओं का चेहरा खिला।

इस ट्रेनिंग कैम्प का हिस्सा बनकर कक्षा ग्यारह की छात्रा अंजली ने बताया, “स्वयं फेस्टिवल के तहत मार्शल आर्ट सीखकर काफी अच्छा लगा। इसे सीखकर हम अपनी व औरों की भी मदद कर सकते हैं।” वहीं, कक्षा छह की प्रेरणा का कहना है, “यदि उनके स्कूल में इसे रोज सिखाया जाए तो वह इस खेल को और सीखना चाहेंगी।”

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