शिक्षक नहीं आए स्कूल, बच्चों ने मिड-डे-मील खाया और चले गए

शिक्षक नहीं आए स्कूल, बच्चों ने मिड-डे-मील खाया और चले गएशिक्षक स्कूल नहीं आए तो बच्चे खेलने में हुए मशगूल। 

सुखवेन्द्र सिंह परिहार (कम्यूनिटी जर्नलिस्ट)

मैनवार (ललितपुर)। अध्यापकों को मोटी पगार दी जाती है लेकिन अध्यापकों की मंशा खराब है। बुंदेलखंड में तो शिक्षा की स्थिति और खराब है। अध्यापक अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं। स्कूल में नियमत: आते भी नहीं हैं।

ललितपुर जनपद से 62 किमी दूर महरौनी ब्लॉक की पंचायत मैनवार की ग्राम सभा इमलाखेरा (मैनवार) के प्राथमिक विघालय में 17 नवंबर यानी गुरुवार को दोपहर करीब 12:30 बजे बच्चे मैदान में खेल रहे थे। कारण, स्कूल बंद था। बच्चों के बस्ते एक तरफ रखे थे। स्कूल के बंद होने कारण पूछा गया तो बच्चों ने एक सुर में बताया, "मास्साब! ललितपुर से आऊत, आज नई आय, तबई तो स्कूल बंद है।"

वे आगे बताते हैं, "सुबह हम सभी 9 बजे स्कूल आ गये थे तभी से बैठे हैं लेकिन मास्साब नहीं आए। अब आएंगे भी नहीं क्योंकि वे ललितपुर से आते हैं। काफी बच्चे इंतजार करते हुए घर चले गए। अब हम सभी अपने-अपने घर जा रहे हैं। यह कहना है प्राथमिक विद्यालय इमलाखेरा (मैनवार) में पढ़ने वाले कक्षा पांच के छात्र राम सिंह का।"

"जब हम लोग स्कूल आये तो हमारे साथ पढ़ने वाली जूली (कक्षा पांच) चाबी लेकर आयी थी, स्कूल तो खुला लेकिन मास्साब नहीं आये। कोई भी पढ़ाई नहीं हुई। मिड-डे-मील में खिचड़ी बनी थी। हम सभी ने खाई। फिर जूली ने स्कूल का ताला लगा दिया, सभी बच्चे अपने-अपने घर चले गए। बस हम लोग ही बचे हैं।" यह कहना है, प्राथमिक विघालय इमलाखेरा (मैनवार) में पढ़ने वाले कक्षा पांच के छात्र राजेश का।

इस संबंध में महरौनी के एबीएसए से बात करनी चाही तो उनका मोबाइल नहीं लगा। फिर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ललितपुर के मोबाइल नंबर पर दोपहर करीब एक बजे फोन लगाया तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।

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