उत्तर प्रदेश के ग्राम प्रधान बोले इस बार नहीं बिकने देंगे वोट, न बंटेगी शराब

उत्तर प्रदेश के ग्राम प्रधान  बोले इस बार नहीं बिकने देंगे वोट, न बंटेगी शराबगाँवों में वोटों की बिक्री को रोकने के लिए कई जिलों में प्रधानों ने अपने स्तर से कमर कस ली है।

इनपुट- ऋषि मिश्र, करनपाल सिंह, दिवांशुमणि त्रिपाठी, दिति बाजपेई, दिवेंद्र सिंह, दिपांशु मिश्रा, स्वयं टीम

लखनऊ। पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में धांधली न हो, इसके लिए चुनाव आयोग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों के प्रधानों और अधिकारियों ने भी कमर कस ली है। जिले में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए कमर कस चुका जिला प्रशासन इसके लिए प्रधानों से संपर्क भी कर रहा है।

एडीआर इलेक्शन वॉच के सर्वे के मुताबिक प्रदेश के 69 फीसदी प्रत्याशी शराब, कैश बांटने, साड़ी आदि का इंतजाम कर चुके हैं। ग्रामीणों को एक बार फिर से खरीदने की तैयारी है। कानपुर देहात की ग्राम पंचायत करसा के प्रधान विकासखंड सरवनखेड़ा प्रधान डॉ. संजय सिंह ने बताया, “प्रशासनिक अधिकारी हमारे संपर्क में हैं। हम भी अपनी पंचायत में नजर रखेंगे कोई भी प्रत्याशी अगर वोटरों को लालच देने की कोशिश करेगा, उसकी जानकारी हम तत्काल एडीएम को देंगे। वोट बिकने नहीं देंगे, ये तय है।“

एडीआर सर्वे के मुताबिक विमुद्रीकरण के बाद भी उत्तर प्रदेश के इस बार के विधानसभा चुनावों में बीते वर्षों के मुकाबले 10 से 30 फीसदी ज्यादा धन खर्च होगा। शाहजहांपुर के ब्लॉक ददरौल के भरगवां गाँव के प्रधान रामसेवक बताते हैं, “इस चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए अपने गाँव में लोगों को जागरूक करेंगे, साथ ही गाँव के मजरों में अपने कार्यकर्ताओं को देख-रेख के लिए रखेंगे, जिससे कोई भी ग्रामीण किसी भी प्रकार का लेन-देन करता है तो उस पर ग्राम समाज की ओर से कार्रवाई करेंगे।”

चुनाव में प्रत्याशियों के बीच लड़ाई के अलावा गाँवों में इस बार एक अलग तरह की जंग छेड़ने की तैयारी है। गाँवों में वोटों की बिक्री को रोकने के लिए कई जिलों में प्रधानों ने अपने स्तर से कमर कस ली है। निर्वाचन आयोग की ओर से इस संबंध में प्रधानों से संपर्क किया गया है।

इसमें प्रधानों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कोई कह रहा है कि वह गाँव में रैली निकालकर ग्रामीणों को उनके मताधिकार की ताकत का अंदाजा करवाएंगे। किसी ने ऐसी गतिविधियों पर पूरी नजर रखने की बात कही। यही नहीं तेज आवाज में होने वाले प्रचार को भी रोकने का भी प्रधानों ने बीड़ा उठाया है। आह्वान बस इतना है कि इस बार गाँवों में नहीं बिकने देंगे वोट।

एडीआर इलेक्शन वॉच के सर्वे के मुताबिक, प्रदेश के 69 फीसदी प्रत्याशी शराब, कैश बांटने, साड़ी आदि का इंतजाम कर चुके हैं। ग्रामीणों को एक बार फिर से खरीदने की तैयारी है। एडीआर सर्वे के मुताबिक विमुद्रीकरण के बाद भी उत्तर प्रदेश के इस बार के विधानसभा चुनावों में बीते वर्षों के मुकाबले 10 से 30 फीसदी ज्यादा धन खर्च होगा। सर्वे में संभावित प्रत्याशियों व पार्टी पदाधिकारियों में से 69 फीसदी ने कहा कि विमुद्रीकरण का चुनाव प्रचार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि नोटबंदी के चलते सर्वे में शामिल 80 फीसदी सामान्य लोगों ने माना है कि इसकी वजह से चुनाव प्रचार में काफी कठिनाई होगी। चुनाव सामाग्री का कारोबार करने वाले 70 फीसदी व्यापारियों का मानना है कि इसके चलते उनके ग्राहक कम हुए हैं।

हमारी ग्राम पंचायत में पूरी कोशिश रहेगी कि कोई यहां पर गलत तरीके से साड़ी, शराब न बांट पाए, लोग अभी से आना शुरू हो जाएंगे, वोटरों को अपनी तरफ करने की भी कोशिश करेंगे।
जीतेन्द्र कुमार भट्ट, प्रधान, केसरहा ब्लॉक, सिद्धार्थनगर, यूपी

इस तरह से आगे आए प्रधान

नोटबंदी के बाद उम्मीद थी कि चुनाव में धन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। मगर ऐसा होता नहीं दिख रहा है। धनबल के सहारे मैदान में उतरे प्रत्याशी वोटरों को खरीदने के लिए सारे हथकंडे आजमाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। डॉ. संजय सिंह कानपुर देहात के ग्राम पंचायत करसा के प्रधान हैं। उन्होंने बताया, “प्रशासनिक अधिकारी हमारे संपर्क में हैं। हम भी अपनी पंचायत में नजर रखेंगे कोई भी प्रत्याशी अगर वोटरों को लालच देने की कोशिश करेगा, उसकी जानकारी हम तत्काल एडीएम को देंगे। वोट बिकने नहीं देंगे, ये तय है।”

गांवों में अपने कार्यकर्ताओं को देख-रेख के लिए रखेंगे, जिससे कोई भी ग्रामीण किसी भी प्रकार का लेन-देन करता है तो उस पर ग्राम समाज की ओर से कार्रवाई की जाए।
राम सेवक, प्रधान, ग्राम भरगवां,ब्लॉक ददरौल,शाहजहांपुर

कुछ इस तरह से किया गया सर्वे

संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिर्फाम (एडीआर) यूपी इलेक्शन वॉच ने बीते दिनों प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की विभिन्न सीटों पर सर्वे कराया। एडीआर उत्तर प्रदेश के मुख्य संयोजक संजय सिंह ने बताया, “प्रदेश के 10 मंडलों झांसी, बांदा, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, बनारस, गोरखपुर, इलाहाबाद, आगरा और बरेली की 30 विधानसभा सीटों पर एडीआर की रिसर्च टीम के सदस्यों ने संभावित प्रत्याशियों, पार्टी पदाधिकारियों और चुनाव में काम करने वाले कारोबारियों व कार्यकर्ताओं से सवाल पूछे और पहले तैयार प्रश्नावली भरवायी। 30 विधानसभा क्षेत्रों में 3000 लोगों से बातचीत की गई है। इनमें से 300 लोग चुनाव के उम्मीदवार और दलों के पदाधिकारी थे।

हम अपनी ग्राम पंचायत में एक अलग से टीम गठित करेंगे। वह टीम ग्राम पंचायत पर नजर रखेगी कि कोई भी ग्रामीण किसी भी प्रत्याशी से कोई उपहार लेकर वोट न दे पाए।
अनिल कुमार बाजपेई, प्रधान, ग्राम पंचायत करुवा, ब्लॉक निन्दूरा, बाराबंकी

प्रदेश को कवर करने के हिसाब से किया गया सर्वे

एडीआर के प्रमुख संजय सिंह के मुताबिक, “रैंडम तरीके से किए गए इस सर्वे में विधानसभाओं का चयन पूरे प्रदेश को कवर करने के हिसाब से किया गया है। प्रत्येक जिले में कम से कम लक्षित समूह के सात लोगों से बातचीत की गयी है। लक्षित समूह (टारगेट ग्रुप) दो प्रकार के थे। पहला प्रत्यक्ष तौर पर चुनाव से जुड़ा हुआ जैसे प्रत्याशी, पार्टियों के जिलाध्यक्ष या विधानसभा अध्यक्ष जबकि दूसरा अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा हुआ ग्रुप जैसे साउंड सिस्टम, टेंट व शामियाना हाउस, बैनर होर्डिंग कारोबारी, इवेंट या चुनाव मैनेजमेंट से जुड़े व्यापारी आदि। सर्वे के दौरान शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी रायशुमारी की गयी है।

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