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भारतीय फिल्मों में नहीं झलकती भारतीय साहित्य की गुणवत्ताः रिची मेहता

भारतीय फिल्मों में नहीं झलकती भारतीय साहित्य की गुणवत्ताः रिची मेहताभारतीय मूल के कैनेडियाई फिल्म निर्देशक रिची मेहता। 

पणजी (भाषा)। भारतीय मूल के कैनेडियाई फिल्म निर्देशक रिची मेहता को लगता है कि देश में साहित्य की एक अपार विरासत होने के बावजूद भी यह यहां बनाई जाने वाली फिल्मों में नहीं झलकता।

समीक्षकों द्वारा प्रशंसित ‘अमल' और ‘सिद्धार्थ' जैसी फिल्में बनाने वाले निर्देशक रिची ने कहा कि देश में हो रहे साहित्यक कामों को देखकर वह काफी खुश हैं, लेकिन सिनेमा जगत में यह अभी अपनी जगह नहीं बना पाया है।

रिची ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं जब भी यहां की कोई किताब पढ़ता हूं, तो वह मेरे दिमाग में घूमने लगती है, मुझे लगता है कि यह कितनी बेहतरीन तरीके से लिखी गई है। लेकिन यह फिल्म पटकथाओं के रुप में बड़े पर्दे पर नहीं आ पाती। भारतीय साहित्य की गुणवत्ता भारतीय पटकथाओं में नहीं दिखती।'' फिल्मकार के हालिया प्रोजेक्ट ‘इंडिया इन डे' को 47वें ‘अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्मोत्सव' में प्रदर्शित किया गया।

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