विश्वविद्यालयों को उद्योगों और शैक्षणिक समुदायों के बीच संवाद पर जोर देना चाहिए: जावडेकर

विश्वविद्यालयों को उद्योगों और शैक्षणिक समुदायों के बीच संवाद पर जोर देना चाहिए: जावडेकरकेंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर

नई दिल्ली (भाषा): केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और नवोन्मेष पर जोर देते हुए कहा है कि विश्वविद्यालयों को अध्ययन में सुधार लाने के लिए परिसरों में शैक्षणिक समुदायों और उद्योग जगत के बीच के संवाद को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्हें सिर्फ ‘प्लेसमेंट' तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज में आयोजित एक समारोह के दौरान जावडेकर ने कहा, ‘‘कैंपस को सिर्फ प्लेसमेंट की नहीं बल्कि उद्योग जगत और शैक्षणिक समुदाय के बीच के संवाद की जगह होना चाहिए। यह एक ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां उद्योग जगत के लोग व्याख्यान देने आएं और छात्र यहां अनुभव लेने आएं''। जावडेकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश को प्रबंधन समेत सभी क्षेत्रों में आगे ले जाने के लिए गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और नवोन्मेष जरुरी हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया की जनसंख्या में 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी के बावजूद वैश्विक व्यापार में भारत की समान हिस्सेदारी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने अब तक अपनी प्रौद्योगिकी को उतना अधिक विकसित नहीं किया है और हम अब तक लागत के लिहाज से उतने अधिक प्रतिस्पर्धी नहीं हैं''। मंत्री ने देश में इस दिशा में चल रहे बेहतर प्रबंधन कार्यों की भूमिका के बारे में बात कही। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवोन्मेष वैश्विक व्यापार में ‘‘भारत का युग'' लेकर आएंगे।

जावडेकर ने कहा, ‘‘देश को मूल्यों पर काम करने वाले प्रबंधकों की जरुरत है न कि सिर्फ कुशल और चतुर प्रबंधकों की''। कॉलेजांे में प्रवेश के दौरान बेहद ऊँचे जाने वाले कटऑफ के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत अंक लाने वाले बच्चों के परिवार भी खुश नहीं हैं. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘हम तो इतने अंक दो साल में लेकर आते थे''।

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