लगातार बढ़ती विमान दुर्घटनाओं की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

लगातार बढ़ती विमान दुर्घटनाओं की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?इंडिगो और स्पाइसडेट के विमान रनवे पर आमने-सामने आ गए थे, जिससे बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

रमेश ठाकुर

विमानन क्षेत्र में भारत आज भी दूसरे देशों से काफी पीछे है। नए विमानन नियम, नई सहूलियतें, आधुनिक तामझाम, यात्रा में सुगमता की गारंटी और कई कागजी बातें उस समय धरी की धरी रह जाती हैं, जब विमान के उड़ने से पहले अव्यवस्था की चपेट में आ जाता है।

हाल ही में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के सपाट रनवे पर एक साथ दो विमान आमने-सामने आ गए। इसे एटीएस की गलती कहें या विमानन कंपनियों की तकनीकी नाकामी या फिर पायलटों की लापरवाही, मगर इसे घोर लापरवाही ही कहा जाएगा।

28 दिसंबर को देश में दो बड़े विमान हादसे होते-होते बचे। एक दिल्ली और दूसरा गोवा में। दोनों घटनाओं ने सुरक्षित हवाई यात्रा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विमानन कंपनियां इस समय सवालों के घेरे में हैं और होना भी चाहिए। गोवा और दिल्ली में एक ही दिन दो बड़ी विमान घटनाएं चिंता की बात है।

गोवा में विमान जिस तरह लैंडिंग के दौरान अपना संतुलन खोकर धरती पर गिरा और हादसा होने से बचा, उसे कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे। अंदर बैठे यात्रियों ने बाहर निकलकर बताया कि जब विमान रनवे पर फिसल रहा था, तो धड़ाम-धड़ाम की तेज आवाजें उन्हें सुनाई दे रही थीं। विमान तेजी से अचानक मुड़ा और आगे की तरफ तेज आवाज करता हुआ एकदम झुक गया। थोड़ी देर के लिए सभी यात्रियों की सांसें थम सी गईं।

विमान का लैंडिंग गियर जिस तरह से क्षतिग्रस्त हुआ है, उससे हादसा होने की कल्पना की जा सकती है। लैंडिंग गियर पूरी तरह से चकनाचूर हो गया। जेट एयरवेज के इस विमान में 161 यात्री यात्रा कर रहे थे। घटना के वक्त थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विमान में सवार क्रू-मेम्बर यात्रियों को छोड़ खुद की जान बचाने के लिए तेजी से उतरते दिखाई दिए। इस कारण आपाधापी में 12 यात्री जख्मी हो गए।

सवाल उठता है कि यात्रियों की सुरक्षा आखिर कौन करेगा? दोनों घटनाओं में विमानन कंपनियों की नाकामी प्रत्यक्ष रूप से सामने आ रही है। उनकी तकनीक में अव्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। हालांकि यह गलती न विमानन कंपनी स्वीकार करेगी और न ही सरकारी तंत्र।

विमान का अगला जिस तरह हिस्सा रनवे को पार करता हुआ दूसरी तरफ जाकर जमीन को छू गया, उससे प्रतीत हो रहा है कि इसमें सिर्फ पायलट की गलती रही होगी। विमान के अंदर लोग दहशत में आ गए, क्योंकि उस वक्त उन्हें जोरदार झटका लगा। घटना की प्रारंभिक जांच करते हुए प्रशासन ने फिलहाल दोनों पायलटों के लाइसेंस अस्थायी तौर पर रद्द कर दिए हैं।

सवाल उठता है कि क्या यह सब करने से हादसों को रोका जा सकेगा? शायद नहीं! घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, दोषी कर्मचारियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए।

हरियाणा का चरखी दादरी विमान हादसा शायद ही कोई भूल पाए। उस हादसे को भारत में अब तक के सबसे बड़े हवाई हादसे में गिना जाता है। उस घटना को याद कर हर किसी का रूह कांप उठता है। एटीसी से जुड़े भारत में अब तक का यह सबसे बड़ा हवाई हादसा है।

दिल्ली की तरह 12 नवंबर, 1996 में चरखी दादरी में दो विमानों में 'मिड एयर कॉलिजन' हुआ। एक विमान सऊदी अरब का था तो दूसरा कजाकिस्तान का। उस हादसे में दोनों विमानों में सवार सभी 349 यात्रियों में से कोई जिंदा नहीं बचा।

चरखी दादरी विमान हादसे में रूसी जहाज के पायलट की गलती सामने आई थी। वजह यह थी कि उसे एटीसी के दिशा-निर्देश ठीक से समझ नहीं आ रहे थे। एटीसी उसे बता रहा था कि वह गलत रूट पर जा रहा है। दरअसल, रूसी पायलट को अंग्रेजी नहीं आती थी। वह रूसी भाषा ही जानता था। भाषा नहीं समझ पाने के कारण पायलट ने सामने से आ रहे दूसरे जहाज में टक्कर मार दी।

उस हादसे में दोनों जहाजों में यात्रा कर रहे यात्रियों की जान चली गई। उस घटना के बाद एयर मैनुअल नियम में एक संशोधन किया गया। हर देश में एटीसी और पायलट के लिए अंग्रेजी जरूरी आनी चाहिए। इस हादसे के बाद एटीसी के लोग अंग्रेजी तो सीख गए, लेकिन हादसे नहीं थमे।

विमान हादसों में अक्सर खराब मौसम होने की दुहाई दी जाती है। लेकिन ऐसे हादसों का मानवीय चूक भी बहुत बड़ा कारण है। लेकिन इस पर एकाएक किसी का ध्यान नहीं जाता या ध्यान जानबूझकर नहीं दिया जाता।

विमानन क्षेत्र में अक्सर कहा जाता है कि भारत का एविएशन सेक्टर अभी भी विश्वस्तरीय नहीं है। हिंदुस्तान में महज दिल्ली, मुंबई जैसे दो-तीन ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हवाईअड्डे हैं, जबकि देश में एविएशन सेक्टर में भारी संभावनाएं हैं। यह क्षेत्र सालाना 14 फीसदी की दर से प्रगति कर रहा है।

दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शुमार भारतीय एविएशन सेक्टर का अभी तक उचित दोहन नहीं किया गया है। टियर दो और टियर तीन श्रेणी के शहरों को तो हवाई रूट से जोड़ा ही नहीं गया है, जबकि आर्थिक तरक्की के साथ इन शहरों में हवाई यात्री बढ़े हैं।

विमानन क्षेत्र में पिछले दो दशकों से ईमानदारी से काम नहीं किया गया। यही कारण है की इस क्षेत्र का स्तर पिछले बीस सालों में काफी गिरा है।

दिल्ली-गोवा की इन दोनों घटनाओं ने विमान यात्रियों की आशंकाएं बढ़ दी हैं, क्योंकि हाल ही में विमान संबंधी भयावह घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले सप्ताह ही रूस का एक विमान समुद्र में समा गया। यात्रियों में हवाई सफर को लेकर डर है। इन ताजा घटनाओं ने डर को और बढ़ा दिया है।

तकनीकी नाकामी से विमान दुर्घटनाएं होती रही हैं। अब विमानन कंपनियों द्वारा सुरक्षा संबंधी लापरवाही और अशांत क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान भरने को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं। आखिर कैसे हो सुगम हवाई यात्रा?

हालांकि इन दोनों घटनाओं पर केंद्र सरकार ने नाराजगी जाहिर की है। सख्त जांच के आदेश पारित किए हैं। अगर पायलटों की गलती सामने आती है तो प्रशासन को ऐसे सभी पायलटों को अयोग्य घोषित कर देना चाहिए, जो यात्रा के दौरान लापरवाही दिखाते हैं। क्योंकि उनकी थोड़ी सी चूक कई लोगों की जान ले सकती है।

पूर्व की घटनाओं को देखें तो एयर इंडिया का विमान पहले भी कई बार हादसों की शिकार हो चुका है। खराब मौसम, पायलट की चूक या फिर कोई तकनीकी समस्या से अब तक हवाई हादसों में अनगिनत यात्रियों ने अपनी जान गंवाई है। जनवरी, 1978 में पहली बार एयर इंडिया का विमान अरब सागर में गिरा था। उस विमान में 213 यात्री सफर कर रहे थे, जिनकी जिंदगी का वह आखिरी सफर साबित हुआ। विमान में सवार सभी लोग मारे गए।

इसके बाद 21 जून, 1982 को एयर इंडिया का एक और विमान मुंबई हवाईअड्डे पर क्रैश हुआ। विमान में सवार 111 लोगों में से 17 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना में प्रत्यक्ष रूप से पायलटों की गलती सामने आई। जांच में पाया गया कि पायलट की गलती से यह हादसा हुआ।

साल 1988 में एक बार फिर अहमदाबाद में एयर इंडिया का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह हादसा इतना भयंकर था कि विमान में सवार 124 लोग मारे गए थे, जबकि पांच यात्रियों को बचा लिया गया था। ठीक दो साल बाद 1990 में बेंगलुरू में फिर एक विमान हादसा हुआ। विमान में 146 पैसेंजर थे, जिनमें से 92 की मौत हो गई थी।

सन् 1991 में एयर इंडिया का विमान इंफाल में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें 69 लोगों की मौत हुई थी। साल 2000 में एलायंस एयर फ्लाइट सीडी-7412 पटना हवाईअड्डे पर हादसे का शिकार हो गया। इसमें 60 लोगों की मौत हो गई थी।

अधिकांश घटनाओं में देखने को मिला है कि खराब रखरखाव व अन्य तकनीकी खराबियों की वजह से हादसे हुए। कुछ में पायलटों की नाकामी भी सामने आई थी।

भारत के सभी रनवे और विमानों को आधुनिक करने की जरूरत है। दक्ष पायलटों को ही विमान उड़ाने की इजाजत होनी चाहिए। जरूरी है कि विमानों का रखरखाव ठीक से हो और समय-समय पर जांच हो, ताकि यात्री भयमुक्त होकर विमानों में सफर कर सकें। (आईएएनएस/आईपीएन)

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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