छुट्टा जानवरों से कौन बचाएगा? 

छुट्टा जानवरों से कौन बचाएगा? अन्ना प्रथा को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री व नीति आयोग को किसानों ने बताया दर्द।

नई दिल्ली/लखनऊ। पिछले महीने बुंदेलखंड के ललितपुर जिले में एक किसान की पूरी फसल अन्ना पशु (छुट्टा गाय) बर्बाद कर गए, मायूस किसान ने जान दे दी। बुंदेलखंड में ऐसे मामले दोबारा न हों इसलिए बुंदेलखंड के किसान और जनप्रतिनिधियों ने दिल्ली में कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से मुलाकात कर इस समस्या के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की।

गुरुवार को यूपी और मध्य प्रदेश के 13 जनपदों के 35 प्रतिनिधियों ने दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री, कृषि मंत्रालय और नीति आयोग के सचिव और अधिकारियों के साथ मुलाकात कर किसानों की पीड़ा बताई। पिछले कई वर्षों से लगातार सूखे का सामना कर रहे बुंदेलखंड में इस वर्ष अच्छी बारिश के चलते रबी की फसलों का भी रकबा बढ़ा है, लेकिन बुवाई करने वाले किसान काफी परेशान हैं। वो रात-रातभर जागकर खेतों की रखवाली कर रहे हैं।

हम लोगों ने कृषि मंत्री और दूसरे अधिकारियों को बताया कि कैसे बुंदेलखंड में हालात बदतर होते जा रहे हैं, खेती तो चौपट हो रही है, किसानों के आपस में लड़ाई के मामले भी बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं ये बेजुबान पशु भी हिंसा का शिकार हो रहे हैं इसलिए इस समस्या के लिए राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए।”
नसीर सिद्दीकी, राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय बुन्देलखंड विकास मंच

बैठक में शामिल रहे अखिल भारतीय बुन्देलखंड विकास मंच राष्ट्रीय महासचिव नसीर सिद्दीकी ने गाँव कनेक्शन को बताया, “हम लोगों ने कृषि मंत्री और दूसरे अधिकारियों को बताया कि कैसे बुंदेलखंड में हालात बदतर होते जा रहे हैं, खेती तो चौपट हो रही है, किसानों के आपस में लड़ाई के मामले भी बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं ये बेजुबान पशु भी हिंसा का शिकार हो रहे हैं इसलिए इस समस्या के लिए राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए।”

बैठक में कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि अन्ना प्रथा के उन्मूलन के लिए केंद्र ने गोकुल ग्राम योजना शुरू की है। जिसके तहत 520 एकड़ जमीन आवंटित होने पर 1000 गोवंश को पाला जा सकेगा, लेकिन इसके लिए राज्य सरकारों के सहयोग की आवश्यकता होगी। हालांकि किसानों ने इसके धरातल के साकार होने पर संदेह जताया। नवीनतम जानकारी (पशुगणना 2012) के मुताबिक बुन्देलखंड में 24 लाख गाय हैं, जिनमें ज्यादातर छुट्टा है। सिर्फ बुंदेलखंड ही नहीं, छुट्टा जानवरों (जिनमें ज्यादातर गोवंश हैं) से उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों में भी किसान परेशान हैं। स्वयं फेस्टिवल के दौरान बाराबंकी, सीतापुर, गोंडा, ललितपुर, रायबरेली समेत कई जिलों में किसानों ने छुट्टा जानवरों को बड़ी समस्या बताया। प्रतापगढ़ में किसानों ने दालों की खेती बंद कर दी है।

सीतापुर में नैमिष के आलू और टमाटर बोने वाले किसान नंदू पांडे बताते हैं, “छुट्टा जानवरों ने जीना हराम कर रखा है। कांटे वाले तार लगवाना हर किसान के बस की बात नहीं है। हमारे यहां तो किसानों ने इस बार देरी से गेहूं बोए हैं ताकि पूरी फसल एक साथ न चौपट हो जाए। न जाने क्यों सरकार किसानों के लिए कैंसर साबित हो रही इस समस्या के लिए कोई सार्थक कार्ययोजना नहीं बना रहीं।”

छुट्टा जानवरों में ज्यादातर देशी नस्ल की गाय हैं जो अनुपयोगी हैं। खेती में इनका इस्तेमाल तो रहा नहीं, दूध भी इतना कम देती हैं कि किसान इऩ्हें छुट्टा छोड़ देते हैं। यूपीए सरकार में बुंदेलखंड पैकेज के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर नस्ल सुधार और बधियाकरण के प्रोजेक्ट शुरू किए थे, लेकिन उनका असर जमीन पर नहीं दिखा। छुट्टा गाय और गोवंश के चलते किसान खेती छोड़ रहे हैं।

बांदा में अऩ्ना जानवरों को चिन्हित कर लगाए जा रहे हैं टैग

बांदा। बुंदेलखंड के अन्ना प्रथा उन्मूलन के तहत हमीरपुर, महोबा, बांदा, जालौन और हमीरपुर में पहले चरण में 5000 जानवरों को बधिया किया गया है। इनकी पहचान के लिए कानों पर पीले टैग भी लगाए गए हैं लेकिन छुट्टा जानवरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि समस्या निपटती नजर नहीं आ रही। ललितपुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ जीवनदत्त ने स्वयं फेस्टिवल के दौरान कहा कि इनकी नस्ल खराब होने से ये दूध कम देती हैं, जिससे किसान इऩ्हें पालते नहीं है। इसलिए जिले में 25,000 पशुओं के बधियाकरण का लक्ष्य जिले में रखा गया है।

गिर और साहीवाल नस्ल से गर्भित हों गाय

सीतापुर। छुट्टा जानवरों से परेशान जिले के किसानों को सलाह देते हुए पशु वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह ने कहा कि किसान गिर और साहीवाल नस्ल के सांड़ों से गाय गर्भित करवाएं। सांड न होने की स्थिति कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों पर ले जाएं। सीतापुर में किसानों ने ऐसे छुट्टा जानवारों को एक साथ रखकर उनके गोबर और मूत्र से जैविक उर्वरक और कीटनाशक बनाने का फैसला किया है, ताकि खेती की लागत तो कम हो ही इन जानवरों से भी बचा जा सके।

राष्ट्रीय गोकुल ग्राम मिशन

छुट्टा जानवरों की समस्या के निदान के लिए केंद्र ने राष्ट्रीय गोकुल ग्राम मिशन की योजना शुरू की है। इसके तहत 520 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी, जो राज्य सरकार को देनी होगी। प्रोजेक्ट में खर्च का 60 फीसदी केंद्र जबकि 40 फीसदी राज्य सरकार को वहन करना है, जहां 1000 गोवंश रखे जा सकते हैं। नसीर सिद्दीकी बताते हैं, योजना का प्रारूप छोटा किए जाने की जरूरत है क्योंकि 520 एकड़ जमीन किसी जिले में मिलना मुश्किल होगी। इसलिए इसे 100-200 गायों के लिए लागू किए जाने की जरूरत है। बैठक में खुद मंत्री ने राज्य सरकारों से मिलने वाले सहयोग पर संदेह जाहिर किया।”

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