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देश में पहली बार 245 लाख टन रिकॉर्ड यूरिया का उत्पादन

देश में पहली बार 245 लाख टन रिकॉर्ड यूरिया का उत्पादनGaon Connection

नई दिल्ली। आज़ादी के बाद देश में पहली बार 245 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया गया है। उर्वरक एवं रसायन मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि साल 2015-16 के दौरान देश में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्मचारियों ने दिनरात मेहनत कर यूरिया उत्पादन का एक नया रिकार्ड बनाया है।

उन्होंने कहा कि नई यूरिया नीति के आने और उसमें कंपनियों को कई तरह का प्रोत्साहन दिये जाने का फायदा यूरिया उत्पादन पर हुआ है। नई नीति के आने के मात्र 9 महीने के अंदर पहले के मुकाबले इस बार 20 लाख टन अधिक यूरिया का उत्पादन किया गया। अनंत कुमार ने कहा कि उद्योगों का लक्ष्य 310 लाख टन यूरिया उत्पादन का होना चाहिये ताकि देश इस रासायनिक उर्वरक के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो सके।

उन्होंने कहा कि इस साल 20 लाख टन अधिक यूरिया के उत्पादन के कारण अब 60 लाख टन का ही आयात करना होगा। पहले सालाना औसतन 80 लाख टन यूरिया का आयात किया जाता था। उन्होंने कहा कि उर्वरक उद्योग को दो से तीन साल में 310 लाख टन यूरिया उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना चाहिये। देश यूरिया के उत्पादन में आत्मनिर्भर होता है तो इसके बाद सार्क देशों को इसके निर्यात का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिये।

उर्वरक मंत्री ने कहा कि यूरिया का उत्पादन लागत कम से कम हो इसके लिये अनुसंधान किये जाने की जरूरत है। चीन में कोल गैस से यूरिया उत्पादन की सफल तकनीक विकसित की गई है और देश में तालचर यूरिया संयंत्र में कोल गैस के आधार पर यूरिया उत्पादन की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में अब केवल नीम लेपित यूरिया कर ही उपयोग किया जा रहा है जिसके कारण फसलों पर नीलगाय का हमला बंद हुआ है, दूध में इसकी मिलावट रूक गई है और रसायन उद्योगों में यूरिया का उपयोग बंद हो गया है।

उन्होंने कहा कि यूरिया में नीम का लेप करने से गुजरात में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने निमोला बेचकर 10 करोड़ रुपये कमाया है । कृषि मंत्री राधा मोहन ने कहा कि निजी क्षेत्र की उर्वरक निर्माता कंपनियों को ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी की जांच के लिये मोबाइल तिट्टी जांच प्रयोगशाला स्थापित करना चाहिये। उन्होंने कहा कि इफको ने इस दिशा में कदम भी उठाया है और देश में कई स्थानों पर उसका ये इस्तेमाल सफल भी हुआ है।

उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय ने इस साल 5 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है और लगभग 4.5 करोड़ किसानों को ये कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान संतुलित मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करें इसके लिये जरूरी है कि निजी क्षेत्र की उर्वरक कंपनियां अपने बिक्री केन्द्रों पर मिट्टी जांच की सुविधा उपलब्ध करायें।

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