देश में यूरिया की कमी नहीं तो किसान परेशान क्यों है ?

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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि देश में कहीं भी यूरिया की कोई कमी नहीं है मगर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और कालाबाजारी ने अभी किसानों के दर्द कम नहीं होने दिया है। कहीं सरकारी गोदामों में ब्लैक किए जाने की शिकायत है तो कहीं यूरिया है ही नहीं।

धान की फसल में किसानों को यूरिया की जरूरत है मगर सरकारीकरण के भंवर में फंसे यूरिया के इंतजाम किसानों को रुला रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गोरखपुर में खाद कारखाने का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि अब यूरिया के लिए कोई आंदोलन नहीं होता है। 

अब कोई मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को इस बात के लिए पत्र नहीं लिखता कि उसके प्रदेश में यूरिया की कमी है। मगर पीएम का ये दावा यूपी के मानकों पर खरा उतरता नहीं नजर आ रहा है। स्वयं प्रोजेक्ट के तहत राज्य के अलग-अलग जिलों के किसानों से बात कर के हमने यूरिया की उपलब्धता का सच जाना तो अलग ही नजारे सामने आए। 

प्रतापगढ़ जिले के शिवगढ़ ब्लॉक के भिखनापुर गाँव के किसान विजय सिंह (50 वर्ष) कहते हैं, “जब खाद की जरूरत है, तब नहीं मिलता है। गोदाम से सीधे दुकानों तक खाद ब्लैक हो जाती है, किसानों को वही खाद ज्यादा दाम में बेची जाती है। इस समय धान की फसल में खाद की जरुरत है तो खाद की मारामारी है।”

कानपुर देहात के कुर्सी भीतर गाँव के किसान पवन अवस्थी (25 वर्ष) कहते हैं,  “सरकारी गोदामों में खाद मिलती नहीं है, प्राइवेट दुकान से जब लेते हैं, महंगे दाम पर मिलती है। अगर सरकारी गोदामों पर जुगाड़ है तो ही खाद मिल पाती है, नहीं तो हमेशा में ब्लैक में लेनी पड़ती है, जो सौ से दो सौ रुपए महंगी होती है।”

मेरठ के किसान राम मेहर सिंह कहते हैं कि बेशक यूरिया की कमी तो नहीं है परंतु सरकारी और बाज़ार भाव में काफी अंतर है, जिसके चलते किसान सरकारी यूरिया के बदले खुदरा बज़ार से यूरिया खरीद रहा है।

इस वक्त गन्ने और धान की फसल चल रही है जिस में यूरिया के ज़रूरत अधिक होती है सरकार पहले 356 रुपए का बोरा देती थी। जिस पर हाल ही में 32 रुपए कम किए गए हैं और किसान को लगभग 324 रुपए में दिया जा रहा है जबकि खुदरा बाज़ार में 250/275 रुपए में मिल रहा है जिसकी क्वालिटी भी सरकारी से बढ़िया है ।

देश में यूरिया उत्पादन बढ़ने का दावा

भारत सरकार की यूरिया नीति 2015 का उद्देश्य देसी यूरिया उत्पादन को बढ़ावा देना और वर्तमान संयंत्रों की ऊर्जा सक्षमता को प्रोत्साहित करना है। इस नीति के कारण पिछले वर्ष की तुलना में 20 लाख मिट्रिक टन का अतिरिक्त उत्पादन हुआ है और 2015-16 में देश में 245 लाख मिट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ। 

मगर यहां तो यूरिया के लिए केवल किल्लत

रायबरेली जिले के अलीपुर आइमा गाँव के किसान रामलखन वर्मा बताते हैं, “गाँव के पास के सहकारी समिति के गोदाम में एक भी यूरिया की बोरी नहीं है। गोदाम प्रभारी से कहो तो कहते हैं, अभी बारिश हो रही है, इसलिए बोरियां गोदाम में नहीं हैं। 15-20 दिन बाद आना तब मिलेगा।”

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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