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एक-दूसरे से अपने अनुभव साझा कर रहे देश भर के गन्ना किसान

Divendra SinghDivendra Singh   29 Feb 2020 8:08 AM GMT

एक-दूसरे से अपने अनुभव साझा कर रहे देश भर के गन्ना किसान

कोई किसान प्रति एकड़ 100 टन गन्ना उत्पादन करता है, तो कोई अपने जैविक गुड़ को विदेश तक भेजता है। ऐसे ही पूरे देश के गन्ना की खेती करने वाले प्रगतिशील किसान एक जगह इकट्ठा हुए।

गन्ना प्रजनन संस्थान, करनाल में आयोजित कार्यक्रम में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा जैसे कई राज्यों के गन्ना किसान शामिल हुए। कार्यक्रम में किसानों को उन्नत खेती के गुर सिखाए गए, साथ ही प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया।

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के प्रगतिशील किसान राकेश दुबे गन्ने से जैविक गुड़ बनाते हैं और कई देशों तक भी भेजते हैं। राकेश दुबे बताते हैं, "कार्यक्रम में कुछ ही राज्यों को छोड़कर पूरे देश के बड़े गन्ना किसान शामिल हुए। अभी तक जिनसे सोशल मीडिया से जानते थे, उनसे सामने से बहुत कुछ सीखने को मिला।"


राकेश दुबे ने बाजार में सीधे गन्ना न बेचकर उसके जैविक उत्पाद बनाकर बेचना शुरू किया, जिससे वो एक एकड़ में डेढ़ से ढाई लाख रुपए कमा रहे हैं। मध्यप्रदेश के किसान राकेश दुबे गन्ने की खेती करने वाले अपने क्षेत्र के सफल किसानों में से एक हैं। जो पिछले 20 साल से गन्ने की खेती कर रहे हैं। इनके पास 40 एकड़ खेत है जिसमें 25 से 30 एकड़ में ये हर साल गन्ने की खेती करते हैं। राकेश दुबे गन्ने की खेती का अपना 20 साल का अनुभव साझा करते हुते बताते हैं, "गन्ना किसानों को बाजार में गन्ने का न तो सही भाव मिलता है और न ही समय से पैसा मिलता है। इसलिए हमारे जिले के किसान ज्यादातर गन्ने का उत्पाद बनाकर ही बेचते हैं। मैंने ये काम बड़े पैमाने पर जैविक तरीके से करना शुरू कर दिया है।"

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सांगली जिले के किसान सुरेश कबाडे भी शामिल हुए। सुरेश कबाडे अपने खेतों में प्रति एकड़ 100 टन से ज्यादा उत्पादन लेते हैं। भारत के दूसरे राज्यों के किसान तीन एकड़ में जितना गन्ना उगाते हैं उससे ज्यादा वो एक एकड़ में पैदा करते हैं। गन्ने के उत्पादन में रिकॉर्ड बनाने वाला ये किसान गन्ने से ही साल में 50-60 लाख रुपए की कमाई करता है। सोशल मीडिया पर 7 लाख से ज्यादा किसान उन्हें फॉलों करते हैं, तो हजारों किसान भारत के अलग-अलग कोनों से गन्ने की खेती सीखने उनके घर आते हैं।


सुरेश कबाडे ने बेहतर गन्ना उत्पादन के लिए अच्छी किस्म (प्रजाति- 86032) भी विकसित की है, टिश्यू कल्चर से विकसित इन किस्म में लागत कम और उत्पादन बेहतर होता है। जबकि इसमें बाकी गन्नों की अपेक्षा रोग भी कम लगते हैं। सुरेश सिर्फ 9वीं पास हैं लेकिन खेती के वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग के लोग भी उनसे खेती के गुर सीखने आते हैं। सुरेश की माने तो उनका ज्यादातर समय खेत में जाता है और वो भी ये सोचते हुई कि कम लागत में ज्यादा उत्पादन कैसे लिया जाए।

गन्ना प्रजनन संस्थान, करनाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एस. के.पांडे बताते हैं, "कार्यक्रम में किसानों को सम्मानित भी किया गया। ऐसे में किसान एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखते हैं।"


कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक गन्ना उत्पादन करने वाले किसान अचल मिश्रा को भी सम्मानित किया गया। ज्यादातर किसान खेती से परेशान हैं, वो मजबूरी में खेती कर रहे, क्योंकि उन्हें लगातार घाटा हो रहा है। लेकिन कुछ किसान हैं जिन्होंने अपनी खेती का तौर तरीका बदला, खेत में नए प्रयोग किए और वो खेत से ही पैसा भी कमा रहे हैं। अचल मिश्रा, यूपी में लखीमपुर जिले के एक ऐसे ही किसान हैं।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के पलिया इलाके के जगदेवपुर में रहने वाले अचल मिश्रा गन्ने की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। न सिर्फ उनके पास रकबा ज्यादा होता है बल्कि वो गन्ने में प्रति एकड़ उत्पादन भी काफी ज्यादा लेते हैं। गन्ने की खेती में नए प्रयोग कर उत्पादन बढ़ाने के लिए वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में सम्मान पा चुके हैं।


अचल की खेती देखने के लिए दूर-दूर से किसान उनके खेत पर आते हैं। जिसमें यूपी के साथ ही कई दूसरे राज्यों के भी किसान होते हैं। अचल ने अपने फार्म हाउस पर इन किसानों के लिए रुकने का भी इंतजाम किया है ताकि किसान कई दिन रुकर आसानी से सीख सकें।

अक्सर आने वाले किसानों की संख्या और खेती में नई नई तकनीकों की जरुरत को देखते हुए अचल अपने फार्म हाउस पर कृषि महाविद्यालय बनाना चाहते हैं। अचल कहते हैं, मेरी कोशिश है कि अपने स्वर्गीय पिता के नाम पर एक कृषि कालेज खोलू, जिसमें गन्ने की नई प्रजाति विकसित की जाएं और लोगों को खेती की नई चीजें सिखाई जाएं।


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