झारखंड : 10 हजार रुपए लिया कर्ज 50 हजार हो गया, फांसी पर झूल गया किसान, 2 महीने में 7 ने दी जान

झारखंड : 10 हजार रुपए लिया कर्ज 50 हजार हो गया, फांसी पर झूल गया किसान, 2 महीने में 7 ने दी जानबैंक के कर्ज से परेशान किसान बिसरई ने पेड़ से लटककर फांसी लगा ली।

रांची/ लखनऊ। फसल खराब होने और बढ़ते बैंक कर्ज से परेशान होकर पिछले दो महीनों में झारखंड के सात किसानों ने आत्महत्या कर ली है। झारखंड के इतिहास में यह पहली बार है जब हताश और निराश होकर झारखंड के किसानों ने इतना बड़ा कदम उठाया है। किसानों की आत्महत्या के मामले में जहां झारखंड की बीजेपी मामले पर लीपापोती करने में जुटी है वहीं किसान संगठन और विपक्षी पार्टियां किसानों की आत्महत्या के मामले में राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रही हैं।

इस मामले में झारखंड के कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने बताया ''किसान आत्महत्या क्यों किए हैं इस मामले की जांच कराई जा रही है। मृतक किसानों के परिजनों को मुआवजा देने का ऐलान कर दिया गया है। ''

झारखंड में किसान के आत्महत्या का पहला मामला 9 जून को सामने आया था। राजधानी रांची से 40 किलोमीटर दूर पिठोरिया सिमलबेड़ा के कलेश्वर महतो ने घर के पास पेड़ में लटक कर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। मरने से पहले लिखे सुसाइड लेटर में उसने बैंक और क्रेडिट कार्ड के बढ़ते लोन को इसका मुख्य कारण बताया था।

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मृतक किसान के भाई परमेश्वर ने बताया '' बैंक से 10 हजार का लोन लिया था, जब भाई की पत्नी बैंक का कुछ पैसा देने गई तो बताया गया कि लोन बढ़कर 50 हजार से ज्यादा हो गया है। बैंक से एक बार में कर्ज चुकाने की बात सुनकर कालेश्वर बेहद तनाव में थे। ऊपर से इस साल उनकी मिर्च की फसल सूख गई थी और मूंग की फसल को पशुओं ने बर्बाद कर दिया था। ''

किसान नेता राजेन्द्र मुण्डा ने बताया '' झारखंड के किसान अपने परंगरागत तरीकों से खेती करके पहले खुश थे लेकिन बदले समय के अनुसार खेत में सिंचाई सुविधा का अभाव और खाद बीज के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है, फसल खराब होने से किसान इस कर्ज को चुका नहीं पा रहे हैं। सरकार भी किसानों की मदद नहीं कर रही है। ''

किसान बिरसाई की पत्नी से बात करते अधिकारी।

झारखंड में पहली बार किसी किसान की आत्महत्या का यह मामला अभी थमा नहीं था कि 16 जून को पिठोरिया के ही सुतियाम्बे में एक कुएं से किसान का शव मिला है। परिवार वालों के अनुसार मृतक के ऊपर बैंक का कर्ज था जिससे दबाव में आकर उसने आत्महत्या कर ली। बलदेव नाम के इस किसान ने गांव में ही बने कुंए में कूदकर अपनी जान दे दी थी। मृतक के परिजनों के अनुसार खेती के लिए बैंक से लोन लिया था लेकिन फसल खराब होने से बैंक का पैसा चुका नहीं पा रहा था, जिसको लेकर कर्ज वापस लौटाने का दबाव बनाया जा रहा था।

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26 जून को लोहरदगा जिले के 40 साल के डोमन उरांव ने कीटनाशक खाकर सुसाइड कर लिया। 2 जुलाई को ओरमांझी में 32 साल के राजदीप ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या कर ली, उसने ट्रैक्टर लेने के लिए कर्ज लिया था। 9 जुलाई को प्रदेश के गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र के बड़काडीह गांव के किसान बिरसाई उरांव ने फांसी लगा ली। अपने इलाके का पुराना किसान बिरसाई लोगों के बीच एक सफल और जानकार किसान के रूप में जाना जाता था लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे बिरसाई ने घर के पास बगीचे में आम के पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।

मृतक की पत्नी शुक्रमणि देवी ने बताया '' उसके पति से गांव के लोग सलाह लेकर खेतीबारी करते थे, लेकिन पिछले साल खेती-बारी करने के बाद पैसे की कमी होने के कारण अपना एक जोड़ा बैल को बेच दिया। सालभर के बाद जब खेती-बारी करने का समय आया तो उसके पास एक जोड़ा बैल खरीदने में असमर्थ हो गया। ''

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19 जुलाई को राजधानी रांची के चान्हो ब्लाक के बेलतगी गांव के किसान संजय सिंह मुंडा ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने वाले किसान की उम्र महज 17 साल थी। संजय के कंधे पर ही पूरे परिवार चलाने की जिम्मेवारी थी। वह महाजन से कर्ज लेकर टमाटर, गोबी, धनिया और अन्य हरी सब्जियों की खेती करता था, लेकिन इस बार फसल ख़राब होने और कर्ज से परेशान संजय मुंडा ने आत्महत्या कर ली।

22 जुलाई को बुढ़मू के करंबा गांव के मुरूमजोबे टोले के 40 साल के किसान दुखन महतो ने भी साहूकारों का कर्ज नहीं चुका पाने के कारण आत्महत्या कर ली। दुखन के पास जो खेत थे उसमें सिंचाई की सुविधा नहीं थी जिसके लिए उसने स्थानीय लेागों से ब्याज पर कर्ज लिया था लेकिन वह कर्ज को चुका नहीं पा रहा था।

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