इफको ने लॉन्च किया विश्व का पहला नैनो यूरिया तरल, आधा लीटर की बोतल करेगी 1 बोरी का काम, जानिए 10 बड़ी बातें

किसानों की सहकारी संस्था इफको द्वारा तैयार ये तरल खाद एक बोरी (45किलो) यूरिया के बराबर काम करेगी। इफको का दावा है कि इसके प्रयोग से फसल उपज औसतन 8 प्रतिशत बढ़ोगा और लागत में कमी आएगी।

Arvind ShuklaArvind Shukla   31 May 2021 9:34 AM GMT

इफको ने लॉन्च किया विश्व का पहला नैनो यूरिया तरल, आधा लीटर की बोतल करेगी 1 बोरी का काम, जानिए 10 बड़ी बातें

इफको ने लॉन्च किया नैनो तरल यूरिया। फोटो- साभार इफको

नई दिल्ली। इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) भारत के करोड़ों किसानों के लिए विश्व के पहले नैनो यूरिया तरल की सौगात दी दै। आधा लीटर ( 500 मि.ली) नैनो यूरिया की एक बोतल की कीमत ₨ 240/- निर्धारित की गई है। जो सामान्य यूरिया के एक बैग के मूल्य से 10 प्रतिशत कम है। इफको ने ऑनलाइन-ऑफलाइन मोड में हुई अपनी 50वीं वार्षिक आम बैठक में प्रतिनिधि महासभा के सदस्यों की उपस्थिति में इसे लॉच किया।

ये किसानों के लिए बहुत बड़ी सौगात है। इससे भारत भी यूरिया के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।- डॉ. यूएस अवस्थी, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इफको

इफको ने कहा कि उत्पाद मिट्टी में यूरिया के प्रयोग में कमी लाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। इफको के मुताबिक संस्था के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने नैनो यूरिया तरल को स्वदेशी और प्रोपाइटरी तकनीक के माध्यम से कलोल स्थित नैनो जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र में तैयार किया है। यह प्रोडक्ट 'आत्मनिर्भर भारत' और 'आत्मनिर्भर कृषि' की दिशा में एक सार्थक कदम है।

नैनो तरल यूरिया को लॉन्च करते हुए इफको iffco के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. यूएस अवस्थी ने कहा, "ये किसानों के लिए बहुत बड़ी सौगात है। इससे भारत भी यूरिया के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।"

इफको ने अपने बयान में कहा कि नैनो यूरिया तरल (nano liquid urea) को पौधों के पोषण के लिए प्रभावी व असरदार पाया गया है। इसके प्रयोग से फसलों की पैदावार बढ़ती है तथा पोषक तत्वों की गुणवत्ता में सुधार होता है। नैनो यूरिया भूमिगत जल की गुणवत्ता सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन व टिकाऊ उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।

इफको ने अपने बयान में ये भी कहा कि किसानों द्वारा नैनो यूरिया तरल के प्रयोग से पौधों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होंगे और मिट्टी में यूरिया के अधिक प्रयोग में कमी आएगी। यूरिया के अधिक प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषित होता है, मृदा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, पौधों में बीमारी और कीट का खतरा अधिक बढ़ जाता है, फसल देर से पकती है और उत्पादन कम होता है। साथ ही फसल की गुणवत्ता में भी कमी आती है। नैनो यूरिया तरल फसलों को मजबूत और स्वस्थ बनाता है तथा फसलों को गिरने से बचाता है ।

इफको नैनो यूरिया किसानों के लिए सस्ता है और यह किसानों की आय बढ़ाने में प्रभावकारी होगा। इफको नैनो यूरिया तरल की 500 मि.ली. की एक बोतल सामान्य यूरिया के कम से कम एक बैग के बराबर होगी। इसके प्रयोग से किसानों की लागत कम होगी।‌ नैनो यूरिया तरल का आकार छोटा होने के कारण इसे पॉकेट में भी रखा जा सकता है जिससे परिवहन और भंडारण लागत में भी काफी कमी आएगी ।

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) के तहत 20 आईसीएआर संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केन्द्रों में 43 फसलों पर किये गये बहु-स्थानीय और बहु-फसली परीक्षणों के आधार पर इफको नैनो यूरिया तरल को उर्वरक नियंत्रण आदेश(एफसीओ, 1985) में शामिल कर लिया गया है।

इसकी प्रभावशीलता का परीक्षण करने के लिए पूरे भारत में 94 से अधिक फसलों पर लगभग 11,000 कृषि क्षेत्र परीक्षण (एफएफटी) किये गये थे। हाल ही में पूरे देश में 94 फसलों पर हुए परीक्षणों में फसलों की उपज में औसतन 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

इफको नैनो यूरिया तरल को सामान्य यूरिया के प्रयोग में कम से कम 50 प्रतिशत कमी लाने के प्रयोजन से तैयार किया गया है। इसके 500 मि.ली. की एक बोतल में 40,000 पीपीएम नाइट्रोजन होता है जो सामान्य यूरिया के एक बैग के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्व प्रदान करेगा।

इफको नैनो यूरिया का उत्पादन जून 2021 तक शुरु होगा और शीघ्र ही इसका व्यावसायिक विपणन भी शुरू हो जाएगा। इफको ने किसानों के लिए 500 मि.ली. नैनो यूरिया की एक बोतल की कीमत ₨ 240/- निर्धारित की है जो सामान्य यूरिया के एक बैग के मूल्य से 10 प्रतिशत कम है।

इफको नैनो तरल यूरिया खरीफ (धान) सीजन में भारत में आम किसानों के लिए उपलब्ध होगी। उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश में इफको के राज्य विपणन प्रबंधक अभिमन्यु राय ने कहा, "यूपी में ये खाद जुलाई में किसानों के लिए उपलब्ध हो जाएगी। प्रदेश में धान, गन्ना, आलू, रामदाना समेत तमाम फसलों में इसका सफल प्रयोग हुआ है और औसतन 8 फीसदी ज्यादा और गुणवत्ता वाली फसल मिली है।

उन्होंने कहा कि ये इफको का पहला नैनो फर्टीलाइजर है। खतपतवार, बीमारी और कीट से पौधों के बचाने के लिए विडीसाइड, फंगीसाइड और पेस्टीसाइड कई रुप में इफको पहले से दे रहा है।"

यूपी में धान, गन्ना, आलू, रामदाना समेत तमाम फसलों में इसका सफल प्रयोग हुआ है और औसतन 7-8 फीसदी ज्यादा और गुणवत्ता वाली फसल मिली है- अभिमन्यु राय, राज्य विपणन प्रबंधक, इफको, यूपी

समिति ने इस उत्पाद के बारे में किसानों को पूरी जानकारी देने के लिए एक व्यापक देशव्यापी प्रशिक्षण अभियान चलाने की योजना बनायी है । ये उत्पाद इफको के ई-कॉमर्स प्लेटफार्म www.iffcobazar.in.के अतिरिक्त मुख्य रूप से सहकारी बिक्री केन्द्रों और अन्य विपणन माध्यमों से किसानों को उपलब्ध कराये जाएंगे।

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दिल्ली में हुई इफको की 50वीं आम बैठक जिसमें नैनो यूरिया तरल को लांच किया गया।

नैनो तरल यूरिया से जुड़ी 10 बातें

1.नैनो यूरिया की 500 मिली की एक बोतल सामान्य यूरिया के कम से कम एक बैग (45 किलो) के बराबर काम करेगी।

2.इफको ने किसानों के लिए 500 मिली नैनो यूरिया की एक बोतल की कीमत ₨ 240/- निर्धारित की है, जो सामान्य यूरिया के एक बैग के मूल्य से 10 प्रतिशत कम है।

3. नैनो तरल यूरिया का पूरे देश में 94 से अधिक फसलों पर लगभग 11,000 कृषि क्षेत्र परीक्षण (एफएफटी) किया गया परीक्षण।

4.इफको के मुताबिक नैनो तरल यूरिया का जिन 94 फसलों पर टेस्टिंग हुई उनकी उपज में औसतन 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

5.नैनो यूरिया का विकास 'आत्मनिर्भर भारत' और 'आत्मनिर्भर कृषि' की तर्ज पर स्वदेशी और प्रोपाइटरी तकनीक के माध्यम से गुजरात के कलोल स्थित इफको नैनो जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र (एनबीआरसी) में किया गया है।

6.मिट्टी में यूरिया के प्रयोग में कमी लाने की कोशिशों को मुकाम देगा ये नैनो यूरिया

7.पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग तथा मृदा, जल व वायु प्रदूषण को कम करने में सक्षम होने के कारण यह पौधों के पोषण के लिए एक टिकाऊ समाधान है।

8.भूमिगत जल की गुणवत्ता सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन के दिशा में भी कारगर

9.इफको ने दावा किया है कि इसके परीक्षण के जिन 94 फसलों पर इस्तेमाल किया गया उनकी गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

10. सामान्य यूरिया के मुताबले सस्ती होने से किसानों की लागत घटेगी और आमदनी बढ़ेगी, साथ ही लाने-ले- लाने (परिवहन और भंडारण) खर्च कम होगा।

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