हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए डायरेक्ट क्रिएट प्लेटफार्म से जुड़ेंगे 1000 नए कारीगर

हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए डायरेक्ट क्रिएट प्लेटफार्म से जुड़ेंगे 1000 नए कारीगरहथकरघा उद्योग,

नई दिल्ली (आईएएनएस)। हथकरघा उद्योग को तेजी प्रदान करने के लिए आपसी सहयोग से निर्मित सामुदायिक मंच 'डायरेक्ट क्रिएट' ने घोषणा की है कि अगली तिमाही तक वह अपने प्लेटफार्म से 1000 नए कारीगर एवं 200 नए डिजाइनरों को जोड़ेगा।

मंच ने बुधवार को एक बयान में कहा कि यह वर्तमान समय के इन्टरनेट युग में हथ-करघा व्यापार को पुनर्गठित कर नए तरीके से परिभाषित करने का प्रयास है। डायरेक्ट क्रिएट का उद्देश्य अपने उत्पादित सामानों को बेचना मात्र नहीं, बल्कि वह शिल्पकारों के साथ मिलकर प्राचीनतम शिल्प परम्पराओं का उत्सव मनाता है।

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डायरेक्ट क्रिएट के संस्थापक राजीव लुंकड़ के अनुसार, ''हमलोगों ने एक क्षेत्रीय कार्यक्रम पहले से ही शुरू कर दिया है, जिसकी सहायता से हस्तशिल्प कारीगरों के भीतर व्यापारी बनने की जिज्ञासा उत्पन्न होगी और सभी के लिए व्यापार के अवसरों में वृद्धि भी होगी। लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए हम राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में रोड शो एवं रूरल कैंप आयोजित करने वाले है। ये कार्यक्रम हम सोशल नेटवर्किंग एवं निजी संबंधों की सहायता से आयोजित करेंगे।''

डायरेक्ट क्रिएट लकड़ी के फर्नीचर, उत्कृष्ट रूप से तैयार वस्त्र एवं परिधान और हस्त मुद्रित खिलौनों से सम्बंधित कारीगरों एवं डिजाइनरों के समूह को आपस में जोड़ रहा है, ताकि वे सहज रूप से ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कार्य कर सकें। यह इस प्रकार की पहली भारतीय ऑनलाइन कम्युनिटी है।

राजस्थान में डायरेक्ट क्रिएट का चयनित क्षेत्र सांगनेर, बाड़मेर, कोटा एवं सीकर है। वहीं उत्तर प्रदेश में इसका कार्यक्षेत्र बनारस, निजामाबाद, फिरोजाबाद एवं भदोई होगा। जबकि मध्य प्रदेश में इसके द्वारा चयनित क्षेत्रों में बस्तर, चंदेरी, बाघ, महेश्वर, ढोकरा एवं भील शामिल है।

उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में हस्त करघा कला की स्पष्ठ एवं उत्तम पहचान एवं होने के बावजूद यहां के शिल्पकार अपने उत्पादित सामानों के बाजार से न ही सीधे जुड़ पाते न ही डिजाइनरों का लाभ ले पाते है। डायरेक्ट क्रिएट इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव लाने और छोटे व माध्यम कारीगरों की जीवनशैली को बदलने की दिशा में कार्यरत है।

दूसरी ओर मध्य प्रदेश तुलनात्मक रूप से वास्तविक शिल्प कौशल के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश के आदिवासी चित्रकारों से लेकर धातु के शिल्पकारों के लिए डायरेक्ट क्रिएट एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है ताकि वो बाजार तक अपनी पहुंच बना सके।

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