1,000 अधिकारियों को तेलंगाना सरकर खेती की नई जानकारी के लिए भेजेगी इजराइल 

1,000 अधिकारियों को तेलंगाना सरकर खेती की नई जानकारी के लिए भेजेगी इजराइल प्रतीकात्मक तस्वीर 

लखनऊ। तेलंगाना सरकार के कृषि और बागवानी विभागों के लगभग 1,000 अधिकारियों को दिसंबर में अध्ययन दौरे पर इजराइल भेजे जाने की तैयारी की जा रही है, जहाँ वह कौशल विकास और कृषि की उच्च तकनीक सीखेंगे।

इजराइल में अधिकारी में न्यूनतम तीन सप्ताह और अधिकतम 15 दिनों तक का समय व्यतीत करेंगे, जिसमें वह क्षेत्रीय दौरे के अलावा स्थानीय किसानों और कृषि विशेषज्ञों के साथ बातचीत करते हुए खेती के आधुनिक तरीके और जल संचयन की तकनीक भी सीखेंगे ।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि तेलंगाना सरकार का इस दौरे में 25 करोड़ रुपये से 30 करोड़ रुपये तक का खर्च आएगा, जिसपर विपक्षी कांग्रेस के लोगों ने आपत्ति जताई है और बोला है कि यह जनता के पैसे का नुकसान है ।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस दौरे में क्षेत्रीय अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों से लेकर कृषि और बागवानी विभाग के विभिन्न प्रमुखों के अधिकारी भी शामिल होंगे। 25 करोड़ रुपये से 30 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय में परिवहन, बोर्डिंग और लॉजिंग और फील्ड दौरे की लागत शामिल है।

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तेलंगाना सरकार के कृषि सचिव, सी पार्थसार्थी ने एक समाचार पत्र को बताया, "यह बहुत बड़ा पैसा है, लेकिन इस उद्देश्य पर खर्च करने लायक है। यह सिर्फ घूमने के लिए या छुट्टी मनाने के लिए नहीं है। यह अधिकारियों में ज्ञान के क्षितिज के विस्तार में मदद करेगा। इन दिनों, हमारे यहां के अधिकारी बिना किसी कुशाग्रता और बेहतर तरीके से कार्य नहीं कर रहे थे । इस यात्रा से उन्हें खेती और नई प्रौद्योगिकियों और आधुनिक तरीकों के सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने में मदद मिलेगी।

पार्थसार्थी आगे बताते हैं, “आधिकारिक दौरे की रूपरेखा तैयार की जा रही है और प्रशिक्षण मॉड्यूल इजरायल सरकार के साथ परामर्श करके निर्णय लिये जाने के बाद ही उसे अंतिम रूप दिया जाएगा।”

पार्थसार्थी ने कहा कि इजरायल को आधिकारिक दौरे के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यह देश आधुनिक कृषि तकनीकों में सबसे अग्रणी है "इजरायल उच्च तकनीक वाले तरीकों का उपयोग करके कृषि में उच्च उत्पादकता और कम पानी के साथ गहन खेती के लिए जाना जाता है । वे फसलों के पास सेंसर स्थापित करते हैं, ताकि जब भी पानी की आपूर्ति कम हो जाए, तब वह संकेत दे दें हैं और उसका निर्देश पाते ही पानी अपने आप खेतों में चला जाए । पावर ग्रिड की तरह, उनके पास पानी की भी ग्रिड हैं, जो खेतों में छोड़े गए पानी की मात्रा को मापते हैं और किसानों से उसी के अनुसार शुल्क लिया जाता है। "

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एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने कहा, “इज़राइलियों ने कृषि उत्पादन के चयन और ग्रेडिंग के सरलीकृत तरीकों के साथ फसल प्रबंधन को भी मज़बूत किया है। उनके गोदाम और प्रसंस्करण इकाइयां उनके खेतों के निकट होते हैं, ताकि वे परिवहन पर आने वाली लागत में कटौती कर सकें।

"वे रोबोट से की जाने वाली खेती और डेयरी फार्म्स के रखरखाव के लिए भी जाने जाते है। उन्होंने कहा, "सिर्फ 10 लोग यहाँ उपस्थित सैकड़ों गाय और भैंस का प्रबंधन रोबोटों की मदद से कर सकते हैं।"

अगले चरण में, तेलंगाना सरकार किसानों के एक समूह को भी इसराइल भेजने की योजना बना रही है। इन 'उन्नत किसानों ' की पहचान समन्वय समितियों द्वारा की जाने की संभावना है।

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ दासोजू सवर्ण ने पूछा, "इतने सारे अधिकारियों को भेजने की आवश्यकता क्या है? वास्तव में, संयुक्त आंध्र प्रदेश के शासनकाल के दौरान, कई अधिकारी अध्ययन पर्यटनों के नाम पर इज़रायल घूमने गए थे। चित्तोर जिले के कुप्पम में इस्राएल विधि से खेती पहले से ही की जा रही है। इसमें नया क्या है कि ये अधिकारी वहां सीखने जा रहे हैं? "

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