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दादी की बीमारी के लिए बनाई थी छड़ी, अब राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 22 जनवरी को कानपुर देहात के पार्थ बंसल समेत देश के 49 बच्चों को 'बाल शक्ति पुरस्कार' 2020 से सम्मानित किया। हर वर्ष प्रधानमंत्री बाल शक्ति पुरस्कार पांच से 18 वर्ष के उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने इनोवेशन, कला, संगीत, सामाजिक सेवा एवं बहादुरी जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया हो।

Neetu SinghNeetu Singh   22 Jan 2020 1:59 PM GMT

दादी की बीमारी के लिए बनाई थी छड़ी, अब राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

पुखरायां (कानपुर देहात)। पार्थ बंसल ने 'लेजर केन' नाम की एक ऐसी छड़ी बनाई है जिससे पार्किंसन बीमारी से पीड़ित लोगों को मदद मिलेगी। पार्थ के इस इनोवेशन के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 'बाल शक्ति पुरस्कार' 2020 से सम्मानित किया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 22 जनवरी को पार्थ समेत देश के 49 बच्चों को 'बाल शक्ति पुरस्कार' 2020 से सम्मानित किया। हर वर्ष प्रधानमंत्री बाल शक्ति पुरस्कार पांच से 18 वर्ष के उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने इनोवेशन, कला, संगीत, सामाजिक सेवा एवं बहादुरी जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया हो।

पार्थ कानपुर देहात जिला मुख्यालय से लगभग 25 किमी दूर पश्चिम दिशा में पुखरायां कस्बे के सुभाषनगर नगर मोहल्ले के रहने वाले हैं। अभी ये नोयडा के एपीजे स्कूल में 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। इनोवेशन के क्षेत्र में 10 बच्चों को यह पुरस्कार दिया गया है जिसमें पार्थ बंसल (17 वर्ष) का भी नाम शामिल है।

पार्थ की दादी वो छड़ी लेकर खड़ी हैं जिससे वो चल सकती हैं.

"मुझे बचपन से ही नई-नई चीजों को बनाने का शौक था, जब मेरी दादी को पार्किंसन बीमारी हुई और डॉक्टर साहब ने एक ऐसी छड़ी का जिक्र किया जिससे दादी चल सकती थीं तो इसे बनाने का विचार आया।" पार्थ बताते हैं, "ये छड़ी मैंने 13 साल की उम्र में बना दी थी। अब इसका पेटेंट भी हो गया है। इस छड़ी में रेड कलर की लेजर लाइट लगी है। मरीज को रेड कलर की लेजर लाइट को देखकर ऐसा लगता है कि सामने कुछ रखा है और इसी के सहारे से वह चलता जाता है।"

पार्थ को बचपन से ही टूटे खिलौने से कुछ नया बनाने का शौक है। जब इन्हें डाक्टर से यह पता चला कि इनकी दादी पार्किंसन बीमारी के बावजूद चल सकती हैं, अगर एक ऐसी छड़ी बनाई जाए जिससे उन्हें ऐसा लगे कि सामने कुछ रखा है। वर्षों से चलने में असमर्थ अपनी दादी के लिए पार्थ ने 'लेजर केन' नाम की एक छड़ी का अविष्कार किया। जिसे केंद्र सरकार की तरफ से जून 2019 में पेटेंट भी मिल गया है।


अपने नाती की बनाई इस छड़ी से इनकी दादी सुषमा बंसल पिछले कुछ वर्षों से इस छड़ी की मदद से चल लेती हैं। पार्थ को ये छड़ी बनाने के लिए केवल दो बार ही मशक्कत करनी पड़ी। पार्थ ने ये छड़ी वर्ष 2014 में बनानी शुरू की थी जिसकी लागत मात्र 2000 रुपए आयी थी।

पार्थ के पिता संदीप बंसल (44 वर्ष) अपने बेटे की इस उपलब्धि पर कहते हैं, 'पार्थ इतनी कम उम्र में इतना सब कर लेगा इसका मुझे अंदाजा नहीं था। बचपन से ये जिज्ञासु था इसे टूटे सामान से कुछ नया बनाने का शौक था। इसके पास हमेशा नए आइडियाज होते थे।" वो आगे कहते हैं, "ग्रामीण क्षेत्रों में पार्थ जैसे कई बच्चे हैं जिनमे हुनर और प्रतिभा है बस उन्हें अच्छे मौके नहीं मिल पाते।"

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से भेजे गए एक पत्र के अनुसार पुरस्कृत बच्चों को 23 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड रिहर्सल, 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंटवार्ता, 25 जनवरी को अभिभावकों के साथ दिल्ली भ्रमण, 26 जनवरी को राजपथ पर मुख्य परेड में शामिल किया जाएगा।

खबर का पूरा वीडियो यहां देखें-


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