140 देशों पर जारी रिपोर्ट में दावा, कुपोषण की जद में भारत, 51% महिलाओं में खून की कमी

140 देशों पर जारी  रिपोर्ट में दावा, कुपोषण की जद में भारत, 51% महिलाओं में खून की कमी15-49 उम्र की 51% भारतीय महिलाओं में खून की कमी: रिपोर्ट

भारत से कुपोषण खत्म करने के सारे उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। ग्लोबल न्यूट्रीशन रिपोर्ट, 2017 (जीएनआर) की ताजा रिपोर्ट में प्रजनन उम्र में पहुंचने वाली महिलाओं और बच्चों की हालत बेहद गंभीर पाई गई है। ऐसी आधी से ज्यादा महिलाएं खून की कमी (एनीमिया) से जूझ रहे हैं, वहीं एक तिहाई से ज्यादा बच्चे कुपोषण की गंभीर समस्या से ग्रस्त हैं।

न्यू ग्लोबल रिपोर्ट 2017 के अनुसार एनीमिया से जूझ रही महिलाओं की लिस्ट में भारत सबसे उपर है, भारत के बाद पाकिस्तान, नाइजीरिया और इंडोनेशिया का स्थान आता है। भारत में 51 फीसदी यानि आधी से ज्यादा महिलाएं इस बीमारी से जूछ रही हैं।

मोटापा भी बड़ी दिक्कत

रिपोर्ट के मुताबिक भारत की आधी से ज्यादा महिलाएं प्रजनन की आयु में खून की कमी का शिकार हैं, वहीं 22 फीसदी वयस्क महिलाएं मोटापे का शिकार हैं। रिपोर्ट में 140 देशों के आंकड़ों का संकलन गत वर्ष मई माह में किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने समस्या को पहचान लिया है कि महिलाओं में खून की कमी और कुपोषण बड़ी समस्या है लेकिन भारत ने इस समस्या से निपटने के लिए कदम नहीं उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रजनन की उम्र में महिलाएं इसकी सबसे अधिक शिकार होती है, यही नहीं मोटापे और मधुमेह की समस्या भी लगातार बढ़ी है।

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सरकार उदासीन

वर्ष 2016 में रिपोर्ट के अनुसार 48 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार थीं। हालांकि भारत सरकार को स्थिति का अंदाजा है कि यह कितनी गंभीर है लेकिन इस दिशा में कदम उठाने के मामले में सक्रियता नहीं दिखी रही है। ग्लोबल न्युट्रिशन रिपोर्ट के अनुसार भारत को मोटापे की दिक्कत से निपटने के लिए राष्ट्रीय न्युट्रिशन के लिए रणनीति बनानी होगी। जो लोग सही पोषण नहीं पा रहे हैं उन्हें यह मुहैया कराना चाहिए।

सिर्फ कुपोषण नहीं है वजह

वहीं डॉक्टर का कहना है कि कुपोषण ही एकमात्र एनीमिया की वजह नहीं होता है, साफ सफाई का नहीं होना एनीमिया की बड़ी वजह है, क्योंकि इसकी वजह से पोषण सही नहीं मिल पाता है। लोगों में जागरुकता का नहीं होना, अशिक्षित होना भी इसकी अहम वजहे हैं। एनीमिया काफी खतरनाक हो सकता है खासकर जब महिलाएं गर्भवती होती हैं, यह ना सिर्फ मां के लिए बल्कि बच्चों के लिए भी खतरनाक होता है। इस स्थिति में पैदा होने वाले बच्चे अक्सर पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं या फिर उनका स्वास्थ्य सही नहीं रहता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 38 फीसद बच्चों का कद मानक से बेहद कम पाया गया है।

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भारत में फैल रहा है स्ट्रैप्टोकोकस बैक्टीरिया

भारत में एक बैक्टीरिया महिलाओं में काफी फैल रहा है, जिसका नाम है स्ट्रैप्टोकोकस ग्रुप बी। ज्यादातर ये बैक्टीरिया गर्भवती महिलाओं में देखा जा रहा है। अन्य देशों की तुलना में ये भारत में गर्भवती महिलाओं में सबसे बड़ी संख्या में देखा जा रहा है। ये बैक्टीरिया इतना खतरनाक है कि मां के अंदर इसके फैलने से हर साल डेढ़ लाख नवजात बच्चों की मौत हो रही है। ब्रिटेन के लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसन द्वारा 2015 में जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में पांच देश सबसे ज्यादा पीड़ित हैं। जिसमें भारत समेत चीन, नाइजीरिया, अमेरिका और इंडोनेशिया शामिल हैं। भारत में 24.66 लाख महिलाएं इसकी शिकार हैं।

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अमीर देशों का भी हाल जान लीजिए

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जो देश समृद्ध हैं वहां भी महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। स्विट्जरलैंड और फ्रांस में भी 18 फीसदी महिलाएं इसकी शिकार हैं। पूरी दुनिया में 15-49 वर्ष की आयु की कुल 614 मिलियन महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर के देशों में 88 फीसदी आबादी दो या तीन स्तर के कुपोषण का शिकार है, यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य का क्या स्तर है।

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