पिछले दो वर्षों में जम्मू-कश्मीर में संघर्षविराम उल्लंघन के 583 मामले

पिछले दो वर्षों में जम्मू-कश्मीर में संघर्षविराम उल्लंघन के 583 मामलेपिछले दो वर्षों में जम्मू-कश्मीर में संघर्षविराम उल्लंघन के 583 मामले

नया दिल्ली (भाषा)। पिछले करीब दो वर्षो के दौरान जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास सेना के परिचालनात्मक कमान के तहत संघर्ष विराम के उल्लंघन के 583 मामले सामने आए हैं, जिसमें सेना के 15 जवान शहीद हुए हैं। सरकार ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है।

सूचना के अधिकार के तहत रक्षा मंत्रालय के समन्वित मुख्यालय (एचक्यू) के सैन्य परिचालन महानिदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास सेना के परिचालनात्मक कमान के तहत 3 जुलाई 2015 से 3 जुलाई 2017 के बीच संघर्ष विराम के उल्लंघन के 583 मामले सामने आए हैं। 2015 में इस अवधि में ऐसे 135 मामले सामने आए जिनमें 4 जवान शहीद हुए. 2016 में संघर्ष विराम के उल्लंघन के 228 मामले सामने आए जिनमें 8 जवान शहीद हुए और 3 जुलाई 2017 तक ऐसे 220 मामले सामने आए जिनमें 3 जवान शहीद हुए।

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चीन के साथ सीमा विवाद और घुसपैठ के बारे में एक सवाल के जवाब में रक्षा मंत्रालय के समन्वित मुख्यालय (एचक्यू) ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमांकन औपचारिक रुप से नहीं किया गया है, ऐसे में वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों पक्षों में गश्ती को लेकर अपनी अपनी समझ है, इसके कारण अस्थायी तौर पर अतिक्रमण की घटनाएं होती हैं।

जम्मू कश्मीर। फाइल फोटो

इसमें कहा गया है कि किसी तरह के मतभेद होने की स्थिति सीमा कर्मियों के बीच बैठक या सैन्य कर्मियों के बीच फ्लैग बैठक के जरिये सूचनाओं के आदान प्रदान की सुव्यवस्थित प्रणाली है। इस संबंध में सीमा पर शांति एवं स्थिरता संबंधी समझौता (1993), सैन्य क्षेत्र में विश्चवास बहाली के उपाय (1996) और साल 2005 के विश्वास बहाली के उपाय लागू करने की रुपरेखा संबंधी प्रोटोकाल के तहत कदम उठाये जाते हैं।

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एक अन्य आरटीआई में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और यह चीन को उच्चतम स्तरों सहित कई अवसरों पर स्पष्ट कर दिया गया है।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत विदेश मंत्रालय के चीन प्रभाग से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 1962 के बाद से जम्मू कश्मीर में भारत की भूमि का लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर भूभाग चीन के कब्जे में है। मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ''इसके अतिरिक्त मार्च 1963 को चीन तथा पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान 'सीमा करार' के तहत पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर के 5180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अवैध रुप से चीन को दे दिया था। इस तरह से चीन ने भारत के 43,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अवैध रुप से कब्जा कर रखा है।

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विदेश मंत्रालय ने कहा, ''जम्मू कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और यह बात उच्चतम स्तरों सहित कई अवसरों पर चीन को स्पष्ट कर दी गयी है।'' विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब चीन के 'वन बेल्ट, वन रोड' को लेकर दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है। इसी कारण भारत ने चीन के 'वन बेल्ट, वन रोड' पर आयोजित सम्मेलन का बहिष्कार किया था। इसके साथ ही सिक्किम सेक्टर में डोकलाम विवाद को लेकर दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हैं।

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