जज्बे को सलाम : 98 वर्ष के राजकुमार ने हासिल की एमए इकोनॉमिक्स की डिग्री

Karan Pal SinghKaran Pal Singh   26 Dec 2017 7:26 PM GMT

जज्बे को सलाम : 98 वर्ष के राजकुमार ने हासिल की एमए इकोनॉमिक्स की डिग्री98 वर्षीय बुजुर्ग राजकुमार 

पटना। कहते हैं किसी मुकाम को हासिल करने में उम्र कभी बाधा नहीं होती। इस फलसफे को साबित कर दिखाया है बिहार के एक 98 वर्ष के बुजुर्ग राजकुमार ने। राजकुमार ने इस उम्र में भी स्नातकोत्तर कर एक मिसाल कायम की है।

बिहार के निवासी राजकुमार ने 98 वर्ष की उम्र में इकनॉमिक्स से मास्टर्स की डिग्री ली। उन्होंने यह मुकाम सितंबर में पटना की नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से हासिल किया। वह अपनी डिग्री लेने जब पहुंचे तो हैरानी और प्रशंसा के साथ सभी ने उनका स्वागत किया।

उन्होंने सेकेंड डिविजन से इस परीक्षा को पास किया। राजकुमार ने एमए पूरा करने के बाद बताया था, 'मैंने अपने सपने को पूरा कर लिया है। अब मैं पोस्टग्रेजुएट हूं। मैंने दो साल पहले यह तय किया था कि इस उम्र में भी कोई अपने सपनो को पूरा कर सकता है।'

इस उम्र में पोस्टग्रेजुएट डिग्री के लिए अप्लाई करने के लिए राजुकमार वैश्य का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे बुजुर्ग के तौर पर दर्ज किया गया था। जब उनसे पूछा गया कि वह नई पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहते हैं। खुद संघर्ष कर जीतने की मिसाल बने राजकुमार ने जवाब दिया कि वह नई पीढ़ी से जिंदगी में हमेशा कोशिश करते रहने की सलाह देंगे।

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राजकुमार ने 1938 में इसी विषय में आगरा यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया था। मूल रूप से यूपी में बरेली के रहने वाले राजकुमार ने इकनॉमिक्स में सेकंड डिविजन में एमए की परीक्षा पास की है। एक अप्रैल, 1920 को जन्मे राजकुमार ने वर्ष 1934 में 10वीं, 1938 में बीए और 1940 में एलएलबी की परीक्षा पास की।

इस सफलता के बाद राजकुमार ने कहा , 'जब से देश आजाद हुआ है, तब से मैं सुन रहा हूं कि गरीबी हटाओ। यह अभी भी केवल एक नारा बना हुआ है। मैंने अपने बेटे से कहा कि वह मुझे अपना कैमरा दे दे ताकि मैं मलिन बस्तियों और गरीबी की कुछ फोटो खींच सकूं। मैं एक कविता लिखूंगा और इसे अखबारों को भेजूंगा।'

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उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय बहू भारती एस कुमार और पटना कॉलेज के हिस्ट्री के प्रफेसर को दिया। उनके बेटे संतोष कुमार ने कहा, 'यह हमारे लिए गर्व का क्षण है।' उधर, नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने विश्वविद्यालय के इतिहास में इसे स्वर्णिम दिन करार दिया है।

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