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यूपी के हरदोई में न्याय मांगना पूरे गांव को पड़ रहा भारी, पुलिस के डर से पुरुषों ने छोड़ा गांव, दहशत में महिलाएं

यूपी के हरदोई में बिजली विभाग की लापरवाही से 15 साल के बच्चे की मौत हो गई। नाराज परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने गांव की 35 महिलाओं समेत 75 लोगों पर केस दर्ज कर धरपकड़ शुरू कर दी है। जिससे महिलाएं दहशत में हैं। हालांकि पुलिस इसे विधिक कार्यवाही बता रही है।

Arvind ShuklaArvind Shukla   8 Sep 2020 10:02 AM GMT

अरविंद शुक्ला और अश्वनी द्विवेदी की रिपोर्ट

झिंझौली (हरदोई)। "हमारा ही लड़का मरा हमें ही परेशान किया जा रहा है। लड़के का दुख अलग ही हो गया, अब तो पुलिस का दुख (खौफ) है बस।" 15 साल के जिस लड़के की हाईटेंशन लाइन टूटने से मौत हो हुई थी, उसके घर के बाहर बैठी शिवदेवी ने कहा।

शिवदेवी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 65 किलोमीटर दूर हरदोई जिले के झिझौंली गांव में रहती हैं, ये गांव अतरौली थाने के अंतर्गत आता है। जो इन दिनों थाने की पुलिस से परेशान है। ग्रामीणों ने गांव कनेक्शन से संपर्क कर अपनी व्यथा बताई, जिसके बाद 8 सितंबर को गांव कनेक्शन की टीम झिंझौली पहुंची थी।

पिछले महीने 23 अगस्त की रात झिंझौली ग्राम पंचायत में 11 हजार बोल्टेज वाली हाईटेंशन लाइन का तार टूट कर सड़क पर गिर गया। ग्रामीणों ने रात में पावर हाउस को सूचना दी, उस वक्त तो लाइन काट दी गई लेकिन सुबह आपूर्ति शुरू हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक 24 अगस्त को करीब 11 बजे 15 साल का विकास अपने खेत से पशुओं को हांकने गया था, करंट लगने से उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक टूटे तार से करंट खेतों में रखवाली के लिए लगाए गए कटीले तारों में उतर आया है, जिससे ये हादसा हुआ।

ग्रामीणों के मुताबिक लड़के की मौत बिजली विभाग की लापरवाही से हुई है। गरीब परिवार को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने शव सड़क पर रखकर अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन यह ग्रामीणों को महंगा पड़ गया। इस मामले में पुलिस ने गंभीर धाराओं में गाँव के 10 लोगों को नामजद और 75 महिला-पुरुष अज्ञात के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है। ग्रामीणों के मुताबिक पुलिस ने ना सिर्फ केस दर्ज किया बल्कि गिरफ्तारी के लिए रात में घरों पर छापे मारती है पुलिस के डर से गांव के अधिकांश पुरुष गांव छोड़ गए हैं।

गांव कनेक्शन की टीम हादसे के शिकार मृतक विकास के घर पहुंचीI जहां मृतक के पिता रज्जन गिरी और उसकी मां लक्ष्मी से बात हुईI घटना के बारे में पिता रज्जन बताते हैं,"23-24 की रात गांव से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर गांव की सड़क पर गिर गया था, जिसकी सूचना जहां पर ये तार टूटा था उसके कुछ दूरी पर रहने वाले मन्नू ने पावरहाउस कर्मी को दी थी, जिसके बाद रात में पावरहाउस वालों ने बिजली काट दीI लेकिन 24 को बिना तार जोड़े पावरहाउस द्वारा फिर से लाइन चालू कर दी गयी। सुबह करीब पौने ग्यारह बजे मेरा बेटा खेत में छुट्टा जानवर को हांकने गया थाI हाईटेंशन का तार खेत में लगी तारों की बाड़ को छू रहा था, वो उसी की चपेट में आ गया।"

इतना कहते कहते वो सुबक पड़ते हैं। "बेटे को तार से चिपके देख मैं और विकास की माँ बचाने के लिए दौड़े लेकिन उसे छुड़ा नहीं पाए आंखों के सामने बेटे की तड़प-तड़प कर मौत हो गयी।" कुछ देर रुककर वो आगे बताते हैं।


एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "विकास की मौत पर पूरा गांव जमा हो गया और शव को लेकर हम लोग गांव वालों के साथ भरावन रोड पर थाने के पास विकास का शव रखकर दोषी बिजलीकर्मियों के खिलाफ विधिक कार्यवाही और गरीब परिवार की मदद के लिए मुवावजे की मांग की। किसान परिवार की मदद के लिए मौके पर किसान नेता राकेश सिंह चौहान भी पहुंचे थे।"

"इस बीच सीओ अमित किशोर श्रीवास्तव भी मौके पर आ गये और लाठी दिखाते हुए गांव वालों को खदेड़ने का हुक्म दिया, जिस पर किसान यूनियन के नेता राकेश सिंह चौहान से सीओ अमित किशोर की काफी बहस हुई लेकिन तब तक पुलिस ने लाठी चलाकर ग्रामीणों को भागने पर मजबूर कर दिया और हम लोग विकास की लाश लेकर गांव भाग आये।" ग्रामीण ने बताया।

ग्रामीणों के मुताबिक कुछ देर बाद थानाध्यक्ष अतरौली संतोष तिवारी फोर्स के साथ गांव आये और शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 25 अगस्त को विकास का अंतिम संस्कार करा दिया गया। तब तक पुलिस गांव वालों से कुछ नहीं बोली। बाद में जब पुलिस ने गांव वालों पर सख्ती करना शुरू किया तो पता चला की गांव वालों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में ग्राम प्रधान के तीनों बेटों को पुलिस ने नामजद किया है।

बुजुर्ग शिवदेवी कहती हैं, "हमारा गुनाह सिर्फ इतना है कि हम लोग एक गरीब को न्याय दिलाने के लिए धरने पर गए थे। पुलिस रात में कभी भी दबिश देती है, उनके डर से महिलाएं सो नहीं पा रही हैं।" उनकी हां में हां मिलाते हुए बुजर्ग विमला देवी कहती हैं, "परेशान इसलिए हैं क्योंकि घर के आदमी लड़के सब भागे भागे घूम रहे हैं। पुलिस वाले कहते हैं कि वो नहीं मिले तो कहते हैं बुड्ढी तुमको खींच ले जाएंगे।"

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पुलिसिया कार्यवाही से क्षुब्ध 65 वर्षीय दिव्यांग ग्राम प्रधान कुसुमा देवी कहती हैं, "जब से इस गांव में ब्याह कर आई हूँ, आज तक घर पर पुलिस नहीं आई, लेकिन इस मामले में पुलिस ने बेइज्जती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हाथ और घुटनों में लगी चोट दिखाते हुए कहती हैं कि आधी रात के वक्त पुलिस दरवाजा पीट-पीट कर घर में घुस आई जबकि मैं दरवाजा खोल रही थी। इतनी जोर से धक्का मारा की कुण्डी टूट गयी और मेरे हाथ में और घुटनों में चोट आ गयी। घर का बक्शा, आलमारी, किचन तक का पूरा सामान बिखरा दिया।"

प्रधान कुसुमा देवी के मुताबिक ये सब साजिशन किया किया जा रहा है। वो आगे बताती हैं, "मेरे दो बेटे बीटीसी कर रहे हैं और किसी भी बेटे के खिलाफ आज तक कोई मामला दर्ज नहीं है। कुछ स्थानीय ताकतवर लोग जिनका पुलिस पर प्रभाव है, इसी बहाने अपनी राजनीतिक रंजिश की कसर निकालने पर अमादा हैं। आखिर ऐसा कौन सा गुनाह किया है हमने जो इस तरह का बर्ताव किया जा रहा है?"


इसी गांव की संगीता गोदी में लिए अपने बच्चे को चुप कराते हुए कहती हैं, "गांव-घर में किसी की मौत हो जाए तो क्या उसके दुःख दर्द में शामिल होना गुनाह है? जवान लड़का जिनकी लापरवाही से मरा उनका कुछ नहीं हुआ। उल्टा गांव वालों के साथ बदमाश/अपराधियों जैसा व्यवहार पुलिस कर रही है।"

इस मामले में बात करने पर बात करने पर जांच अधिकारी (विवेचक, थाना अतरौली) वीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया "मृतक के चाचा की तरफ से जूनियर इंजीनियर जखवा पावरहाउस के खिलाफ धारा 304 ए के अंतर्गत मुकदमा लिखवाया गया है। थाने पर शव रखकर जाम लगाने के कारण आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 188,352, 353, 506, क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट 31ए के तहत कार्यवाही करते हुए अमरेश पुत्र कृष्ण कुमार, वीरू पुत्र कृष्ण कुमार, राममोहन पुत्र जान गिरी, मोहित पुत्र जान गिरी, विनीत पुत्र जान गिरी, प्रमोद पुत्र उदयराज, अमित पुत्र शिवप्रसाद, वीरू पुत्र छंगा, रामगुलाम पुत्र अज्ञात, 35 महिला अज्ञात और 40 पुरुष अज्ञात मुकदमा दर्ज किया गया हैI विधिक कार्यवाही की जा रही हैI

ये पूछने पर जो मुकदमा जेई पर दर्ज हुआ, उसमे पूछताछ हुई की नहीं? विवेचक ने बताया कि मुझे अभी जेई का नाम पता नहीं चल पाया है I इसके संदर्भ में अधिशाषी अभियंता को पत्र भेजा है। जवाब आने पर पूछताछ की जाएगी।

ग्रामीणों के पुलिसिया उत्पीड़न के आरोप पर विवेचक कहा, "गांव वाले सरासर झूठ बोल रहे हैं और मनगढ़ंत कहानिया बना रहे हैं। इस प्रकरण में अभी तक तीन लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है। विधिक कार्यवाही जारी है।"

प्रदर्शन के दौरान क्या ग्रामीणों द्वारा हिंसा की गयी या तोड़-फोड़ करके पब्लिक प्रापर्टी को नुकसान पहुंचाया गया?

इसके जवाब में विवेचक वीरेंद्र प्रताप ने बताया," नहीं, लेकिन प्रदर्शन के दौरान आम लोगों का जीना मुहाल हो गया था, थाने के सामने की सड़क जाम की गयी थी, जिसके कारण लगभग दो घंटे तक आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कोरोना के दौरान भीड़ आदि नहीं होनी चाहिए।

खबर के बाद ट्वीटर पर प्रतिक्रिया देते हुए हरदोई पुलिस ने अतरौली थाने में दर्ज मुकदमे की जानकारी देते हुए बताया कि विधिक कार्यवाही की जा रही है। साथ ही पुलिस से भय व डराने वाली बात को सत्य और निराधार बताया गया है। नीचे ट्वीट देंखे

गांव कनेक्शन ने इस संबंध में विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर ( जेई) जखवा हरी प्रकाश श्रीवास्तव से भी बात की। "इन्सुलेटर पंचर हो जाने के कारण तार टूट गया था और ये हादसा हो गया। उसके बाद सूचना मिली उस समय पब्लिक काफी आक्रोशित थी।" तार टूटने की सूचना गांव वालों द्वारा उन्हें या पावरहाउस को दी गयी? इस बात को उन्होंने नकारते हुए बताया की हमें तार टूटने की सूचना नहीं मिली थीI

इस प्रकरण में हाईकोर्ट अधिवक्ता आनंद प्रताप सिंह का कहना है कि संविधान में हर किसी को न्याय मांगने और अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है। इस मामले में इतनी गंभीर कार्यवाही क्रूर और दमनकारी है।

पुलिस से परेशान ग्रामीणों ने हरदोई से राज्यसभा सांसद (भाजपा) से भी मदद की गुहार लगाई है। सांसद अशोक वाजपेई ने गांव कनेक्शन को बताया, "मामला मेरे संज्ञान में है। मैं इस प्रकरण को लेकर गंभीर हूँ। उत्तर प्रदेश में संवेदनशील सरकार है। किसी भी स्थिति में ग्रामीणों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा। मामला संज्ञान में आने पर मैंने पुलिस अधीक्षक हरदोई से वार्ता की है और उन्हें मुकदमा खत्म कर ग्रामीणों को राहत देने के लिए निर्देशित किया है। पुलिस द्वारा जो कार्यवाही और उत्पीड़न ग्रामीणों का किया गया है वो कतई सही नहीं हैI"

इस बाबत पुलिस अधीक्षक हरदोई अमित गुप्ता से बात कई बार बात करने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो पाई। पीआरओ एसपी हरदोई ने बताया,"दोनों पक्षों की तरफ से मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और विवेचना की जा रही हैI"

झिझौली के कई घरों में बंद हैं ताले

झिंझौली गांव के कई घरों में ताला बंद हैं। लोग इधर-उधर भाग गये हैं। कई घरों में गांव की बहुएं डर के मारे मायके चली गई हैं। गांव में बुजुर्ग और महिलाएं, बच्चे बचे हैं। गांव की बुजुर्ग शांति देवी ने रोते हुए बताया,"अब तक पुलिस आठ बार गांव में छापा मार चुकी है। उनके बेटों को भी पुलिस ने नामजद किया है। वह पहले से ही घर से भागे हुए हैं। हम लोग भी पुलिस के डर से लुके-छिपे रहते हैं।

"मेहनत मजदूरी करके बहुत मुश्किल से पांच हजार रुपए की गाय खरीदी थी। आधी रात जब पुलिस वाले गेट तोड़ने लगे तो हम लोग डरकर घर से भाग गये। हमारी गाय जो गेट के बगल में बंधी थी और थोड़ी बिच्कौली थी। डर के मारे वहीं गेट के आस-पास भागी जिससे उसका गला फंस गया। सुबह लौटकर आए तो देखा गाय गेट में फंसकर मरी पड़ी है। हम लोग न्याय मांगने किसके के पास जाएं जिनसे न्याय की उम्मीद थी वो लाठी मार रहे हैं। सिपाही दरोगा फोटो लेकर महिलाओं को खोज कर रहे हैं।" शांति देवी कहती हैं।

गांव की एक 15 किशोरी ने बताया कि पुलिस वाले गांव में किसी के भी घर घुस जाते हैं। दरवाजे पीटते हैं। गन्दी-गन्दी गालियां देते हैं। ऐसा लगता है जैसे हम लोगों की कोई इज्जत ही नहीं है।

पुलिस के डर से कई लोगों ने कैमरे के सामने नहीं बोले

कई लोगों ने कैमरे पर बोलने से मना कर दिया, उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान की फोटो लेकर पुलिस उन्हें खोज रही है। जिसके चलते हममें से कई लोग बाजार नहीं जा रहे हैं। कोटे का राशन बट रहा था लेकिन पुलिस के डर से कई लोग राशन लेने नहीं गए। आप के सामने बोलेंगे तो पुलिस और परेशान करेगी।

बुजुर्ग महिला राजेश्वरी कहती हैं,"आज राशन बंट रहा था, लेकिन वहां भी पुलिस लगी हुई है। पुलिस वाले प्रदर्शन की फोटो लेकर खड़े हैं, इस डर के कारण आज कोई राशन लेने नहीं गया। मुश्किल से गाँव की चार-पांच महिलाएं राशन लेकर आई हैं।"

ग्राम प्रधान कुसुमा देवी कहती हैं, "पुलिस को इस प्रदर्शन के नाते हम लोगों (गिरी समुदाय) और गांव के लोगों को परेशान करने का मौका मिल गया है। कुछ राजनीतिक विरोधी उनके साथ है वहीं लोग है। कई लोगों से पैसे वसूले गए हैं।"

शिवदेवी, मृतक विकास की मां लक्ष्मी की तबीयत का हवाला देते हुए कहती हैं.."बच्चे के मरने का दुख मना नहीं नहीं पाए, अब पुलिस का दुख उससे बड़ा आ गया है।"

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