आरुषि मर्डर केस पर आ गया हाईकोर्ट का फैसला, जानिए क्या हुआ हत्या की उस रात

आरुषि मर्डर केस पर आ गया हाईकोर्ट का फैसला, जानिए क्या हुआ हत्या की उस रातआरुषि की तस्वीर पर माला चढ़ाने माता -पिता

नोएडा। आरुषि मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज अपना फैसला सुना दिया है जिसमें आरुषि के माता - पिता डॉ. राजेश व नुपुर तलवार को बरी कर दिया गया है। आप जानिए क्या हुआ था अारुषि की हत्या की रात...

16 मई 2008 को आरुषि रोज़ की ही तरह सुबह करीब 6 बजे सोकर उठी। नौकर हेमराज ने उसे नाश्ता दिया लेकिन खाने के बजाय उसे लंच बॉक्स में रख लिया। 16 मई को आरुषि की आखिरी क्लास और उसके बाद गर्मी की छुट्टियां, 19 मई को उसका जन्मदिन भी था। वह छुट्टियों और अपने जन्मदिन को लेकर बहुत खुश थी और उसे सेलिब्रेट करने का प्लान बना रही थी। दोपहर 2 बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद वह नोएडा के सेक्टर-25 में ही रहने वाली अपनी नानी के घर गई और वहां से नौकर हेमराज के साथ घर लौट गई।

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जांच के मुताबिक, रात करीब 10 बजे डॉ. राजेश व नुपुर तलवार और आरुषि ने एक साथ खाना खाया। इसके बाद राजेश व नुपुर आरुषि के कमरे में गए और करीब 45 मिनट तक बर्थडे सेलिब्रेट करने को लेकर बातचीत हुई। बातचीत कर तय हुआ कि बर्थडे की पार्टी कहां होगी और किन लोगों को बुलाना है। इसके बाद डॉ. राजेश तलवार अपने कमरे में जाकर इंटरनेट पर कुछ सर्च करने में जुट गए। रात करीब 11:41 बजे इंटरनेट बंद कर उन्होंने आरुषि के रूम में जाकर मॉडम स्विच ऑफ किया।

रात करीब 12 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक, यानी 6 घंटे का वो राज। कौन आया था डॉ. तलवार के घर में, किसने दरवाजा खोला था। हेमराज ने या फिर डॉक्टर दंपती में से किसी एक ने। नौकर हेमराज को छत पर कौन ले गया। वह कौन शख्स था जिसके कहने पर बिना किसी खौफ के हेमराज देर रात में भी छत पर चला गया। वहां उसे मौत के घाट उतार दिया गया, लेकिन किसी को उसकी चीख तक नहीं सुनाई दी थी।

सीबीआइ ने क्या कहा था

आरुषि की हत्या वाली रात अपने बेडरूम में सोते समय डॉ. राजेश तलवार को बाहर से कुछ आवाज आई। बेडरूम से बाहर निकल कर वह हेमराज के कमरे में गए लेकिन वह वहां नहीं मिला। उसके कमरे में गोल्फ स्टिक रखी हुई थी जो उन्होंने उठा ली। इसी दौरान उन्होंने आरुषि के कमरे से आवाज आती सुनी और वह उधर बढ़ गए।

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आरुषि के बेडरूम के दरवाजे पर कुंडी नहीं लगी थी। डॉ. राजेश दरवाजा खोलकर अंदर घुसे तो उन्हें आरुषि और हेमराज आपत्तिजनक स्थिति में मिले। इतना देखते ही डॉ. तलवार ने गोल्फ स्टिक से हेमराज पर हमला किया लेकिन स्टिक हेमराज को न लग कर आरुषि के सिर पर लगी। इसके बाद तलवार ने हेमराज पर गोल्फ स्टिक पर हमला कर दिया। तब तक आरुषि की मौत हो चुकी थी। आवाजें सुनकर डॉ. नूपुर तलवार भी वहां पहुंच चुकी थीं। बाद में उन्होंने दोनों के गले रेत दिए। राजेश ने हेमराज के शव को घर की छत पर पहुंचाया और कूलर के पैनल से ढंक दिया। फिर वापस आरुषि के बेडरूम में पहुंच कर खून को साफ कर दिया। वारदात में इस्तेमाल गोल्फ स्टिक को भी साफ करके छिपा दिया गया।

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