आयुर्वेद दिवस विशेष : और एक चौकीदार के बेटे ने खड़ी कर दी अरबों की कंपनी पतंजलि

आयुर्वेद दिवस विशेष : और एक चौकीदार के बेटे ने खड़ी कर दी अरबों की  कंपनी पतंजलिआचार्य बालकृष्ण।

भारत में पिछले कुछ वर्षों से धनरेतस को आयुर्वेद दिवस के रुप में मनाया जा रहा है। तीसरे आयुर्वेद दिवस पर आपको बताते हैं आयुर्वेद को आम लोगों तक पहुंचाने वाली कंपनी पतंजलि के एमडी आचार्य बालकृष्ण के बारे मे।

लखनऊ। भारत में लोकप्रिय योग गुरु बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की कहानी किसी किवदंती की तरह लगती है। एक गरीब नेपाली चौकीदार के परिवार में पैदा हुए बालकृष्ण को 2016 में भारत के 50 शीर्ष अरबपतियों की फोर्ब्स सूची में शामिल किया गया था।

45 साल के आचार्य बालकृष्ण भारत की सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ती उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनी पतंजलि आर्युवेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं। फोर्ब्स के मुताबिक आचार्य बालकृष्ण भारत के 48वें अमीर व्यक्ति हैं, जिनकी कुल संपत्ति ढाई अरब अमरीकी डॉलर से ज्यादा है। उनकी कंपनी शैंपू से लेकर अनाज और साबुन से लेकर नूडल्स तक, हर चीज़ बेचती है। हरिद्वार में नेपाली माता-पिता के घर जन्मे आचार्य बालकृष्ण एक आम सी जिंदगी जीते हैं और पतंजलि आयुर्वेद के रोजमर्रा का कामकाज उन्हीं के ज़िम्मे है।

हरिद्वार के अपने दफ्तर में बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि कंपनी की संपत्ति उनकी निजी नहीं है, बल्कि उस ब्रांड की है जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा प्रदान करता है। आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड में 97 फीसदी के स्वामित्व के साथ फोर्ब्स सूची में 2016 सितंबर में जगह बनाई। इस कंपनी की स्थापना उन्होंने साल 2006 में भारत के सबसे लोकप्रिय योग गुरु बाबा रामदेव के साथ मिलकर की थी। रामदेव इस कंपनी में निजी हैसियत से कोई मालिकाना हक नहीं रखते, लेकिन हाई-प्रोफ़ाइल योग गुरु, पतंजलि आयुर्वेद का चेहरा भी हैं। कंपनी के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर रामदेव इसके उत्पादों का प्रमोशन और विज्ञापन करते हैं।

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आचार्य बालकृष्ण, बाबा रामदेव के साथ।

बालकृष्ण का कहना है कि अरबपतियों की सूची में उनका नाम आना, पतंजलि में भारतीय उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे का सबूत है, जो बाज़ार में क़रीब साढ़े तीन सौ उत्पाद बेचती है। उन्होंने कहा, "कंपनी की संपत्ति किसी की निजी संपत्ति नहीं है। ये समाज और समाज सेवा के लिए है।" आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के महासचिव भी हैं, जो क़रीब 5,000 पतंजलि क्लीनिक की देखभाल करती है और एक लाख से ज्यादा योग कक्षाओं का संचालन करती है। बालकृष्ण पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति भी हैं, जिसकी योजना जड़ी-बूटी पर आधारित दवाओं की शिक्षा का विस्तार करने की है। वो पतंजलि योगपीठ के मुख्यालय की मुख्य इमारत में बने अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित साधारण से दफ्तर से काम करते हैं।

उनके दफ्तर का वातावरण बाबा रामदेव की तस्वीरों, एक बौद्ध पेंटिंग, कुछ किताबों और स्मारिकाओं की वजह से आध्यात्मिक-सा लगता है। आचार्य बालकृष्ण के दफ्तर में कोई कंप्यूटर या लैपटॉप नहीं है और वो कहते हैं कि उनके पास भी ये चीजे नहीं हैं। अरबपति बालकृष्ण बताते हैं कि उनके सहयोगी उनके लिए कंप्यूटर का ज़रूरी काम करते हैं और संवाद के लिए वो एक आईफोन इस्तेमाल करते हैं। वो ये भी बताते हैं कि उन्होंने अपने काम से एक दिन के लिए भी छुट्टी नहीं ली है।

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बालकृष्ण कहते हैं, "मेरी अपने लिए कोई योजना नहीं है। इसीलिए अगर मैं छुट्टी लूं भी तो क्या करूंगा। मैं हर दिन सुबह से देर शाम तक काम करता हूं और अपनी ऊर्जा और समय का शत-प्रतिशत अपने काम को देता हूं।" आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि वो और बाबा रामदेव 11,000 कर्मचारियों वाली कंपनी से कोई तनख़्वाह नहीं लेते।

चौकीदार के रूप में काम करते थे पिता

बालकृष्ण का जन्म 4 अगस्त 1972 को हुआ। इनकी माता का नाम सुमित्रा देवी और पिता का नाम जय बल्लभ है। आचार्य बालकृष्ण ने अपना बचपन पश्चिमी नेपाल के सियांग्जा जिले में बिताया, जहां उन्होंने कक्षा पांच तक पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि वो भारत के हरिद्वार में पैदा हुए, जब उनके पिता वहां एक चौकीदार के रूप में काम करते थे।

उनके माता-पिता अभी भी नेपाल के पुश्तैनी घर में रहते हैं। भारत लौटने के बाद हरियाणा में खानपुर के एक गुरुकुल में पढ़ाई करने के दौरान वे 1988 में बाबा रामदेव के मित्र बन गए। उसके बाद से दोनों साथ काम कर रहे हैं। जून 2011 में सीबीआई ने बालकृष्ण के खिलाफ एक मामला दर्ज किया। उनपर आरोप लगा कि उनकी ज्यादातर डिग्री और कागजात जाली हैं, जिसमें उनका पासपोर्ट भी शामिल था।

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बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया और कहा था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया.। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ़ लगाए गए आरोप यूपीए सरकार का एक 'योजनाबद्ध षड्यंत्र' था। उन्होंने कहा कि उनके पास वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से मिला प्रमाण-पत्र है। कागजातों को संभालकर रखने और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें पेश करने की ज़िम्मेदारी विश्वविद्यालय की है। 2012 में जब सीबीआई ने धोखाधड़ी के एक मामले उन्हें तलब किया तो बालकृष्ण कथित रूप से फरार हो गए। उसके बाद उनके खिलाफ़ गैर-कानूनी रूप से पैसे के कथित हेरफेर का मामला दर्ज किया गया।

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इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपी खबर के मुताबिक 2014 में एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके खिलाफ़ दर्ज मामले बंद कर दिए गए। उनके आलोचक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी को बढ़ावा देने और स्थानीय ब्रांड के बीच एक लिंक देखते हैं। लेकिन आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि पतंजलि के विकास और बीजेपी सरकार के बीच कोई संबंध नहीं है। वो कहते हैं कि कंपनी की तरक्की दरअसल दो दशक के कठिन परिश्रम का परिणाम है।

तैयार कर रहे जड़ी-बूटियों का विश्वकोश

पतंजलि की वेबसाइट पर आचार्य बालकृष्ण का परिचय आयुर्वेद, संस्कृत भाषा और वेद के ज्ञाता के रूप में है, जिन्होंने जड़ी-बूटियों पर कई किताबें और शोध-पत्र लिखे हैं। बालकृष्ण कहते हैं कि पतंजलि ने क़रीब 100 वैज्ञानिकों को जड़ी-बूटियों के शोध के काम में लगा रखा है और 'जड़ी-बूटियों का एक विश्वकोश' तैयार करने का काम भी कर रही है।

वो ये भी बताते हैं कि उन्होंने क़रीब 65,000 किस्म की जड़ी-बूटियों पर काम किया है और दावा करते हैं जड़ी-बूटियों के औषधीय गुण पर लिखी उनकी एक किताब की एक करोड़ प्रतियां बिक चुकी हैं। उन्होंने ये भी बताया कि जड़ी-बूटियों के जिस विश्वकोश पर वो काम कर रहे हैं वो क़रीब डेढ़ लाख पन्नों की होगी। आचार्य बालकृष्ण ने कहा, "मुझ पर मेरी मां का गहरा प्रभाव है और वो मेरी प्रेरणास्रोत भी हैं। जड़ी-बूटियों के मेरे ज्ञान का आधार मां के घरेलू नुस्खे हैं।" पतंजलि योगपीठ में आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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पुरस्कार और सम्मान

आचार्य बालकृष्ण को योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए प्रशंसापत्र, ढाल, प्रमाण पत्र व अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। कुछ उल्लेखनीय सम्मान निम्नवत हैं

23 अक्टूबर 2004 को एक योग शिविर के दौरान राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम के द्वारा सम्मान दिया गया। अक्टूबर 2007 में नेपाल के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कैबिनेट मंत्रियों की उपस्थिति में योग, आयुर्वेद, संस्कृति और हिमालयी जड़ी बूटी के छिपे ज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए उनके योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। वर्ष 2012 में योग और औषधीय पौधों के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए श्री वीरंजनया फाउंडेशन द्वारा "सुजाना श्री 'पुरस्कार प्रदान किया गया।

रचित ग्रन्थ

बालकृष्ण ने आयुर्वेद से संबंधित कुछ पुस्तकों की भी रचना की है, उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें :-

  1. आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य
  2. आयुर्वेद जड़ी-बूटी रहस्य
  3. भोजन कौतुहलम्
  4. आयुर्वेद महोदधि
  5. अजीर्णामृत मंजरी
  6. विचार क्रांति (नेपाली ग्रंथ

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