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आदित्य तिवारी को जानते हैं, इनकी बदौलत देश के एक कानून में बदलाव हुआ था..

"लगातार एक ही मुद्रा में मुंह से लार बहाता, कमरे की छत को एकटक निहारता, हाथों को इधर-उधर धुमाता एक बच्चा जो मैं पिछले 72 घंटों से एक जगह ऐसे ही अकेले पड़ा देख रहा था। कोई भी व्यक्ति उस बच्चे की तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा था। जब मैं उसके पास गया तो उसने मेरी उंगली मजबूती से पकड़ ली जैसे वो मुझ से बोल रहा हो कि मुझे यहां से ले चलो।" ये कहना है इंदौर के रहने वाले आदित्य तिवारी (28 वर्ष) का जिन्होंने एक डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चा ‘बिन्नी (1 वर्ष)’ को बड़ी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार गोद लिया।

डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बिन्नी उन बच्चों में शामिल है जिसके पैदा होते ही माता-पिता ने उसे अनाथालय में छोड़ दिया था। मध्य प्रदेश के इंदौर के मिशनरी ऑफ चैरिटी अनाथालय में जिस दिन बिन्नी को छोड़ा गया था उस दिन संयोग से इंदौर के रहने वाले आदित्य तिवारी वहां पहुंचे थे।

आदित्य तिवारी अपने पिता के जन्मदिन के उपलक्ष्य में अनाथालय में मिठाईयां बांटने के लिए गए थे। इस दौरान आदित्य की नज़र उस बच्चे पर पड़ी जो बहुत देर तक अकेले पड़ा हुआ था और कोई भी व्यक्ति उसकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है। मैँ लगातार तीन दिन तक अनाथालय गया वह बच्चा उसी स्थिति में मुझे वहीं पड़ा मिलता रहा।

आदित्य तिवारी (28 वर्ष ) ने गाँव कनेक्शन को बताया, “जब मैंने उस बच्चे के बारे पूछा तो वहां के लोगों ने मुझे बताया कि उसके दिल में एक छेद है और वह डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है। उसके बाद जब मैं उसकी ओर गया तब उसने मेरी उंगली को मजबूती से पकड़ लिया और मुझे जाने नहीं दिया।”

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आदित्य बताते हैं कि एक महीने बाद मैं फिर उस अनाथालय में गया। गोद लेने के लिए वेटिंग लिस्ट में पहले जो बच्चे थे उनमें से कई बच्चों को गोद लिया जा चुका था। उन लिस्ट में बिन्नी भी शामिल था लेकिन उसे किसी ने गोद नहीं लिया।

उसी दिन आदित्य ने अपनी जिंदगी का एक अहम फैसला लिया और वह था बिन्नी को अपनाने का। क्योंकि, वह जानते थे कि कि उनका यह निर्णय बिल्कुल सही है, और इससे उन्हें कोई पछतावा नहीं होगा।

बेटे अवनीश के साथ आदित्य।

लड़नी पड़ी लड़ाई

इंदौर के रहने वाले आदित्य तिवारी ने साल 2016 की शुरुआत में ही बिन्नी को गोद ले लिया लेकिन इसके लिए उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उस वक्त कोई भी अविवाहित व्यक्ति तभी बच्चे को गोद ले सकता था जब उसकी उम्र 30 वर्ष या उससे ज्यादा हो। आदित्य तब 25 वर्ष के थे। यानि क़ानूनन उन्हें बच्चा गोद नहीं मिल सकता था। पर आदित्य पीछे हटने वालों में से नहीं थे। उन्होंने इस नियम के खिलाफ न्यायिक लड़ाई लड़ी।

राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक लगाई गुहार

आदित्य ने अपने इस मुकाम को अंजाम तक पहुँचाने के लिए हर उस व्यक्ति से संपर्क किया जिसका रास्ता उन्हें सीधे बिन्नी तक पहुंचा सकता था। इसके लिए उन्होंने, महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को भी ट्विटर के माध्यम से संदेश पहुंचाया। हालाँकि उन्होंने कुछ हद तक मदद की और कई गैर सरकारी संस्थाओं से संपर्क करने की सलाह भी दी। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य कई मंत्रियों को सौ से ज़्यादा पत्र भेजे।

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कारा के नियम में बदलाव

आदित्य बताते हैं, "बहुत मेहनत के बावजूद कारा 'चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी' ने सिंगल लोगों के लिए नियमों में फेरबदल किए, जिसमें उन्होंने सिंगल पेरेंट्स की उम्र को 25 साल से 55 वर्ष तक कर दिया। क्योंकि, पहले बच्चे को गोद लेने की उम्र 30 साल थी और यह 30 साल से कम उम्र के थे। इसी के चलते मैं 1 जनवरी 2016 को मैं गोद ले पाया।

परिवार का समर्थन

आदित्य बताते हैं," मेरे माँ बाप ने हर कदम पर सपोर्ट किया । अब बिन्नी का नाम अवनीश है और आज भी मेरे मां – पापा उसका पूरा ख्याल रखते हैं।”

बेटे अवनीश और पिता के साथ आदित्य।

गोद लेने से पहले कैसी थी ज़िंदगी

बिन्नी को गोद लेने से पहले आदित्य एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। जो अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां बिताना और मस्ती करना पसंद करते थे। हालाँकि, इन सब के बावजूद आदित्य ने अर्पिता से 2016 में शादी कर ली, तब तक उन्हें बिन्नी को गोद लिए हुए 7 महीने हो गए थे। लेकिन, आज भी वह आधिकारिक तौर पर बिन्नी के लिए एक सिंगल पैरेंट हैं।

शादी भी अलग हटकर की

आदित्य की शादी भी लीक से हटकर होने के चलते चर्चा में रही। उन्होंने गृहनगर इंदौर में 16 जुलाई को अपनी बचपन की दोस्त अर्पिता से शादी रचायी। आदित्य बताते हैं, ‘मैंने जान-पहचान के चंद ही लोगों को अपनी शादी में बुलाया था। लेकिन मेरी शादी के मौके पर अनाथालयों व झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले बच्चों, वृद्धाश्रमों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और एड्स पीड़ितों तक भोजन पहुंचाया गया। इस अवसर पर मैंने इंदौर के चिड़ियाघर के एक बाघ को गोद लेकर उसके खाने का खर्च उठाने की जिम्मेदारी लेना भी मंजूर किया।”

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अनाथालय में हो रहे बच्चों के रैकेट का भी किया खुलासा

आदित्य ने इसके साथ ही इस बात को भी उजागर किया था कि जिस अनाथालय से बिन्नी को गोद लिया था वह एक रैकेट चला रहा था। यहाँ के 45 बच्चों में से 38 का रजिस्टर में नाम दर्ज नहीं किया गया था। इन बच्चों को कानून की नज़र से बचाकर तस्करी कर दी गई थी। आदित्य बताते हैं, “जब बिन्नी को भोपाल से इंदौर इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, तब मैं बहुत डरा हुआ था।” हालाँकि, आदित्य ने डोज़ेन एक्सपर्ट की मदद से बिन्नी के बायोलॉजिकल पेरेंट्स से बात की।

आदित्य ने बताया कि, “ वे लोग अच्छी तरह से शिक्षित हैं। फिर भी उन्होंने अपने बच्चे को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उनके बच्चे को डाउन सिंड्रोम था।”

आजकल आदित्य क्या कर रहें हैं

आदित्य तिवारी पुणे की एक मल्टीनेशल कंपनी में काम करते हैं और साथ ही साथ अवनीश का भी ख्याल रखते हैं। आदित्य बताते हैं, "आपके पास जो कुछ भी है उससे आपकी संतुष्टि और आपकी पैरेंटिंग परिभाषित होती है, इसके अलावा कभी भी किसी दूसरे बच्चे की तुलना अपने बच्चे से न करें। हमेशा यह सोचें कि मेरे बच्चे ने जो कुछ किया है, वह अपनी क्षमता के अनरूप सबसे अच्छा किया है। आपके द्वारा साझा किए गए बंधन आपके बच्चे के प्यार को जोड़ने के लिए लंबा रास्ता तय करेंगे।"

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