केरल में पेट भरने को आदिवासी ने चुराया खाना, भीड़ ने पीटा, सेल्फी ली, मार डाला

केरल में पेट भरने को आदिवासी ने चुराया खाना, भीड़ ने पीटा, सेल्फी ली, मार डालासाभार इंटरनेट

केरल देश का दूसरा सर्वाधिक शिक्षित राज्य है। यहां साक्षरता दर है 93.91 फीसदी। मतलब कहा जा सकता है कि 100 में से लगभग 94 लोग पढ़े-लिखे हैं। सरकारों की पूरी कोशिश रही है कि पूरा देश 100 फीसदी न सही केरल जितना तो पढ़-लिख जाए। इतने पढ़े-लिखे राज्य में एक आदिवासी, आधे पागल युवा की सिर्फ चोरी के शक में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। ऐसी खबरें थीं कि मधु नाम के 30 बरस के इस आदिवासी युवा ने एक दुकान से चावल और खाने की कुछ चीजें चुरा ली थीं, जिनकी कीमत 200 रुपयों के आसपास थी।

मधु पिछले कुछ महीनों से अपना घर छोड़ जंगलों में रह रहा था। गुरुवार शाम को नाराज दुकान मालिक सहित भीड़ ने मधु को जंगल से पकड़ा। उसकी लुंगी से उसे बांधा, फिर डंडों से पीटा। इस दौरान सूचना क्रांति की बदौलत सर्वसुलभ हुए सोशल मीडिया पर उसके विडियो सर्कुलेट हुए, कुछ लोगों ने उसके साथ सेल्फी भी खींची। पिटाई जारी रही, मतलब बाकायदा उसे स्वाद लेलेकर मारा गया। इसके बाद उसे पुलिस को सौंप दिया गया। मधु को पुलिस की जीप में खून की उल्टियां हुईं और कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया।

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इस पूरी घटना से फौरी तौर पर एक महिला को सबसे ज्यादा तकलीफ हुई, इसके बाद तमाम राजनीतिक दलों और दूसरे सामाजिक संगठनों को। मल्ली नामकी यह महिला चूंकि मधु की मां थी इसलिए यह स्वाभाविक है, ऐसा कहा जा सकता है। मल्ली रो-रोकर कह रही थी, “मेरा बेटा जंगल में रहता था, वह वहीं रहता तो जिंदा तो रहता, मुझे कम से कम तसल्ली तो होती कि वह जिंदा है। अब तो उसे भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला।” एक विडियो में लोग मधु के झोले की तलाशी ले रहे हैं। उसमें से अंडे और खाने-पीने की चीजें निकल रही हैं। एक फोटो में मधु कैमरे से दूर देख रहा है, बढ़ी दाढ़ी है, बिखरे बाल हैं लेकिन आंखों में चोर सा शातिरपन नहीं है, शायद उसे नहीं लगता होगा कि भूखे होने पर खाने की चीजें जुगाड़ लेना चोरी या कोई अपराध है। एक दूसरे फोटो में वह अपने हमलावर से कुछ कह रहा है, क्या कह रहा है पता नहीं लेकिन वह गिड़गिड़ा तो नहीं रहा है। शायद यह बात 93.91 फीसदी साक्षरों को अच्छी नहीं लगी होगी।

सोशल मीडिया पर आदिवासी हितों के लिए काम करने वाली ऊषा पुनाथिल ने लिखा, आदिवासियों की जमीन, जंगल हथियाने के बाद हमने कानून बनाए, अब आज एक आदिवासी को पीटकर मार डाला गया। जब एक आदिवासी को खाना चुराने के लिए मारा गया है, तब हमें, जिन्होंने आदिवासियों का सबकुछ चुरा लिया किस तरह की मौत दी जानी चाहिए?

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राजनीतिक दल एक दूसरे को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अनुसूचित जन जाति आयोग बेहद नाराज है। खबर लिखे जाने तक इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी हो गई थी। ट्विटर पर केरल ट्रेंड कर रहा है। मधु मर चुका है, उसकी मां कुछ दिन बाद इस दुख को भूल जाएगी, उसके पास इसके अलावा कुछ चारा है भी तो नहीं। बहरहाल, इसी शिक्षित समाज में पिछले कुछ समय में यह भीड़ द्वारा पीटे जाने की तीसरी घटना है। इससे पहले पिछले महीने पल्लीपुरम में तीन महिलाओं ने एक पागल महिला को बुरी तरह से पीटा, उसके पैरों में आग तक लगा दी। इसकी भी विडियो क्लिप बनी। फरवरी के शुरू में तिरूअनंतपुरम में भीड़ ने एक किन्नर को मारा-पीटा और उसके कपड़े फाड़ दिए।

बड़ा सवाल है कि क्या हमें एक संवेदनशील या विवेकी समाज चाहिए या सरकारी आंकड़ों में 100 प्रतिशत साक्षर।

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