सात मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद किसानों का आंदोलन खत्म, पढ़िए वो 13 मांगे जिनके लिए किसानों ने खाईं लाठियां

संपूर्ण कर्ज माफी, बुजुर्ग किसानों को पेंशन, कृषि से जुड़े उत्पादों और उपकरणों से जीएसटी हटाने से समेत यूपी, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों के किसान 11 दिन से आंदोलन पर थे।

सात मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद किसानों का आंदोलन खत्म, पढ़िए वो 13 मांगे जिनके लिए किसानों ने खाईं लाठियां

नई दिल्ली। भारतीय किसान यूनियन की ७ से ज्यादा मांगें मानने का आश्वासन केद्र सरकार से किसानों को मिल गया है। इसके साथ ही किसान क्रांति यात्रा दिल्ली में किसान घाट पर पहुंच कर समाप्त हो गई। किसानों को आधी रात के बाद दिल्ली में प्रवेश की अनुमति मिली थी। किसानों ने कहा उनकी यात्रा सफल रही है।


23 सितंबर को हरिद्वार से चली किसान क्रांति यात्रा रात को किसान घाट पर जाकर समाप्त हो गई। संपूर्ण कर्ज माफी, बुजुर्ग किसानों को पेंशन, कृषि से जुड़े उत्पादों और उपकरणों से जीएसटी हटाने से समेत यूपी, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों के किसान 11 दिन से आंदोलन पर थे। करीब सवा दो सौ किलोमीटर का पैदल सफर कर किसान दिल्ली बॉर्डर पर डेरा जमाए थे। जिन्हें काफी हंगामे के बाद आधी रात के बाद दिल्ली में प्रवेश की अनुमति मिली।

किसान घाट पहुंचने के बाद यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गौरव टिकैत ने कहा, हम यात्रा को किसान घाट तक ले जाना चाहते थे। सरकार तक किसानों की परेशानी पहुंची है, यात्रा सफल रही।"

भारतीय किसान यूनियन के यूपी प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया कि सरकार ने सात मांगों को तुरंत मानने का आश्वासन दिया है, जबकि 6 अन्य बड़ी मांगों के लिए कमेटी बनाकर विचार किया जाएगा।"

उन्होंने आगे बताया, "सरकार से हम लोगों ने मांग की थी रबी के सीजन में एमएसपी बढ़ाई जाए, जिस पर सरकार ने खरीफ से बेहतर भाव देने का वादा किया है। किसानों के ट्रैक्टर को एनजीटी से छूट दिलाने की बात हुई है और साथ ही अन्ना पशुओं के लिए गोशाएं बनवाने पर सहमति बनी है। हमारी एक बड़ी मांग थी कि अन्ना पशुओं से होने वाले नुकसान को भी फसल बीमा में जोड़े जिस पर सरकार ने कमेटी बनाकर विचार का वादा किया है।"

किसानों की सरकार से इन मांगों पर बनी बात

1.मनरेगा को खेती से जोड़ने के लिए नीति आयोग के तत्वाधान में 6 मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी का गठन हुआ,जो किसानों से आए सुझावों पर विचार कर रही है।

2.खेती के उपकरणों को जीएसटी मुक्त करने का मामला जीएसटी काउंसिल में ले जाएगी सरकार।

3.दस साल पुराने ट्रैक्टरों पर रोक के खिलाफ एनजीटी में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी सरकार।

4.सरकार के बजट की घोषणा के अनुरुप उत्पादन लागत पर 50 फीसदी अधिक एमएसपी करने के निर्णय का रबी में पालन होगा। इसी के साथ किसानों से खरीद का पुख्ता इंतजाम किया जाएगा।

5.पर्याप्त पैदावार होने वाली फसलों के आयात को रोकने के लिए कानून सम्मत हर संभव प्रयास होगा। 90 दिन होगी किसानों से खरीद।

6.फसल बीमा को लेकर केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में समिति का गठन होगा। ये समिति फसल बीमा और केसीसी में आ रही परेशानियों पर निर्णय करेगी।

7.जंगली पशुओं से फसल को हो रहे नुकसान के संबंध में फसल बीमा योजना के दिशा-निर्देशों में संसोधन करके इस जोखिम को योजना के पायलट में शामिल किया जाएगा।

ये हैं किसानों की बड़ी मांगे

1-किसानों के लिए न्यूनतम आय तय की जाए। 60 साल की आयु के बाद किसान को 5,000 रुपए प्रति माह पेंशन दी जाए।

2-प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए। इस योजना में किसानों को लाभ मिलने के बजाए बीमा कंपनियों को लाभ मिल रहा है।

3-सरकार पूर्ण कर्जमाफी करें और बिजली के बढ़ाए दाम वापस ले।

4-किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में उपलब्ध कराई जाए।

5-दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से ज्यादा पुराने ट्रैक्टरों पर रोक हटा दी जाए।

6-किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बिना ब्याज लोन दिया जाए। महिला किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना अलग से बनाई जाए।

7-आवारा (छुट्टा) पशुओं से किसानों के फसल को बचाने का इंतजाम किया जाए।

8-जिन किसानों ने खुदकुशी की है, उनके परिजनों को नौकरी और परिवार को पुनर्वास की व्यवस्था हो।

9-स्वामीनाथन कमेटी के फॉर्मूले के आधार पर किसानों की आय सी-2 लागत में कम से कम 50 प्रतिशत जोड़ कर दिया जाए।

10-सभी फसलों की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी दी जाए।

11-खेती में उपयोग होने वाली सभी वस्तुओं को जीएसटी से बाहर की जाए

12-चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपए प्रति किलो किया जाए और 7 से 10 दिन के अंदर गन्ना किसानों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

13-किसानों को पेंशन और गन्ने का बकाया भुगतान किया जाए।

The 'Kisan Kranti Padyatra' that started on Sept 23 had to end at Delhi's Kisan Ghat. Since Delhi police didn't allow us to enter we protested. Our aim was to finish the yatra which has been done. Now we'll go back to our villages: Naresh Tikait, President, Bharatiya Kisan Union pic.twitter.com/P7xvF4YTFI


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