स्कूलों के बाद अब कॉलेजों पर चला हंटर, नहीं मिलेगा जंक फ़ूड  

Astha SinghAstha Singh   24 Sep 2017 9:24 AM GMT

स्कूलों के बाद अब कॉलेजों पर चला हंटर,  नहीं मिलेगा जंक फ़ूड  अब कॉलेजों में भी लगा जंक फ़ूड पर बैन 

गाँव कनेक्शन

लखनऊ। सीबीएसई और यूजीसी के बाद ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन का जंक फू़ड पर बैन लगाने की ठानी है। अब कॉलेजों के बाहर ब‌िकने वाले ‌प‌िज्जा, बर्गर, स‌िगरेट और गुटखा पर हंटर चल रहा है। केद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के बाद अब ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) ने भी इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेज परिसर में जंक फूड पर रोक लगा दी है।

अब देश भर के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों की कैंटीन में समोसा, पिज्जा, बर्गर, नूडल्स जैसे जंक फूड नहीं बेचे जा सकेंगे। प्रदेश के लगभग सभी इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में एआईसीटीई का पत्र पहुंच गया है।

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कॉलेजों को भेजे गए पत्र में जंक फूड को हानिकारक बताते हुए कॉलेज प्रशासन से इस व्यवस्था का पालन कराने को कहा है। कॉलेज के आसपास की भी दुकानों में जंक फूड बेचने का विरोध करने को कहा गया है।

एआईसीटीई के सर्कुलर में गुटखा, पान-मसाला, सिगरेट आदि की भी कॉलेज के आसपास बिक्री पर प्रतिबंध लगाने और छात्रों को जागरूक करने को भी कहा गया है।

अतिरिक्त मात्रा में जंक फूड खाने से होने वाली बीमारियाँ-

थकान- जंक फूड आपके भूख को तो मिटाते हैं लेकिन इसमें ज़रूरी प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेड बिल्कुल नहीं होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। हमेशा जंक फूड खाने से आपके शरीर की ऊर्जा खत्म होने लगती हैं जिसके फलस्वरूप आप थकान महसूस करने लगते हैं।

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अवसाद- किशोर वर्गों में जंक फूड खाने का चलन बहुत ज़्यादा होता है। इससे उनके शरीर के हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। फलस्वरूप स्वभाव में बदलाव और मन के भाव के बार-बार बदलाव (mood swings) होने लगता है। लेकिन हेल्दी खाना खाने से हार्मोन का संतुलन ठीक रहता है। शरीर को ज़रूरी पौष्टिकता तो मिलता ही है साथ ही अवसाद आदि की समस्या भी नहीं होती है।

एसिडिटी- जंक फूड खाने से हजम शक्ति दुर्बल होने के साथ-साथ पेट की गड़बड़ी की समस्या रोजमर्रा के जिंदगी का अंश बन जाता है। क्योंकि जंक फूड एक ही तेल में बार-बार डीप फ्राइ किया जाता है। यह तेल पेट में जाकर जमा हो जाता है और इसमें फाइबर की मात्रा शुन्य के बराबर होने के कारण हजम करने में भी मुश्किल होता है।

ब्लड-शुगर- जंक फूड में उच्च मात्रा में रिफाइन्ड शुगर होता है जो चयापचय (metabolism) के दर को कम कर देता है। जंक फूड कार्बोहाइड्रेड और प्रोटीन के स्तर को गिरा देता है जिसके फलस्वरूप और भूख लगती है और लोग ज़्यादा जंक फूड खा लेते हैं।

मस्तिष्क- हाल के अनुसंधान से पता चला है कि जंक फूड खाने से ब्रेन के हेल्दी फैट के जगह पर बैड फैट जगह ले लेता है जिससे मस्तिष्क के सामान्य कार्यकलाप में बाधा उत्पन्न होने लगता है।

ह्रदय संबंधी बीमारी- जंक फूड खाने से दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि जंक फूड में कोलेस्ट्रोल और ट्राइग्लिसेराइड प्रचुर मात्रा में होता है।इससे मोटापा होने और बढ़ने की आंशका बढ़ जाती है।

लीवर- इसमें जो ट्रांस फैट होता है वह लीवर में जम होता है जिसके फलस्वरूप लीवर के सामान्य कार्य में बाधा उत्पन्न होती है।

टाइप- 2 डाइबीटीज- जब आप हेल्दी फूड खाते हैं तब शरीर को ग्लूकोज़ मिलता है जो इन्सुलिन को नियंत्रित रखता है। लेकिन जब चयापचय का स्तर प्रभावित होता है तब शरीर इन्सुलिन का इस्तेमाल अच्छी तरह से कर नहीं पाता है फलस्वरूप डाइबीटिज होने का खतरा बढ़ जाता है।

कैंसर- हाल के अनुसंधान से पता चला है कि उच्च मात्रा में शुगर और फैट युक्त खाना खाने से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

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