मेरे बेटे के पेशाब से खून आ रहा है, डॉक्‍टरों की हड़ताल है इलाज कैसे हो

Ranvijay Singh

Ranvijay Singh   17 Jun 2019 1:29 PM GMT

लखनऊ। ''मेरे बेटे को बहुत दिक्‍कत है, उसके पेशाब से खून आ रहा है। जिला अस्‍पताल के डॉक्‍टरों की लापरवाही की वजह से ऐसा हुआ। अब यहां लखनऊ आए हैं इलाज के लिए, लेकिन यहां तो डॉक्‍टर प्रदर्शन कर रहे हैं।'' यह बात कहते हुए रायबरेली के रहने वाले राजेंद्र सिंह भावुक हो जाते हैं। वो कहते हैं मेरा बेटा सोनू मानसिक रूप से विक्ष‍िप्‍त है, कुछ बोल नहीं पाता, बस दर्द की वजह से चीखता है, मुझसे यह चीख बर्दाश्‍त नहीं होती।

राजेंद्र सिंह और उनका बेटा उन लाखों तीमारदारों और मरीजों में से एक हैं, जो देशभर में हो रही डॉक्‍टरों की हड़ताल से प्रभावित हुए हैं। पश्चिम बंगाल में बीते 10 जून को डॉक्टरों के साथ हुई हिंसा के बाद डॉक्‍टर हड़ताल पर चले गए। इनके विरोध का समर्थन पूरे देश के डॉक्‍टर कर रहे हैं। ऐसे में इंडियन मेडिकल असोसिएशन (IMA) ने सोमवार (17 जून) को 24 घंटे के 'महाबंद' का फैसला लिया। इस महाबंद में सुबह 6 बजे से 24 घंटे तक देशभर में 5 लाख से ज्यादा डॉक्टर्स स्ट्राइक पर रहे। इस बंद का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। हालांकि डॉक्‍टरों का कहना है कि इमरेजेंसी सेवा चालू है, अगर कोई मरीज सीरियस है तो उसका इलाज किया जा रहा है।

राजेंद्र सिंह और उनके बेटे की कहानी हिंदुस्‍तान में अस्‍पतालों के सिस्‍टम की बखिया उधेड़ती है। राजेंद्र बताते हैं, ''सोनू को पेशाब की दिक्‍कत थी। रायबरेली के जिला अस्‍पताल में दिखाया तो डॉक्‍टर ने कहा नली डालनी होगी, फिर सब सही हो जाएगा।'' राजेंद्र आरोप लगाते हैं कि ''रायबरेली के जिला अस्‍पताल में आपरेशन की डेट तय हुई, लेकिन यहां नली डॉक्‍टर ने नहीं जमादार ने डाल दी।''

डॉक्‍टरों की हड़ताल की वजह से राजेंद्र सिंह अपने बेटे सोनू को लेकर प्राइवेट अस्‍पताल चले गए।डॉक्‍टरों की हड़ताल की वजह से राजेंद्र सिंह अपने बेटे सोनू को लेकर प्राइवेट अस्‍पताल चले गए।

''आपरेशन के बाद भी बेटे को पेशाब नहीं उतर रही थी। मेरा बेटा मानसिक रूप से विक्ष‍िप्‍त है, ऐसे में दर्द को बता भी नहीं पाता है, बस रोता है-चीखता है। मैंने इस बात की जानकारी जिला अस्‍पताल के डॉक्‍टर को दी। डॉक्‍टर ने इसका समाधान बताया कि नली निकाल देंगे और फिर लगाएंगे। नली निकालते ही बेटे के पेशाब के रास्‍ते खून गिरने लगा, इतनी तेजी से कि रोके न रुके।'' यह कहते हुए राजेंद्र की आंखे भर आती हैं

राजेंद्र बताते हैं, ''डॉक्‍टरों ने इससे निपटने के लिए 4 बोतल खून चढ़ा दिया। जब उन्‍हें लगा कि उनके बस का नहीं रहा तो डॉक्‍टरों ने मामला केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) रेफर कर दिया। राते में सोनू और अपने परिवार को लेकर यहां पहुंचा हूं। ट्रॉमा में भर्ती था, वहां से ओपीडी (बाह्यरोगी विभाग) रेफर कर दिया गया, लेकिन यहां तो प्रदर्शन हो रहा है। अब बेटे को लेकर प्राइवेट अस्‍पताल जा रहा हूं। भगवान बस इसकी जान बचा ले।''

पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टर 11 जून से हड़ताल पर हैं। इन्‍हीं के समर्थन में सोमवार (17 जून) को देश भर के मेडिकल कॉलेज आन्दोलन कर रहे हैं, जिसमें केजीएमयू के डॉक्‍टर भी शामिल हैं। केजीएमयू के फाइनल इयर के स्‍टूडेंट शिवम मिश्रा जो कि इस प्रदर्शन में शामिल हैं, वो कहते हैं- ''हम लोगों ने ओपीडी बंद रखी हैं, इसकी जानकारी दो दिन पहले से अखबारों और सोशल मीडिया के माध्‍यम से दी गई थी। हम डॉक्‍टर हैं तो हम इतने निर्दयी नहीं हो सकते हमारे यहां ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी सेवाएं चल रही हैं। अगर हमारी मांगों को नहीं माना जाता तो हम ऐसा प्रोटेस्‍ट आगे भी करेंगे।''

डॉक्‍टरों की मांग है कि डॉक्टरों के साथ हो रही मारपीट के मुद्देनजर सेंट्रल एक्ट फॉर वायलेंस अगेंस्ट डॉक्टर्स लाया जाए। प्रदर्शन कर रहे डॉक्‍टर नारे बुलंद करते हैं- 'save the saviour' यानि 'बचाने को बचाया जाए'। इस तरह के नारे बुलंद करने वाले केजीएमयू के इंटर्न सूरज कुमार कहते हैं, ''हम अपने सुरक्षा और अधिकारों के लिए यह प्रदर्शन कर रहे हैं। हम मरीजों का इलाज पुरे मन से करते हैं, लेकिन इसलिए नहीं कि कोई भी आकर हमें मारकर चला जाए। डॉक्‍टर एक इंसान ही है भगवान नहीं कि वो सबको बचा ही ले। हम पूरी कोशि‍श करते हैं जान बचाने की, लेकिन अगर किसी की जान चली जाए तो उसके लिए हमें जान से नहीं मारा जा सकता।''

केजीएमयू के ओपीडी के बाहर प्रदर्शन कर रहे डॉक्‍टर। केजीएमयू के ओपीडी के बाहर प्रदर्शन कर रहे डॉक्‍टर।

सूरज कुमार और शिवम मिश्रा जैसे लाखों डॉक्‍टर जिस घटना के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं उसको भी जरा जान लीजिए। यह घटना 10 जून की है। कोलकाता के सरकारी एनआरएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक 75 साल के बुजुर्ग मोहम्मद सईद को दिल का दौरा पड़ने के बाद एडमिट कराया गया। वहां मोहम्‍मद सईद को दूसरा दिल का दौरा पड़ा। रात को ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर्स ने सईद को जीवनरक्षक इंजेक्शन लगाया, लेकिन उसकी जान नहीं बचा पाए।

इसके बाद परिजन अस्‍पताल में हंगामा करने लगे। उन्‍होंने अपने इलाके से लोगों को बुलाया। रात में करीब 11 बजे दो ट्रकों में भरकर लोग अस्‍पताल में पहुंचे। लोगों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर परिवह मुखर्जी और यश टेकवानी की बुरी तरह पीटाई कर दी। ईंट की चोट से मुखर्जी के सिर में फ्रैक्चर हो गया, जिन्‍हें एक निजी नर्सिंग होम में एडमिट कराया गया। मामले में राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का गठन कर दिया है। वहीं, पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसी घटना के विरोध में डॉक्टर हड़ताल कर रहे हैं।

हड़ताल का सीधा असर मरीजों और तीमारदारों पर हुआ है। केजीएमयू के ओपीडी सेंटर के सामने ही एक पेड़ के नीचे बैठे उत्‍तर प्रदेश के बहराइच के रहने वाले सियाराम मिल जाते हैं। सियाराम की कहानी हर उस तीमारदार की कहानी है जो इस हड़ताल से परेशान हैं। सियाराम बताते हैं, ''पत्‍नी के पूरे शरीर में सूजन है, पूरे शरीर में दर्द रहता है। गांव से यहां तक आने में 1000 से 1500 रुपए खर्च हो जाता है। इस बात की जानकारी होती कि यहां हड़ताल है तो आते ही नहीं। मैं रोज 100 से 200 रुपए कमा पाता हूं, 1000-1500 मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। अब अगली बार किसी से पैसे उधार लेकर आना होगा।''

ऐसा ही हाल कानपुर के अकील का भी है। अकील की अम्‍मी को ब्‍लड कैंसर है। उन्‍हें हर महीने केजीएमयू आना होता है। अब दवा खत्‍म हो गई और सोमवार की डेट मिली थी। ऐसे में कानपुर से वो अपनी अम्‍मी को लेकर सुबह ही निकल आए थे, यहां पहुंचे तो पता चला कि डॉक्‍टरों की हड़ताल है, आज इलाज नहीं हो पाएगा। अकील कहते हैं, ''पहले पता होता तो आज न आते। पर्ची पर आज की ही डेट थी, इसलिए आ गए। काम से भी छुट्टी ले रखी थी। अब लौट जाएंगे और यहां का पता करते रहेंगे, जब हालात सही होंगे तो आएंगे।''

कानपुर के रहने वाले अकील अपनी मां के इलाज के लिए केजीएमयू आए थे।कानपुर के रहने वाले अकील अपनी मां के इलाज के लिए केजीएमयू आए थे।

हालांकि डॉक्‍टरों की हड़ताल खत्‍म होने के आसार भी दिखने लगे हैं। पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने रविवार को अपने रुख में नरमी दिखाई। डॉक्‍टरों ने ममता बनर्जी के साथ बैठकर करने की मांग मान ली है और बैठक का स्थान तय करने का निर्णय मुख्यमंत्री पर छोड़ दिया है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बैठक मीडिया की मौजूदगी में हो और इसकी रिकॉर्डिंग की जाए। अब देखते हैं यह मामला कब तक खिंचता है। फिलाहल इसकी वजह से सोनू और राजेंद्र जैसे बहुत से मरीज और तीमारदार परेशान हैं।


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