अधिवक्ता कानून में प्रस्तावित संशोधन के विरोध में देशभर में वकीलों की हड़ताल

अधिवक्ता कानून में प्रस्तावित संशोधन के विरोध में देशभर में वकीलों की हड़तालइलाहाबाद हाईकोर्ट ।

इलाहाबाद (भाषा)। अधिवक्ता कानून में प्रस्तावित संशोधन के विरोध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वकील आज देशव्यापी हड़ताल में शामिल हुए, जिससे अदालत में न्यायिक कामकाज ठप हो गया। हड़ताल में शामिल हुए इन वकीलों ने प्रस्तावित संशोधन के ‘अधिवक्ता विरोधी' होने का दावा किया है।

देश से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

इलाहाबाद उच्च न्यायालय परिसर के मुख्य द्वार के सामने आज सुबह एक बैठक की गई जहां हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने वकीलों से कहा, ‘‘भारत के विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान द्वारा लाया गया अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक कठोर है।'' उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक, ‘‘एक न्यायधीश या एक न्यायिक अधिकारी यदि एक वकील को अनुशासनहीनता का दोषी पाता है तो वह उस वकील को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बगैर उसका लाइसेंस निरस्त कर सकता है।''

प्रस्तावित संशोधन में बार काउंसिल आफ इंडिया की कार्यप्रणाली में भी भारी बदलाव की सिफारिश की गई है, विधेयक के मुताबिक, बीसीआई के आधे से अधिक सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और मुख्य सतर्कता आयुक्त वाली एक समिति द्वारा नामित किया जाएगा।
अनिल तिवारी अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष का दावा है, ‘‘इसी तरह, राज्यों की बार काउंसिलों के लिए यह सिफारिश की गई है कि इनके आधे से अधिक सदस्यों को संबद्ध उच्च न्यायालयों द्वारा नामित किया जाएगा और इन सदस्यों में वे लोग शामिल होंगे जो कानून के पेशे के अलावा अन्य पेशों में हैं।''

उन्होंने कहा, ‘‘इन कठोर, अधिवक्ता विरोधी, असंवैधानिक कदमों के खिलाफ बार काउंसिल आफ इंडिया ने आज देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है, हमें इस आंदोलन को पूर्ण सहयोग देना होगा।''

इस बीच, इस हड़ताल से केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की यहां स्थित पीठ जैसे अन्य न्यायिक निकायों में कामकाज प्रभावित हुआ। शहर के किसी हिस्से से किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है।

दिल्ली के वकील राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वकीलों की हड़ताल से शुक्रवार को न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। वकील विधि आयोग द्वारा प्रस्तावित उस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, जिसमें वकीलों के हड़ताल पर जाने पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है।

दिल्ली की सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने कहा, "बीसीआई के साथ एकजुटता दिखाते हुए दिल्ली के वकीलों ने सभी जिला अदालतों में कामकाज से दूर रहने का फैसला किया है।"

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने विधि आयोग की सिफारिशों के विरोध में 31 मार्च को वकीलों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।

दिल्ली की छह जिला अदालतों - पटियाला हाउस, तीस हजारी, रोहिणी, कड़कड़डूमा, साकेत और द्वारका में हड़ताल जारी है।

कोई भी वकील अदालत के समक्ष हाजिर नहीं होगा क्योंकि हमने काम न करने का फैसला किया है। हड़ताल सफल है।
संतोष मिश्रा अध्यक्ष बार एसोसिएशन नई दिल्ली

सर्वोच्च न्यायालय के वकील हड़ताल में शामिल नहीं होंगे, लेकिन उन्होंने इसमें अपना समर्थन जाहिर किया है।बार काउंसिल ने सरकार से विधि आयोग की सिफारिशों को खारिज करने का आग्रह किया है।

Share it
Top