आरुषि-हेमराज हत्याकांड में हाईकोर्ट ने राजेश और नूपुर तलवार को बरी किया, जेल से तुरंत छोड़ने के आदेश 

आरुषि-हेमराज हत्याकांड में हाईकोर्ट ने राजेश और नूपुर तलवार को बरी किया, जेल से तुरंत छोड़ने के  आदेश डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार।

इलाहाबाद (आईएएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2008 के आरुषि-हेमराज हत्याकांड मामले में आज नुपुर और राजेश तलवार को यह कहते हुए बरी कर दिया कि परिस्थितियां और सबूत उन्हें दोषी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। शुक्रवार को नुपुर और राजेश तलवार को गाजियाबाद स्थित डासना जेल से रिहा किया जा सकता है। तलवार दंपति के वकील दिलीप कुमार ने बताया, इस फैसले से हमें पूर्ण न्याय मिला है। इसके बावजूद यह अभी तक पहेली ही है कि किसने आरुषि-हेमराज की हत्या की है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के 263 पन्नों के फैसले ने नौ वर्षों से चल रही नोएडा के दंत चिकित्सक दंपति की अग्निपरीक्षा कम से कम फिलहाल के लिए समाप्त कर दी है। दोहरी हत्या के लिए गाजियाबाद की सीबीआई अदालत ने 28 नवंबर 2013 को तलवार दंपति को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर न सिर्फ सबको स्तब्ध कर दिया था बल्कि अपनी ही बेटी की हत्या की बात इस मामले में होने की वजह से पूरा देश हिल गया था।

इस फैसले के बाद अबूझ पहेली कायम है कि दोहरी हत्या किसने की।

सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ तलवार दंपति की अपील को मंजूर करते हुए न्यायमूर्ति बी के नारायण और न्यायमूर्ति ए के मिश्रा की पीठ ने कहा, इस बात की प्रबल संभावना है कि किसी बाहरी व्यक्ति ने घटना को अंजाम दिया। तलवार दंपति को कागजी कार्रवाई पूरी किए जाने के बाद कल गाजियाबाद के डासना जेल से रिहा किए जाने की उम्मीद है। सीबीआई ने फिलहाल यह नहीं कहा है कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगी अथवा नहीं। सीबीआई ने कहा कि वह आदेश का अध्ययन करेगी और उसके बाद भावी कार्वाई के बारे में फैसला करेगी।

पीठ ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में अपना फैसला सुनाते हुए कहा, तथ्यों और रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्यों को देखकर हम पाते हैं कि न तो परिस्थितियां और न ही साक्ष्य सुसंगत हैं और परिस्थितियां घटना में अपीलकर्ताओं की संलिप्तता को दर्शाने के लिए कड़ियों को पूरा नहीं कर रही हैं।

पीठ ने कहा, ऐसी परिस्थिति में जब दो तरह की राय संभव है तो अपीलकर्ताओं को दोषी ठहराने वाला नजरिया अपनाना सही नहीं हो सकता है। कड़ियों को पूरा करने के लिये परिस्थितिजन्य साक्ष्य के अभाव में यह संदेह का लाभ अपीलकर्ताओं को देने का उपयुक्त मामला है। नुपुर तलवार के पिता बी जी चिटनिस ने कहा, मैं फैसले के लिये न्यायपालिका का आभारी हूं। वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन बीजी चिटनिस ने कहा कि अपनी बेटी नूपुर और उसके पति राजेश को जेल में देखना उनके लिए बहुत कष्टकर था।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, उन्हें (तलवार दंपति को) मुसीबतों का सामना करना पड़ा। वे लोग भावशून्य हो गए हैं, मेरे लिए उम्र के इस पड़ाव में अपनी बेटी को जेल में देखना बहुत कष्टकर था। आरुषि की करीबी संबंधी वंदना तलवार ने कहा कि मुकदमा लंबा खिंचने के चलते पूरा परिवार करीब एक दशक तक परेशान रहा।

उन्होंने कहा, यह हमारे लिए बहुत थकाने वाला सफर था। हम उन्हें (तलवार दंपति को) बरी करने और उनके साथ हुए अन्याय को समाप्त करने के लिए वाकई इलाहाबाद हाईकोर्ट के बेहद आभारी हैं। तलवार दंपति को मई 2008 में गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई अदालत ने उन्हें 26 नवंबर 2013 को दोषी ठहराया था। उच्च न्यायालय ने सात सितंबर को तलवार दंपति की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फिल्म तलवार के निर्माता विशाल भारद्वाज और निर्देशक मेघना गुलजार ने 2008 के आरुषि हत्या मामले में राजेश और नूपुर तलवार को बरी करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

भारद्वाज 2015 में आयी फिल्म तलवारके निर्माता और लेखक थे जबकि मेघना ने फिल्म का निर्देशन किया था। फिल्म में 16 मई 2008 की रात के घटनाक्रम का एक वैकल्पिक कथन पेश किया था। आरषि नोएडा के अपने घर में मृत मिली थी। तलवार परिवार के घरेलू सहायक हेमराज का शव बाद में मिला था।

विशाल भारद्वाज ने ट्विटर पर लिखा, न्याय में देरी का मतलब न्याय से इनकार नहीं है. बरी किए जाने की खबर सुनकर खुश हूं और काफी राहत महसूस कर रहा हूं। मेघना ने फैसले को न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा, यह न्याय की जीत है. मैं केवल कल्पना कर सकती हूं कि अभिभावक किस यंत्रणा से गुजरे होंगे। उन्होंने कहा, मैंने वह फिल्म कहानी का एक विशेष पक्ष बताने के लिए नहीं की थी। हमारा इरादा पूरे समय यह रहा कि मामले के सभी पक्ष सबके सामने आएं। भारद्वाज ने एक बयान में कहा कि फिल्म बनाते समय उन्हें कई सवालों का सामना करना पडा। उन्होंने कहा, यद्यपि हमने कहानी पेश करने में कोई पक्ष नहीं लिया और जहां तक संभव हुआ एक निष्पक्ष रख अपनाया।

सीबीआई अदालत ने किसी भी मंशा के अभाव में तलवार दंपति को दोषी ठहराने के लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर भरोसा किया था। अपने आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्याम लाल ने यह कहने के लिये उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया था कि सिर्फ यह तथ्य कि अभियोजन आरोपी की मानसिक प्रवृत्ति को सबूतों में तब्दील करने में विफल रहा है, इसका मतलब यह नहीं है कि हमलावर के मन में इस तरह की मंशा नहीं थी।

उन्होंने कहा था, परिस्थितिजन्य साक्ष्य के मामले में इरादे का बहुत अधिक महत्व नहीं होता है. मंशा के अभाव में परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर दोषसिद्धि सिद्धांत रुप में की जा सकती है. डासना जेल के जेलर दधीराम मौर्या ने कहा कि दंपति ने महसूस किया कि उन्हें न्याय मिला है। उन्होंने बताया, नाश्ता करने के बाद वे प्रार्थना कर रहे थे। उनकी दिनचर्या सामान्य थी। उन्होंने (नूपुर ने) कहा कि उन्हें आज न्याय मिला और उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा, कोई भी व्यक्ति इतना समय जेल में बिताने के बाद स्वतंत्रता पाने पर खुश होगा। इसलिए जब उन्हें यह खबर दी गई तो वे खुश थे।

तलवार दंपति की लीगल टीम का हिस्सा रहीं मशहूर वकील रेबेका जॉन ने कहा कि वह इस फैसले के बाद राहत महसूस कर रही हैं. उन्होंने दावा किया कि पूरा मामला संकेतों और अनुमानों पर आधारित था। दंपति के खिलाफ कोई भरोसेमंद साक्ष्य नहीं था। सीबीआई ने इस तरह से जांच की वह उस जैसी जांच एजेंसी को शोभा नहीं देता है।

जॉन ने उम्मीद जताई कि जेल से रिहा होने के बाद तलवार दंपति को निजता दी जाएगी। तलवार दंपति पिछले नौ वर्षों से अधिक समय से मीडिया की नजरों में रहे हैं.

इस बीच, पूर्व सीबीआई निदेशक ए पी सिंह ने कहा कि राजेश और नूपुर तलवार के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिये अपर्याप्त सबूत थे। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भी गाजियाबाद में विशेष सीबीआई अदालत में दायर अपनी क्लोजर रिपोर्ट में यही बात कही थी।

उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ दिया है और यही बात हमने भी अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कही थी। तलवार दंपति के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिये अपर्याप्त सबूत थे इसलिये हमने क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी।

उधर, इस हत्याकांड में सीबीआई दल की अगुवाई करने वाले और बीएसएफ के वर्तमान एडीजी अरुण कुमार ने तलवार दंपति को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद आपराधिक न्याय प्रणाली की समीक्षा की मांग की।

कुमार के नेतृत्व वाले सीबीआई दल ने कहा था कि आरुषि और हेमराज की हत्या राजेश तलवार के कंपाउन्डर कृष्णा, उसके मित्र राजकुमार और तलवार दंपति के एक पड़ोसी के चालक विजय मंडल ने की थी। राजकुमार तलवार दंपति के मित्र प्रफुल्ल और अनीता दुरुनी का घरेलू नौकर था। हालांकि, इस दल के निष्कर्षों को तत्कालीन सीबीआई निदेशक अश्विनी कुमार ने खारिज कर दिया था। उन्होंने अरुण कुमार के नेतृत्व में की गई जांच में कमियां पाई थीं।

सीबीआई ने मामले की जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सिफारिश पर संभाली थी। सीबीआई को मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला तब किया गया था जब मामले की लचर जांच को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस की आलोचना हो रही थी।

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आरुषि-हेमराज हत्याकांड का घटनाक्रम सिलसिलेवार

वर्ष 2008 में हुए आरुषि-हेमराज हत्याकांड का घटनाक्रम इस प्रकार रहा :-

  • 16 मई 2008 :- आरुषि तलवार अपने बेडरुम में मृत पाई गई। हत्या का शक घरेलू सहायक हेमराज पर।
  • 17 मई 2008 :- हेमराज का शव उस इमारत की छत पर पाया गया जिसमें तलवार का फ्लैट है।
  • 19 मई 2008 :- तलवार के पूर्व घरेलू सहायक विष्णु शर्मा को संदिग्ध माना गया।
  • 23 मई :- आरुषि के पिता राजेश तलवार को मुख्य आरोपी बताकर गिरफ्तार किया गया।
  • 01 जून :- मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथों में ली।
  • 13 जून :- सीबीआई ने तलवार के घरेलू सहायक कृष्णा को गिरफ्तार किया।
  • 26 जून :- सीबीआई ने मामले को सुराग विहीन बताया, गाजियाबाद के विशेष मजिस्ट्रेट ने राजेश तलवार को जमानत देने से इनकार कर दिया।
  • 12 जुलाई :- राजेश तलवार को जमानत दी गई।
  • 29 दिसंबर:- सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट जमा की, जिसमें घरेलू सहायकों को क्लीन चीट दिया गया लेकिन माता-पिता की तरफ ऊंगली उठाई।
  • 9 फरवरी, 2011:- अदालत ने सीबीआई रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह आरुषि के माता-पिता पर लगाए गए हत्या और सबूत मिटाने के अभियोजन के आरोप को लेकर मामला जारी रखें।
  • 21 फरवरी:- तलवार दंपत्ति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से निचली अदालत द्वारा जारी किए गए सम्मन को खारिज करने के लिए संपर्क किया।
  • 18 मार्च:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
  • नवंबर, 2013:- राजेश और नुपूर तलवार को दोहरी हत्या का दोषी करार देते हुए सीबीआई की एक विशेष अदालत ने गाजियाबाद में उन दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
  • सात सितंबर, 2017:- इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने माता-पिता की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा और 12 अक्तूबर को फैसले की तारीख दी।
  • 12 अक्तूबर, 2017:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि के माता-पिता को बरी किया।

First Published: 2017-10-13 11:16:32.0

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