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गन्ना किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा 'अमेरिकी फॉल आर्मीवर्म' कीट

तीन साल पहले अफ्रीका में मक्के की फसल बर्बाद करने वाला फॉल आर्मीवर्म भारत के कई राज्यों में पहुंच चुका है। अभी तक इसे मक्के की फसल पर देखा गया था, अब ये दूसरी फसलों को भी बर्बाद कर रहे हैं। अगर समय रहते इसका नियंत्रण और सही पहचान न हुई तो आने वाले समय ये काफी नुकसान पहुंचा सकता है।

Divendra SinghDivendra Singh   12 May 2020 4:01 AM GMT

गन्ना किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा

किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं हैं, लॉकडाउन और ओला, बारिश से किसान पहले से ही परेशान थे, अब किसानों के सामने नई मुसीबत आ गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गन्ने की फसल को फॉल आर्मीवर्म नुकसान पहुंचा रहे हैं।

तीन साल पहले अफ्रीका में मक्के की फसल बर्बाद करने वाला फॉल आर्मीवर्म भारत के कई राज्यों में पहुंच चुका है, अगर समय रहते इसका नियंत्रण और सही पहचान न हुई तो आने वाले समय ये काफी नुकसान पहुंचा सकता है।

शाहजहांपुर के बंडा ब्लॉक के किसान भरत गंगवार बताते हैं, "हमारे यहां कई खेतों में कीट गन्ने की पत्तियों को खा रहे थे, हमें शुरू में लगा कि शायद टिड्डी फसल को नुकसान पहुंचा रही हैं। बाद में पता चला कि ये फॉल आर्मीवर्म नाम का कीट है। हमें तो इसके बारे में पहली बार पता चला है। ऐसे ही अगर ये फसल को नुकसान पहुंचाएंगे तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।"


फॉल आर्मीवर्म कर्नाटक और तमिलनाडू, छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बाद उत्तर प्रदेश के कन्नौज और फिर सीतापुर जिले में मक्का की फसल में दिखा था। अभी ये कीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शाहजहांपुर, बिजनौर जिले में दिखा है।

उत्तर प्रदेश शोध परिषद के निदेशक डॉ. ज्योत्सेंद्र सिंह बताते हैं, "अभी जल्द ही फॉल आर्मीवर्म पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों में गन्ने की फसल में दिखा है, ये कीट मक्के की फसल को नुकसान पहुंचाता है। अगर जहां पर मक्का नहीं मिलता वहां पर ज्वार, गन्ना जैसी फसलों को नुकसान पहुंचाता है। ये बहुत तेजी से फसल को बर्बाद करते हैं।"

इस कीट का दुष्प्रभाव भारत में पहली बार 18 मई 2018 को कर्नाटक के शिवामोगा में देखा गया। बाद में फॉल आर्मीवर्म को तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, छत्तीसगढ़, केरल, राजस्थान, झारखण्ड, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय, अरूणाचल प्रदेश और सिक्किम में हानिकारक स्तर तक किसानों के खेतों में रिपोर्ट किया गया।

मुख्य रूप से मक्का का एक कीट है। यदि मक्का की फसल उपलब्ध नहीं होती है तो यह ज्वार की फसल पर आक्रमण करता है। यदि दोनों ही फसलें उपलब्ध नहीं हैं तो यह अन्य फसलों जैसे- गन्ना, चावल, गेहूं, रागी, चारा घास आदि जो कि घास कुल की है पर आक्रमण करता है। यह कपास और सब्जियों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। फॉल आर्मीवर्म के वयस्क पतंगे तीव्र उड़ान भरने वाले होते हैं जो मेजबान पौधों की तलाश में 100 किलोमीटर से भी अधिक उड़ सकते हैं।


डॉ. ज्योत्सेंद्र सिंह आगे बताते हैं, "इस कीट के वयस्क बहुत दूर तक उड़कर सफर कर सकते हैं, जो खाने की तलाश में 100 किलोमीटर से भी अधिक उड़ सकते हैं। फॉल आर्मीवर्म की चार अवस्थाएं होती हैं, अण्डा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क। इस कीट की एक मादा 1000 से अधिक अण्डे देती हैं, जो 50-200 के अण्ड समूहों में होते हैं।"

फॉल आर्मी वर्म कीट के अण्डे से चार-छह दिन में सूड़ी निकलती है। सूड़ी अवस्था 14-18 दिन की होती है और इसी अवस्था में यह कीट फसल को नुकसान पहुंचाता है। सूड़ी की त्वचा मुलायम होती है जो बढ़ने के साथ हल्के हरे या गुलाबी से भूरे रंग की होती है। सूड़ी नवजात पौधों को नुकसान पहुंचाती है और बाद में पौधों की पत्तियों की मध्यशिरा को छोड़कर पूरी पत्ती खा जाती हैं।

भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना के वैज्ञानिक डॉ मुकेश चौधरी बताते हैं, "पिछले कुछ महीनों में ये कीट देश के कई राज्यों में दिखा है, दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे राज्यों के बाद छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, उत्तर प्रदेश और अब बिहार में मक्का की फसल में देखा गया है, इस कीट के बारे में अभी किसानों को जागरूक होने की जरूरत है।"

वो आगे कहते हैं, "अभी इसे हमने पंजाब में भी देखा है, ये एक रात में सौ किमी तक कवर कर लेता है, इसलिए पहले ये साउथ में दिखा। मान लीजिए ये किसी खेत में दिखा और केमिकली कंट्रोल नहीं कर पाए तो ये सौ किमी आगे चले जाते हैं, यही नहीं ये एक एडल्ट कीट बार में एक हजार अंडे देता है, अगर उसमें से दस भी बच गए तो उनमें से दस हजार अंडे देंगे।इससे प्रोडक्शन पर भी असर पड़ रहा है, इस बार साउथ इंडिया में लोगों ने मक्का लगाना कम कर दिया, क्योंकि इसका फेवरेट मक्का ही होता है। इसके बाद अगर इसे मक्का नहीं मिलेगा तो ये गन्ने पर चला जाएगा। अगर ये भी नहीं है तो ज्वार, बाजरा में भी चला जाएगा। इसका मुख्य भोजन मक्का ही होता है, अगर मक्का नहीं मिलता तो ये दूसरी फसलों में चला जाता है, ये 190 तरह की फसलों को नुकसान पहुंचाता है।"

ऐसे करें नियंत्रण

फॉल आर्मीवर्म कीट के नियंत्रण के लिए के लिए निदेशक ने बताया कि क्वीनालफॉस 25 ई़सी़ दर 800 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा प्रोफेनोफॉस 40 प्रतिशत साइपर 4 प्रतिशत दर 750 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत ई़सी़ दर 800 मिली को प्रति हेक्टेयर को 6.25 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। इसकी सूड़ी के तीसरे और चौथे इंस्टार द्वारा नुकसान होने पर क्लोरेन्ट्रोनिलिप्रोल 18.5 ईसी दर 250 मिली प्रति हेक्टेयर को 6.25 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से कीट को नियन्त्रित किया जा सकता है।

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