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नदी संरक्षण के विशेषज्ञ थे अनिल माधव दवे, जानें उनकी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ बातें...

नई दिल्ली (भाषा)। पर्यावरण मंत्री अनिल दवे का गुरुवार को यहां निधन हो गया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, 60 वर्षीय दवे ने गुरुवार सुबह अपने घर पर बेचैनी की शिकायत की और तब उन्हें एम्स ले जाया गया। वहां उनका निधन हो गया। दवे वर्ष 2009 से राज्यसभा के सदस्य थे।

पिछले साल पर्यावरण मंत्री बने अनिल माधव दवे नदी संरक्षण के विशेषज्ञ और ग्लोबल वार्मिंग पर बने संसदीय मंच के सदस्य थे। पर्यावरण एक ऐसा विषय था, जो उनके दिल के बेहद करीब था। अपने जीवन के शुरुआती दिनों से ही दवे सामाजिक कार्यों से जुड़े थे। नदी संरक्षण के लिए उन्होंने ‘नर्मदा समग्र' नामक गैर सरकारी संगठन की स्थापना की थी।

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मध्य प्रदेश से दो बार राज्यसभा सांसद रहे दवे को भाजपा में त्रुटिहीन सांगठनिक कौशल वाले व्यक्ति के तौर पर जाना जाता था। वह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे। वह वर्ष 2003 में तब सुर्खियों में आए जब उनकी रणनीति उस समय के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की हार का सबब बनी। इसके बाद मुख्यमंत्री बनी उमा भारती ने दवे को अपना सलाहकार बनाया।

दवे पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार थे और वर्ष 2003, 2008 और 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान और वर्ष 2004, 2009 और 2014 में लोकसभा चुनावों के दौरान चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख रहे।

साहित्य में थी गहरी रुचि

दवे का जन्म मध्य प्रदेश के उज्जैन जिला स्थित बारनगर में छह जुलाई 1956 को हुआ था। उनकी माता का नाम पुष्पा और पिता का नाम माधव दवे था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विरासत उन्हें अपने दादा दादासाहेब दवे से मिली थी। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आरएसएस का प्रचारक बनने का फैसला किया। वह वर्षों तक संघ के समूहों के बीच बड़े हुए। वर्ष 2003 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें भाजपा में शामिल किया गया। इंदौर के गुजराती कॉलेज से कॉमर्स में परास्नातक करने वाले दवे की साहित्य में गहरी रुचि थी और उन्होंने कई किताबें भी लिखीं।

भाई अनिल दवे आरएसएस और भाजपा के सच्चे कार्यकर्ता थे। उन्होंने अजीवन समर्पित भाव से सेवा की। अनिल दवे के रूप में देश ने एक सच्चा देश भक्त और मां नर्मदा का सपूत खो दिया है। इस क्षति की भरपाई कभी न हो सकेगी।
शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री
दवे एक मृदुभाषी और विनम्र स्वभाव वाले व्यक्ति थे। उन्हें अपने विनम्र व्यक्तित्व के लिए याद रखा जाएगा। उनके अचानक निधन से सदमे में हूं।
सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष
मेरे दोस्त और बहुत ही सम्मानित सहयोगी पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे जी के अचानक निधन की खबर से सकते में हूं। उन्हें एक समर्पित जनसेवक के तौर पर याद रखा जाएगा। वह पर्यावरण संरक्षण को लेकर पूरी तरह से जुझारू थे। उनका निधन व्यक्तिगत क्षति है।
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

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