भारत और आसियान देशों का अतीत एक था, भविष्य भी साझा होगा : कोविंद

भारत और आसियान देशों का अतीत एक था, भविष्य भी साझा होगा : कोविंदबिहार के राजगीर में धर्म और धम्म पर आयोजित चौथा इंटरनेशनल कॉफ्रेंस।

धर्म या धम्म भारत और आसियान देशों को एक करने वाला तत्व है। यह इन देशों के समाज के डीएनए में समाहित है। यह कहना था राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का। वह गुरुवार को बिहार के राजगीर में धर्म और धम्म पर आयोजित चौथे इंटरनेशनल कॉफ्रेंस के उद्धघाटन के अवसर पर बोल रहे थे। तीन दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 11 देशों के करीब 100 प्रख्यात विद्वान, धार्मिक चिंतक, अध्यापक और शोधार्थी शामिल थे। यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आसियान-भारत वार्ता भागीदारी की 25वीं वर्षगांठ पर मनाए जा रहे उत्सव का हिस्सा है।

राष्ट्रपति ने इस कार्यक्रम के आयोजन के स्थान और समय को सामयिक बताते हुए कहा, इससे पहले भी तीन सम्मेलन हो चुके हैं लेकिन इस बार धर्म और धम्म की चर्चा बुद्ध की धरती पर आयोजित हो रही है। इसके अलावा जनवरी महीने का आसियान-भारत वार्ता भागीदारी में बहुत महत्व है। इसी महीने गणतंत्र दिवस के मौके पर सभी 10 आसियान देशों के नेता नई दिल्ली में मुख्य अतिथि होंगे। इस तरह यह कॉन्फ्रेंस भारत और आसियान देशों के संबंधों की मजबूती के साथ-साथ आध्यात्मिक विरासत और ज्ञान की साझेदारी की भी गवाह है।

कोविंद का कहना था, जब वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन शब्द चलन में नहीं आया था, उसे सदियों पहले ही बौद्ध धर्म ने वैश्वीकरण की नींव रखी। इसने बहुलवाद और विचारों की विभिन्नता को बढ़ावा दिया। मनुष्य के व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक जीवन में नैतिकता पर जोर दिया।

राष्ट्रपति का एयरपोर्ट पर राज्यपाल सतपाल मलिक व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वागत किया।

भारत की लुक ईस्ट पॉलिसी को इसी संदर्भ में देखने की सलाह देते हुए राष्ट्रपति ने कहा, यह महज एक राजनयिक प्रयास से कहीं ज्यादा है। इसका मकसद सिर्फ व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना नहीं है। यह सही है कि भारत और सदस्य देशों की उन्नति के लिए ये तत्व भी जरुरी हैं लेकिन हकीकत में यह नीति भारत और दक्षिण पश्चिम एशिया में रहने वाले लोगों के सपनों और उम्मीदों को एक सूत्र में पिरोने की पहल है। हमारा साझा अतीत था, यकीनन हमारा भविष्य भी साझा होगा।

इस तीन दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय था – धर्म-धम्म परंपरा में राज्य और सामाजिक व्यवस्था। धर्म को पालि भाषा में धम्म कहते हैं। इस सम्मेलन का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय के साथ, वियतनाम विश्वविद्यालय, इंडिया फाउंडेशन और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस मौके पर बिहार के राज्यपाल सत्य पाल मलिक,मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और श्रीलंका के विदेश मंत्री इलक मारापाना व भारत के विदेश मंत्रालय की सचिव प्रीति शरण मौजूद थे। सम्मेलन में 11 देशों के लोगों ने भाग लिया। करीब 20 से 30 वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस दौरान करीब 60 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। 13 जनवरी को समापन समारोह के मुख्य अतिथि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू तथा बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी होंगे। इससे पहले राष्ट्रपति का एयरपोर्ट पर राज्यपाल सतपाल मलिक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वागत किया।

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