असम: बाढ़ की चपेट में इंसानों के साथ बेजुबान जानवर हुए बेघर

असम: बाढ़ की चपेट में इंसानों के साथ बेजुबान जानवर हुए बेघरसाभार: इंटरनेट

लखनऊ। असम में बाढ़ के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। जहां बाढ़ से अब तक 42 लाख 86 हजार लोग प्रभावित हो चुके हैं वहीं काजीरंगा नेशनल पार्क का 90 फीसदी हिस्सा डूब चुका है, जिससे पिछले दो दिनों में 17 जानवरों की मौत हो चुकी है।



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असम में इस साल बाढ़ से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग बेघर हो गये हैं। सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि सोनेवाल ने मोदी को बाढ़ से बड़े पैमाने पर तबाही से अवगत कराया। विज्ञप्ति में सोनेवाल यह भी लिखा है कि पशुचिकित्सा और पशुपालन विभाग से कहा गया है कि वे फंसे हुए पशुओं की देखभाल करें और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, अन्य राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का भंडारण तैयार रखें।

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ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। एक सींग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया में काजीरंगा नेशनल पार्क में बाढ़ में फंसे जानवरों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है।

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इस नेशनल पार्क करीब एक हजार हाथियों और सैकड़ों हिरणों का घर है लेकिन ब्रह्मपुत्र में आई बाढ़ की वजह से काजीरंगा पार्क के इन जानवरों को बेघर कर दिया है।

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असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि इस राज्य में बारपेटा सबसे प्रभावित जिला है और इसमें 7.35 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।



मोदी ने असम के मुख्यमंत्री से बात की, बाढ़ की स्थिति का लिया जायजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से फोन पर बात कर राज्य में बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और स्थिति से निटपने के लिए केंद्र से राज्य को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।

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मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को यह भी बताया, "राज्य सरकार ने प्रशासन को बराक और ब्रह्मपुत्र, दोनों घाटियों में संवेदनशील बनाया है और उपायुक्तों को कर्मियों और सामग्रियों के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों तक पहुंचने के लिए कहा है।'

विज्ञप्ति में बताया गया है कि सोनोवाल ने मोदी को फंसे हुए लोगों के लिए आरंभ किए गए राहत और बचाव कार्यों की पूरी जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने राज्य के मंत्रियों और विधायकों सहित सभी जन प्रतिनिधियों को बाढ़ पीड़ितों की मदद करने और व्यक्तिगत रूप से बचाव कार्यों में खुद को शामिल करने के लिए कहा है।

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