सपा विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचे आजम और शिवपाल

सपा विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचे आजम और शिवपालअखिलेश यादव आैर रामगोविंद चौधरी पत्रकार वार्ता में।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी में विधायक दल के नेता रामगोविंद चौधरी को चुने जाने को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और शिवपाल यादव नाराज हो गए हैं। मंगलवार को विक्रमादित्य मार्ग स्थित सपा प्रदेश कार्यालय में सपा विधायक दल की बैठक का आजम खान और शिवपाल यादव ने बहिष्कार किया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में हुई बैठक में सपा के सभी विधायक मौजूद थे। जिसमें औपचारिक तौर पर अखिलेश यादव को विधान परिषद में सपा के दल का नेता और विधानसभा में रामगोविंद चौधरी को सपा विधायक दल के नेता चुने जाने की औपचारिक घोषणा हुई।

पूर्व मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने दोनों के चुने जाने की जानकारी दी। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव विधान परिषद के सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 5 मई 2018 तक है। इस बार के विधानसभा चुनाव में वह किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़े थे। साल 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद वह विधान परिषद के सदस्य बने थे।

इस बार के विधारसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच विवाद हुआ था। जिसमें सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को सपा प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया था, जिसके बाद अखिलेश यादव ने अपनी सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले अपने चाचा शिवपाल की मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी। इसके बाद सपा में विवाद यहां तक बढ़ गया कि अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर खुद अध्यक्ष बने और उनका पार्टी का संरक्षक बना दिया।

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शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष से बेदखल करके अखिलेश यादव ने अपने खास नरेश उत्तम को सपा प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी थी। यह मामला चुनाव आयोग तक गया था। इसके बाद अखिलेश यादव ने सपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव में गए। जिसका मुलायम सिंह ने विरोध किया था और मात्र तीन चुनावी सभा करके अपने को प्रचार से पूरी तरह दूर रखा था।

कांग्रेस से गठबंधन के बाद भी इस बार के चुनाव में सपा की करारी हार के बाद मुलायम सिंह और शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। मुलायम और शिवपाल के समर्थकों की मांग थी कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान एक बार फिर से नेताजी (मुलायम सिंह ) को सौंप दी जाए। वहीं मुलायम सिंह चाहते थे कि सपा विधायक दल का नेता शिवपाल यादव या आजम खान को चुना जाए।

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मुलायम सिंह ने इसको लेकर बुधवार को सपा के निर्वाचित विधायकों की एक बैठक बुलाई थी लेकिन अखिलेश यादव ने नया दांव चलते हुए अपने करीबी रामगोविंद चौधरी को सपा विधायक दल का नेता बना दिया। साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश में नेता विराधी दल भी चुन लिया गया। सपा में जब भी अखिलेश यादव का मुलायम सिंह और शिवपाल यादव के बीच मतभेद हुआ उसमें आजम खान ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्ता करके विवाद को समाप्त कराने की कोशिश की। यहां तक कि जब दिसंबर में सपा का विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाकर मुलायम सिंह को हटाकर अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया और इस बैठक में मुलायम के करीबी लोग भी उनको छोड‍़कर अखिलेश के साथ हो गए।

उस अधिवेशन से आजम खान ने खुद को दूर रखा। इसके अलाव जब सपा को घोषण पत्र जारी हुआ और मुलायम सिंह इस प्रोग्राम में नहीं पहुंचे तो आजम खान भी बीच प्रोग्राम से मुलायम सिंह को मनाने चले गए। पिछले दिनों जब सपा प्रदेश कार्यालय में सपा विधायक दल की बैठक हुई थी उसमें शिवपाल यादव का हाथ पकड़कर स्टेज पर लाए थे।

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