फसलों में रोग का मौसम: आलू, टमाटर और सरसों समेत कई फसलों के लिए घातक है झुलसा और पाला, ऐसे करें बचाव

देश के कई राज्यों में पाला और कोहरे के बीच बारिश का दौर भी जारी है। इस मौसम में आलू-टमाटर समेत सब्जियों वाली फसलों और दलहन-तिहलन वाली फसलों में रोग और कीट लगाने की आशंका बढ़ जाती है। जानिए क्या हो सकता है मौसम का असर, कैसे करेंगे अपनी फसल की सुरक्षा?

Arvind ShuklaArvind Shukla   5 Jan 2022 12:39 PM GMT

फसलों में रोग का मौसम: आलू, टमाटर और सरसों समेत कई फसलों के लिए घातक है झुलसा और पाला, ऐसे करें बचाव

बदले मौसम के बीच आलू, टमटार समेत कई फसलों पछेती झुसला रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। 

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। किसान जयसिंह मौर्या पिछले 10-12 दिनों में अपने तीन एकड़ टमाटर की फसल में करीब 15000 रुपए की पेस्टिसाइड का छिड़काव कर चुके हैं। उनकी फसल में झुलसा (Blight)रोग लगा है। जय सिंह मौर्या उत्तर प्रदेश में सीतापुर जिले के तरसावा गांव के किसान हैं। जयसिंह कहते हैं, "25 दिसंबर के बाद टमाटर में अचानक रोग लगने लगा और 4-5 दिन में पूरे खेत में फैल गया। हर दूसरे-तीसरे दिन दवा (पेस्टिसाइड) का छिड़काव कर रहे हैं। एक डोज (एक दिन की दवा) 3000-3500 की पड़ती है लेकिन फायदा नहीं मिला है। हमारे गांव में 10-15 और किसानों के टमाटर और आलू में यही समस्या है।"

रात के तापमान में ज्यादा कमी, वातावरण में नमी, कोहरा और पाला पड़ने की स्थितियों में आलू, टमाटर, बैंगन, सरसों, चना, मसूर आदि में कई तरह के रोग लगते हैं। झुलसा उनमें से एक है, जिसमें पत्तियां, तना से लेकर फल और कंद तक संक्रमित हो जाते हैं ये एक विषाणु जनित रोग है, जो तेजी से फैसला है। समय पर उपचार न हो तो पूरी फसल चौपट हो जाती है।

"ये मौसम ही कीट और रोग लगने का है। मौसमी परिस्थितियां ऐसी हैं कि रोग और कीट बढ़ने के लिए अनुकूल है। आलू-टमाटर समेत दूसरी सब्जियों में झुसला रोग लग सकता है, पत्तियों के मुड़ने की प्रक्रिया, यानी रस चूसक भुनगे बहुत तेजी से लगेंगे। कोशिश करें नीम ऑयल का छिड़काव करें, कंडे की राख का इस्तेमाल करें। येलो स्टिकी ट्रैप लगा लें और रोग वाले पौधों को दबा दें। दलहनी फसलों की बात करें तो चना, मटर, मसूर में जीवाणु झुलसा रोग, उकठा रोग, चने में फली छेदक कीट अंडे दे रहे होंगे, सरसों की बात करें तो माहू है सफेद मक्खी है, थ्रिप्स का प्रकोप तेजी से बढ़ेगा।" डॉ. डीएस श्रीवास्तव बताते हैं। डॉ. श्रीवास्तव सीतापुर जिले के कृषि विज्ञान केंद्र, कटिया में पादप रक्षा वैज्ञानिक और केंद्र के प्रभारी अध्यक्ष हैं।

डॉ. श्रीवास्तव ने किसान जयसिंह मौर्या को फफूंद नाशक कार्बेंडाजिम मैंकोजेब (Carbendazim Mancozeb Fungicide) या फिर मेटलैक्सिल और मैंकोजेब Metalaxyl plus Mancozeb) 2 से 3 ग्राम प्रति लीटर छिड़काव की सलाह दी है। साथ ही फसल में पोटाश, आयरन और सल्फर की कमी भी बताई है।

5 से 9-10 जनवरी तक बदला रहेगा मौसम, बारिश का अलर्ट

देश के कई राज्यों में 25-26 दिसंबर के बाद से मौसम बदला हुआ है। 26-27 दिसंबर को कई राज्यों में बारिश हुई ओले गिरे, जबकि 5 से 9 जनवरी तक फिर मौसम विभाग ने बारिश को लेकर पूर्वानुमान जारी किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग में मौसम वैज्ञानिक असीम मित्रा कहते हैं, "एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने कारण उत्तर पश्चिम भारत में मौसम बदल गया है। 5 जनवरी से 9 जनवरी तक पश्चिमी और मध्य भारत में हल्की या मध्यम बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है। दिल्ली, उत्तरी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब बारिश की आशंका है। इसके अलावा 8 जनवरी को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में भारी बर्फबारी हो सकती है। 8 और 9 को मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज के साथ ओलावृष्टि बारिश की आशंका है। जबकि जनवरी को विदर्भ भी शामिल रहेगा। पूर्वी भारत की बात करें तो पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले दो दिनों में घना कोहरा देखने को मिल सकता है। और बारिश हो सकती है।" रबी के मौसम के ये बारिश अनाज वाली फसलों गेहूं-जौ के लिए मुफीद है लेकिन सब्जी वर्गीय और तिलहन-दलहन में कई रोग लग सकते हैं।

देश में 331.05 मिलियन टन बागवानी फसलों का अनुमान

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक देश में 2020-21 में बागवानी फसलों (फल-सब्जी) के रकबे और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी हुई थी। साल 2020-21 में करीब 27.59 मिलियन हेक्टेयर में बागवानी का रकबा है, जिसमें से 331.05 मिलियन टन उपज अनुमानित है। साल 2019-20 में 26.48 मिलियन हेक्टेयर में 320.47 मिलियन टन उत्पादन हुआ था। 29 अक्टूबर 2021 को जारी आंकड़ों के मुताबिक 865 हजार हेक्टेयर में टमाटर की खेती हुई थी, जिसमें से 21056 हजार मीट्रिक टन उत्पादन अनुमानित है। वहीं आलू उत्पादन की बात करें तो 2020-21 में रिकॉर्ड 54.2 मिलियन टन (2248 हजार हेक्टेयर रकबा) होने का अनुमान है, जो कि 2019-20 की तुलना में 5.6 मिलियन टन अधिक है। 2019-20 में 2051 हजार हेक्टेयर में 48562 हजार मीट्रिक टन (48.5 मिलियन टन) उत्पादन हुआ था।

यूपी में 6.22 लाख हेक्टेयर में आलू

देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती भी होती है। उत्तर प्रदेश खाद्य एवं प्रसंस्करण विभाग के निदेशक डॉ. आरके तोमर के मुताबिक प्रदेश में रबी के सीजन में प्रमुख फसल आलू और मटर हैं। डॉ. तोमर गांव कनेक्शन को बताते हैं, "प्रदेश में इस वक्त करीब 6.22 लाख हेक्टेयर में आलू की फसल लगी है, जो अभी तक बहुत अच्छी रही है। इस वक्त आलू में पछेती झुलसा रोग लगने की आशंका रहती है। हालांकि हमने ये दिसंबर के आखिरी दिनों में होता है, मुझे लग रहा है वो समय बीत गया है। अगले 2-4 दिन मौसम सही रहता है तो फसल अच्छी जाएगी। विभाग समय-समय पर किसानों को एहतियात बरतने के मैसेज भेजता रहता है।"

यूपी की ही बात करें तो इस वक्त किसानों के खेतों में इन दिनों आलू, मटर, टमाटर, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर, फूल गोभी, बंद गोभी, मिर्च, शिमला मिर्च समेत कई तरह की फसलें लहलहा रही हैं। लेकिन दिसंबर के आखिर में तापमान गिरने के बाद कई इन फसलों को कई तरह के रोग लगने लगे हैं।

सीतापुर के किसान जयसिंह मौर्या की टमाटर की फसल में लगा झुसला रोग (दाएं), दूसरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से फटे टमाटर के दाने।

खेतों में नमी रखें किसान, शाम के वक्त करें धुआं- डॉ डीएस यादव

कन्नौज में इजरायल के सहयोग से चलाए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल के प्रभारी डॉ. डीएस यादव किसानों को इन मौसम से फसल बचाने का सबसे अच्छा तरीका खेत में नमी का होना मानते हैं।

डॉ. डी.एस यादव किसानों को सलाह देते हैं, "सबसे पहला एहतियात है कि किसान भाई अपने खेतों में नमी रखें। दूसरा आलू हो या दूसरी सब्जी वाली फसलें शाम के वक्त खेतों के पास धुआं करें। एक एकड़ खेत में पांच जगह धुआं करने से पाले का खतरा कम हो जाता है। इसका फंगीसाइड (फफूंदनाशक) सल्फर का इस्तेमाल करें।"

राजस्थान और पंजाब समेत कई इलाकों में 5 जनवरी से बारिश का दौर शुरु हो गया। उत्तर प्रदेश में भी बुधवार को कई जगहों पर हल्की बारिश हुई। राजस्थान के बीकानेर जिले में पलाना गांव के किसान आसुराम गोदारा (40 वर्ष) कहते हैं, आज भोर (5 जनवरी) 4 बजे से बारिश हो रही है। हमारे यहां इन दिनों सरसों, गेहूं, चना, गेहूं, ईशबगोल मुख्य फसलें हैं, ये बारिश अच्छी है, बशर्ते ओले न गिर जाए। सरसों में फूल आ गया है। तो ओले से उसको नुकसान हो सकता है। बाकी ठीक है।"

गेहूं-जौ समेत कई फसलों को फायदा

मौसम के बदले रुख का असर-अलग अलग क्षेत्रों की फसलों में फायदे और नुकसान के रुप में नजर आ सकता है। हरियाणा के हिसार में स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कृषि मौसम विभाग के मुखिया और ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के प्रमुख नोडल अधिकारी प्रो. एम.एल खिच्चर कहते के मुताबिक बदले मौसम का दौर 9 जनवरी तक रहेगा लेकिन अनाज वाली फसलों को फायदा ही है, बर्शते ओले न गिरे और हवा न चले।

प्रो. खिच्चर कहते हैं, "पश्चिमी विक्षोभ के अलावा अरब सागर से भी नमी वाली हवाएं चल रही हैं, इसके अलावा राजस्थान के ऊपर के साइक्लोनिक प्रेशर (चक्रवाती दबाव) बढ़ जाता है। कुल मिलाकर कई मौसम प्रणालियाँ इकट्ठी हो गई हैं, इसलिए बारिश के अवसर ज्यादा हैं। हरियाणा में सारी फसलों के लिए लाभदायक है। गेहूं, चना सरसों के लिए लाभदायक है। मेरे हिसाब से सब्जियों की फसलों के लिए अच्छा जो जाएगा क्योंकि इधर रात के तापमान में गिरावट आ रही थी, कोहरा पड़ रहा था, उसका प्रभाव भी कम होगा, क्योंकि रात का तापमान बढ़ जाता है। धरती से निकलने वाली गर्मी बादलों के कारण यहीं रह जाती है, जिससे रात का तापमान बढ़ जाता है।"

पूर्वांचल क्षेत्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अंकित के मुताबिक, गेहूं, गन्ना, जौ, जैसी फसलों को तो तो बिल्कुल नुकसान नहीं है। सब्जियों वाली फसलों को नुकसान तब होगा जब रात का तापमान जब 4 डिग्री से नीचे जाएगा। फिलहाल अगर पूर्वी उत्तर प्रदेश (फैजाबाद से लेकर सिद्धार्थनगर, मऊ, गोरखपुर समेत दर्जनों इलाके) में रात का तापमान 7 से 8 डिग्री के आसपास चल रहा है। जब पाले की स्थिति बने, मुख्य काम है कि पौधे की कोशिकाओं का पानी जमने न पाए। इसलिए हल्की सिंचाई और धुआं आदि प्राकृतिक तरीके अपनाना चाहिए।

यूपी में 10 जनवरी तक अलर्ट, बारिश के चलते सिंचाई न करने की सलाह

वहीं चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर ने किसानों के नाम जारी अपनी एडवाइजरी में उन्हें 10 जनवरी तक सचेत रहने को कहा है। यूनिवर्सिटी के कृषि मौसम तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा के मुताबिक 10 जनवरी तक प्रदेश में घने बादल छाए रहेंगे। तेज हवाओं के साथ हल्की या तेज बारिश, गरज, चमक के साथ ओलावृष्टि हो सकती है। किसान भाई गेहूं, सरसों, आलू और सब्जियों वाली फसलों में सिंचाई, खरपतवार नाशक और कीटनाशक, रोगनाशी का छिड़काव का काम न करें और खेतों से जल निकासी का इंतजाम रखें।

किसान क्या करें

पिछले कई महीनों से तैयार फसल में किसानों की काफी लागत और मेहनत लगी है, ऐसे में किसान अपनी फसल को लेकर फिक्रमंद हैं। पादप रक्षा वैज्ञानिक डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक फसल बचाने के लिए सबसे जरुरी है कि प्रतिदिन खेती की निगरानी की जाए। अगर पौधे के पत्ते में रोग दिखाई दें, तुरंत उन्हें उखाड़कर जमीन में दबा दें। वो कहते हैं, "ज्यादा रोग दिखे तुरंत विशेषज्ञों की सलाह लें और एहतियातन एक फफूंद नाशक का छिड़काव कार्बेंडाजिम मैनकोज़ेब (Carbendazim Mancozeb Fungicide ) या फिर मेटलैक्सिल और मैंकोजेब Metalaxyl plus Mancozeb) का छिड़काव कर दें। आलू की फसल में झुलसा के लिए अनुकूल मौसम है तो इन फंगीसाइड का 2 ग्राम प्रति लीटर में छिड़काव जरूर कर दें।"

इसके अलावा वो सरसों किसानों के लिए सलाह देते हैं कि "सरसों की फसल में सफेद पत्ती धब्बा जो रोग लगता है उसमें 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव कर लें या Carbendazim Mancozeb Fungicide ) का छिड़काव कर सके हैं।"

किसान क्या बिल्कुल न करें

अगर आपके इलाके में बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है तो सिंचाई न करें। खेत में ज्यादा नमी होने पर सब्जियों वाली फसलों में खासकर नुकसान हो सकता है। कई रोग लग सकते हैं। कीटनाशक हो या रोग नाशक या फिर खरपतवार नाशक उनके छिड़काव का सबसे अच्छा मौसम होता है जब धूप खुली हो। अगर कोहरा है, बादल छाए हैं, बारिश की आशंका है तो कीटनाशक छिड़काव से भी परहेज करें।

अगर फसल में फूल आ गए गए हैं तो किसी प्रकार के रासायनिक कीटनाशक के प्रयोग से बचें। डॉ. श्रीवास्तव कहते हैं, "जिस भी फसल में फूल आ रहे हैं वहां रासायनिक छिड़कावों का इस्तेमाल न करें। वर्ना फूल की ग्रोथ (बढ़वार) रुक जाएगी। फूल झड़ जाएंगे, जिससे दाने और फल नहीं बन पाएंगे। ऐसे में प्राकृतिक तरीकों, धुआं, नमी, नीम का तेल और कंडों की राखा का इस्तेमाल करें।"

इसके अलावा खेत में मधुमक्खियां पाल रखी हैं, या वो उधर आती हैं तो दिन के वक्त रासायनिक छिड़काव न करें वर्ना वो मर जाएंगी। शाम को मधुमक्खियां छत्तों में लौट आती हैं उस वक्त प्रयोग करें।

नोट- हर खेत और खेत का रोग, परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। इसलिए बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के रासायनिक खेतों दवाओं का छिड़काव न करें। उपरोक्त सलाह सामान्य परिस्थितियों के लिए हैं।

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