गोरे और सांवले रंग को लेकर ऊंची होती दीवार के बीच एक अच्छी ख़बर है… क्रीमों पर हुई सख्ती

गोरे और सांवले रंग को लेकर ऊंची होती दीवार के बीच एक अच्छी ख़बर है… क्रीमों पर हुई सख्तीफोटो साभार: इंटरनेट

लखनऊ। गोरे और सांवले रंग को लेकर ऊंची होती दीवार के बीच एक अच्छी ख़बर है। गोरे को खूबसूरत और सांवलेपन को कमतर बनाने वाली फेयरनेस क्रीमें अब खुलेआम नहीं बिक पाएंगी। स्टेरॉयड युक्त कुछ क्रीमों और इनके विज्ञापनों पर सरकार ने एक जनहित याचिका पर फैसले के बाद पाबंदी लगाने का फैसला लिया है। ये फैसला करोड़ों महिलाओं में हौसला भरने वाला साबित हो सकता है जो अपने रंग को लेकर हीनभावना से ग्रसित होने लगी थीं।

गोरा बनाने वाली क्रीमों के साथ दाद-खाज खुजली बनाने वाली उन क्रीमों और दवाओं की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगेगा, जिनमें स्टेरॉयड है। ये दवाएं अब डॉक्टर के पर्चे पर ही मिलेंगी, जनरल स्टोर और मेडिकल स्टोर वाले खुलेआम नहीं बेच पाएंगे। केमिस्ट ने बिना पर्चे देखे क्रीम दी तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

एसोसिएशन ऑफ डर्मोटोलॉजिस्ट, नेनिरियोलिज्सट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (आईएडीवीएल) जनहित याचिका लगाकर पिछले तीन वर्षों से इसकी लड़ाई लड़ रहा था। संगठन अपनी याचिका में गोरापन, दादा-खाज और खुजली के साथ ही फंगल इंफेक्शन में इस्तेमाल आने वाली स्टारॉयड युक्त क्रीमों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट में भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने पिछले दिनों कहा कि वो जल्द इस पर निर्णय लेगा। डीसीजीआई ने इन क्रीमों मानकों और सामग्री के विज्ञापन में बदलाव का भी फैसला किया है। ऐसी दवाइएयों के पैकेट पर बाकायदा चेतावनी भी लिखी जाएगी।

औषधि और प्रसाधन सामग्री के नियम में होने वाले बदलाव 1 नवम्बर 2018 से लागू किया जाएंगे। जिन दवाइयों पर शेड्यूल जी, शेड्यूल एच, शेड्यूल एच1 और शेड्यूल एक्स के अन्दर रखा जाएगा उन दवाइयों के पैक और अन्दर लिखा जायेगा कि दवाई किस शेड्यूल की है। इन शेड्यूल के अंतर्गत आने वाली दवाइयां बिना किसी भी डॉक्टर की सलाह के प्रयोग में नहीं लाई जा सकती हैं।

नए नियमों के मुताबिक बेक्लोमेथासोन और डेसोनाइड समेत इस तरह की चीजों का इन क्रीमों में इस्तेमाल होगा, उनके लिए अधिक्रत डॉक्टर की सलाह जरूरी होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारत में गोरे पन की क्रीमों का बाजार तेजी से बढ़ा है। सरकारी नियमों में ढिलाई का फायदा उठाकर ये कंपनियां स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर रही हैं।

आईएडीवीएल के सदस्य और लखनऊ के वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अबीर सारस्वत बताते हैं, “गोरेपन का दावा करने वाली कई क्रीम बहुत खराब हैं। हमारे देश के करोड़ों लोग गोरेपन के चक्कर में क्रीमें लगाकर अपनी त्वचा खराब कर रहे हैं। हम लोग कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकारी नियमों में कई लूपहोल हैं, कंपनियां उसका फायदा उठा रही थीं और केस लटकता जा रहा था। अब नए नियम बनेंगे तो उन पर रोक लगेगी।”

दवा कंपनियों के इस गड़बड़ झाले को सरल करते हुए डॉ. अबीर कहते हैं, “जो ये ड्रग्स और कॉस्टमेटिक का नियम था पहले इसमें करीब पांच सौ से छः सौ तक की एक दवाओं की लिस्ट थी, जिसे शेड्यूल एच कहते थे उन दवाओं के लिए नियम ये था कि बिना पर्चे के और किसी पंजीकृत डॉक्टर के सलाह के बिना उन दवाओं को प्रयोग नहीं कर सकता था। दवाओं के साथ-साथ उसमें स्टेरॉयड क्रीम के भी नाम थे।”

कुछ साल पहले तक ऐसी क्रीमों को प्रतिबंधित वाली श्रेणी में रखा गया था, लेकिन बाद एक नोट के जरिए ऐसी दवाओं को उपयुक्त लिस्ट से हटा दिया गया था। डॉक्टरों का संगठन दोबारा स्टेरॉयड वाली दवाओं पर नकेल की मांग कर रहा था। ये वो दवाएं हैं जिनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल चेहरे और प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन आदि होने पर इस्तेमाल किया जाता है।

गोरेपन की क्रीमें सिर्फ त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाती, ये युवक-युवतियों में हीनभावना भी पैदा करती हैं, खासकर सांवली लड़कियों को, जिस तरह से विज्ञापन आए वो उनका मनोबल तोड़ने वाले थे। ऐसी क्रीमों का बड़े-बड़े स्टार प्रचार-प्रसार करते हैं। जनहित में पिछले दिनों में गांव कनेक्शन के फाउंडर नीलेश मिसरा ने शाहरुख खान को एक चिट्ठी लिखी। देखिए क्या था उस चिट्ठी में..

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डॉ अबीर ने बताया, “पहले सारी खतरनाक क्रीमें भी इस लिस्ट से बाहर थी कोई भी कभी भी बिना पर्चे के बेच सकता था। जो दवाएं इस लिस्ट में होती हैं उनका किसी भी प्रकार का प्रचार नहीं किया जा सकता है। इन दवाइयों को जनता तक किसी भी प्रकार से नहीं पहुंचाया जा सकता है। हर तरह के होने वाले प्रचारों पर रोक लगेगी जिससे लोगों को काफी नुक्सान पहुँचता था। कोई भी केमिस्ट बिना डॉक्टर के सलाह वाले पर्चे के बिना नहीं बेंच सकेगा।”

स्टेरॉयड वाली क्रीमों के नुकसान गिनाते हुए डॉ. अबीर बताते हैं, “ दाद-खाज या खुलजी होने पर ज्यादातर लोग डॉक्टर को न दिखाकर सीधे मेडिकल स्टोर से दवाएं लेते हैं। लेकिन ऐसी ज्यादातर क्रीमों में स्टेरायड है, अगर आपने उसका इस्तेमाल किया तो शुरुआत में तो आराम मिलेगा, दाग गायब होंगे, रंग भी साफ दिखेगा, लेकिन दवा बंद होने पर कई गुना ज्यादा नुकसान दिखेंगे।”

कोई भी दवाई लेने से पहले ये जरुर देख लें

शेड्यूल जी में आने वाली दवाइयों के ऊपर पूरी तरीके से लाल आयत में काले से लिखा जायेगा:

  • शेड्यूल एच प्रेस्क्रिप्शन औषधि- चेतावनी
  • बिना डॉक्टर की सलाह के इस दवाई का उपयोग न करें

शेड्यूल एच में आने वाली दवाइयों के ऊपर पूरी तरीके से लाल आयत में काले से लिखा जायेगा:

  • शेड्यूल जी प्रेस्क्रिप्शन औषधि- चेतावनी
  • इसे रजिस्ट्रीकृत डॉक्टर के सलाह से उपयोग में लायें।
  • इसके अलावा शेड्यूल एच के अन्दर दवाई आएगी उसपर आरएक्स ऊपर बाईं तरफ कोने में लिखा जायेगा।

शेड्यूल एक्स में आने वाली दवाइयों के ऊपर पूरी तरीके से लाल आयत में काले से लिखा जायेगा:

  • शेड्यूल एक्स प्रेस्क्रिप्शन औषधि- चेतावनी
  • इसे रजिस्ट्रीकृत डॉक्टर के सलाह से उपयोग में लायें।
  • इसके अलावा शेड्यूल एक्स के अन्दर दवाई आएगी उसपर एक्सआरएक्स ऊपर बाईं तरफ लाल रंग में लिखा जायेगा।

शेड्यूल एच1 में आने वाली दवाइयों के ऊपर पूरी तरीके से लाल आयत में काले से लिखा जायेगा:

  • शेड्यूल एच1 प्रेस्क्रिप्शन औषधि- चेतावनी
  • बिना डॉक्टर की सलाह के दवाई उपयोग में लाना खतरनाक है।
  • इसे रजिस्ट्रीकृत डॉक्टर के सलाह से उपयोग में लायें।
  • इस पर एनआरएक्स का चिन्ह लगाया जाएगा।

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