पिछले तीन साल में बैंकों से जितनी रकम का घोटाला हुआ है उतने में 181 बार चांद का सफर हो जाता, 3 बार हो सकता था गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान

ये पैसे हैं तो हमारे गाढ़े पसीने की कमाई ही जिन्हें कुछ नामालूम रसूखदार लोग लेकर फुर्र हो जाते हैं और व्यवस्था हाथ पर हाथ धरे देखती रहती है। हमने तुलनात्मक रूप में अंदाजा लगाने की कोशिश की कि आखिर 70,000 करोड़ रुपए होते कितने हैं।

पिछले तीन साल में बैंकों से जितनी रकम का घोटाला हुआ है उतने में 181 बार चांद का सफर हो जाता, 3 बार हो सकता था गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान

केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने मंगलवार को राज्य सभा में बताया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान भारतीय बैंकों का करीब 70 हजार करोड़ रुपया घोटालों की भेंट चढ़ गया। राज्यसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015-16 में 16,409 करोड़ रुपए, 2016-17 में 16,652 करोड़ रुपए और 2017-18 के दौरान 36,694 करोड़ रुपए के घोटाले हुए।

देश में घोटालों की परंपरा काफी दूर तक जाती है। आधुनिक भारतीय राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चित हुए बोफोर्स घोटाले में 64 करोड़ रुपए की दलाली के आरोप थे। 1992 का प्रतिभूति घोटाला 5000 करोड़ का था, इसके बाद 2012 में उत्तर प्रदेश में हुआ एनआरएचएम घोटाला 10,000 करोड़ रुपए का बताया गया। मुश्किल से जिंदगी की गाड़ी खींचने वाली भारतीय जनता में बहुत से लोग ऐसे भी होंगे जो ये भी न बता पाएं कि एक करोड़ में कितने जीरो होते हैं। उनके लिए तो जैसे 64 सौ रुपए हैं वैसे ही 64 लाख करोड़ रुपए हैं।

पर ये पैसे हैं तो हमारे गाढ़े पसीने की कमाई ही जिन्हें कुछ नामालूम रसूखदार लोग लेकर फुर्र हो जाते हैं और व्यवस्था हाथ पर हाथ धरे देखती रहती है। हमने तुलनात्मक रूप में अंदाजा लगाने की कोशिश की कि आखिर 70,000 करोड़ रुपए होते कितने हैं।


इतने में सैकड़ों बार कर सकते हैं चांद सितारों का सफर

भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने 2008 में चांद की सतह की खोजबीन करने वाला चंद्रयान-1 चांद तक भेजा था। इस मिशन का खर्चा लगभग 386 करोड़ रुपए था। इसके बाद मंगल मिशन पर 2013 में 470 करोड़ रुपए खर्च हुए। भविष्य का चंद्रयान-2 थोड़ा महंगा होगा पर यह भी 800 करोड़ रुपए में निबट जाएगा। इसरो का खुद का 2018-19 का बजट महज 10,783 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। बैंक घोटाले के 70 हजार करोड़ के मुकाबले ये कहीं नहीं ठहरते।

12 करोड़ किसानों को मिलने वाले बढ़े हुए एमएसपी का बोझ भी इससे कम है

हाल ही में मोदी सरकार ने खरीफ फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाने के बाद कहा था कि इसका लाभ देश के 12 करोड़ किसानों को मिलेगा। उनकी आमदनी बढ़ेगी लेकिन इससे सरकारी खजाने पर 35,500 करोड़ रुपयों का बोझा बढ़ जाएगा। बैंक घोटालेबाजों ने तो 70 हजार करोड़ की चपत लगा दी और फायदा तो उनके अलावा शायद ही किसी को हुआ होगा।


तीन बार हो सकता है गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान

अभी दो महीने पहले जून में केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों व चीनी मिलों को राहत देने के लिए 7000 करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया था। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार के 7000 करोड़ रुपए पैकेज में 1200 करोड़ रुपए चीनी के बफर स्टॉक बनाने और 4400 करोड़ रुपए गन्ने से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हैं, ऐसे में ज़ाहिर है कि किसानों के बक़ाया भुगतान की समस्या बनी रहेगी। वर्ष 2017-18 गन्ना सत्र के दौरान पूरे देश में गन्ना किसानों का बकाया बढ़कर 23,000 करोड़ रुपए हो चुका है, इसमें से आधे से अधिक उत्तर प्रदेश के किसानों के हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो 70,000 करोड़ रुपए में तो तीन बार इस बकाए का भुगतान हो सकता था।

2018-19 के आम बजट की ढेरों योजनाएं इस घोटाले के सामने बौनी हैं

इस साल वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किसानों के फायदे के लिए कुछ नई योजनाओं के लिए जो वित्तीय आवंटन किया उस पर नजर डालें:

महज 10 हजार करोड़ रुपयों से मछलीपालन को बढ़ावा देने के लिए एक्वाकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट फंड और पशुपालन के लिए एनिमल हसबैंड्री इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट फंड की स्थापना की गई।

एग्री मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए 2 हजार करोड़ रुपए दिए गए।

बांस के विकास के लिए शुरू किए गए और बहुप्रचारित नेशनल बैम्बू मिशन पर 1290 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है।

नेशनल हेल्थ पॉलिसी के तहत देश भर में हेल्थ और वेलनैस सेंटर खोले जाने हैं, इसके लिए सरकार ने 1,200 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा है।

डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए शुरू किए गए डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के लिए 3,073 करोड़ रुपयों का प्रस्ताव है।

देश में टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।


70 हजार करोड़ रुपए में तो यूपी के हर जिले में मेट्रो चल जाती

उत्तर प्रदेश के 2018-19 के महत्वाकांक्षी बजट में मेट्रो रेल परियोजनाओं पर 500 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। प्रदेश में कानपुर, मेरठ और आगरा की मेट्रो परियोजनाओं के डीपीआर पास हो गए हैं और बनारस, इलाहाबाद, झांसी व गोरखपुर में भी मेट्रो रेल चलाए जाने की योजना है। 70000 हजार करोड़ में तो यूपी के जिले में मैट्रो चल जाती।

अब शायद आपको अंदाजा लगाने में आसानी हो कि 70 हजार करोड़ रुपए कितनी बड़ी रकम होती है।

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