ओडीएफ का सच: बाराबंकी के इस गांव में शौचालय की सीट तो लग गई, लेकिन टैंक ही गायब

Ranvijay SinghRanvijay Singh   6 Aug 2019 1:51 PM GMT

ओडीएफ का सच: बाराबंकी के इस गांव में शौचालय की सीट तो लग गई, लेकिन टैंक ही गायब

बाराबंकी (उत्‍तर प्रदेश)। ''शौचालय तो मिला है, लेकिन पूरा बना नहीं है। सिर्फ सीट बैठी है, टैंक है नहीं तो शौच के लिए खेतों में ही जाते हैं।'' यह बात बाराबंकी जिले के बजगहनी गांव के रहने वाले रामचंद्र चौहान (38 साल) कहते हैं।

रामचंद्र अपने शौचालय को दिखाते हुए बताते हैं, ''देख‍िए इसमें टैंक ही नहीं है। जब यह इस्‍तेमाल करने लायक ही नहीं तो क्‍या इस्‍तेमाल करें। अब मजबूरी में बाहर जाते हैं।'' रामचंद्र की तरह ही गांव के कई परिवारों के यहां शौचलय का ढांचा तो खड़ा हुआ है, लेकिन टैंक न होने की वजह से यह इस्‍तेमाल करने लायक नहीं।

बाराबंकी जिले को खुले में शौच मुक्‍त (ओडीएफ) घोष‍ित कर दिया गया है। इसी कड़ी में बजगहनी पंचायत भी खुले में शौच मुक्‍त हो गई है। यानि कागजी तौर पर इन बजगहनी गांव में कोई भी खुले में शौच नहीं करता। हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

बजगहनी गांव के ही रहने वाले राजू गौतम (40 साल) बताते हैं, ''छह महीने पहले एक ढांचा बना गए थे। बगल में गड्ढा भी मैंने खोदा है, लेकिन आगे सब वैसे ही पड़ा हुआ है। हम लोग शौच के लिए बाहर ही जाते हैं।''

बता दें, प्रशासन की ओर से शौचालय बनाने के लिए पात्र व्‍यक्‍ति को 6-6 हजार की दो किस्‍त दी जाती है। यानि 12 हजार रुपए लाभार्थी को मिलते हैं, जिससे वो शौचालय का निर्माण कर सकें। हालांकि बजगहनी गांव के लोगों का कहना है कि उन्‍हें पैसे नहीं मिले, हां शौचालय ठेके पर तैयार किया जा रहा था।

पैसे न मिलने की बात पर गांव के ही रहने वाले राम सिंह (45 साल) कहते हैं, ''12 हजार रुपए मिलते हैं, इस बात की जानकारी है, लेकिन हमें एक रुपया नहीं मिला है। अगर पैसे हमें मिल जाते तो शौचालय खुद बना लेते। अब खुद ही गड्ढा खोदा है, गिट्टी तोड़ी है और भी सब काम किए, लेकिन शौचालय पूरा नहीं हो सका है।''

स्‍वच्‍छ भारत अभ‍ियान के तहत मिले शौचालय के पास खड़े रामचंद्र चौहान।स्‍वच्‍छ भारत अभ‍ियान के तहत मिले शौचालय के पास खड़े रामचंद्र चौहान।

गांव की रहने वाली कमला देवी (43 साल) अपने शौचालय का टूटा गेट खोलकर दिखाती हैं। अंदर सीट भी नहीं है। वो झल्‍लाकर कहती हैं, ''यह बनाकर दे दिया है। हमारे किसी काम का नहीं है। चाहे बरसात हो, या आंधी आए हम लोगों को घर से दूर शौच के लिए जाना होता है। छोटे-छोटे बच्‍चे हैं, सबको लेकर बाहर ही जाते हैं।''

शौचालय के अधूरे निर्माण पर गांव के प्रधान अशोक यादव का कहना है कि, ''हम काम करा रहे थे, लेकिन फिर पिपरमिंट की खेती की वजह से मजदूरों की दिक्‍कत आने लगी। अभी काम फिर चालू हुआ है, जिसका-जिसका शौचालय बाकी है, सबका बनवा दिया जाएगा।''

लाभार्थ‍ियों को पैसे न मिलने की बात पर अशोक यादव कहते हैं, ''पहले पैसे लाभार्थ‍ियों को ही दिए जा रहे थे, लेकिन तब शौचालय बन नहीं पा रहे थे। ऐसे में ठेका सिस्‍टम के तहत शौचालय बनाए जा रहे हैं, क्‍योंकि शौचालय बनाने का टारगेट था।''

उनसे जब पूछा गया कि क्या ऐसा नियम है कि लाभार्थ‍ियों को पैसा नहीं दिया जाए। इसपर वो कहते हैं, ''ऐसा नियम तो नहीं, लेकिन शौचालय बन जाए इस लिए ऐसा किया गया है। मैं जल्‍द ही सारे शौचालय बनवाता हूं।''

बता दें, 14 सितंबर 2018 को 'स्‍वच्‍छ ही सेवा आंदोलन' की लॉन्‍चिंग के वक्‍त सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने नमो एप के जरिए पीएम मोदी से संवाद में कहा था, ''हम मार्च 2017 में सत्‍ता में आए। हमने सफाई अभियान को एक आंदोलन की तरह लिया और केवल 17 महीने में हम 1.36 करोड़ शौचालय का निर्माण करने में सक्षम हुए हैं।'' साथ ही उन्‍होंने यह भी दावा किया कि ''2 अक्‍टूबर 2019 तक छोटे परिवारों के बेस लाइन सर्वे के बाद कोई भी परिवार राज्‍य में बिना शौचालय के नहीं रहेगा।'' हालांकि सीएम योगी के इस दावे को उत्‍तर प्रदेश का एक जिला ही गलत साबित कर देता है। बाराबंकी के बजगहनी पंचायत में आधे अधूरे बने शौचालय इस बात को गलत साबित करते नजर आते हैं।


बात करें ओडीएफ की तो यह पीएम नरेंद्र मोदी के महत्‍वकांक्षी अभियान स्‍वच्‍छ भारत से जुड़ा हुआ है। इसलिए राज्‍यों को ओडीएफ घोषित करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। पीएम मोदी ने 2 अक्‍टूबर 2018 को महात्‍मा गांधी अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छता सम्‍मेलन में बोलते हुए कहा था, ''भारत में खुले में शौच से मुक्‍त गांवों (ओडीएफ) की संख्‍या 5 लाख को पार कर चुकी है। भारत के 25 राज्‍य खुद को खुले में शौच मुक्‍त घोषित कर चुके हैं। चार साल पहले खुले में शौच करने वाली वैश्‍विक आबादी का 60 प्रतिशत हिस्‍सा भारत में था, आज ये 20 प्रतिशत से भी कम हो चुका है। इन चार वर्षों में सिर्फ शौचालय ही नहीं बने, गांव शहर ओडीएफ ही नहीं बने बल्‍कि 90 प्रतिशत से अधिक शौचालय का नियमित उपयोग भी हो रहा है।''

पीएम मोदी की बात के मुताबिक, भारत के 29 राज्‍य में से 25 ओडीएफ घोषित हो चुके हैं। लेकिन अगर बात करें ओडीएफ घोषित करने के तरीके पर तो वो बेस लाइन के आधार पर किया जा रहा है। मतलब 2012 में किया गया एक सर्वे जिसमें पात्रों का चुनाव किया गया था। लेकिन इस सर्वे में तब से लेकर अब तक बहुत अंतर आ गया है। ऐसा खुद अधिकारी भी मानते हैं। ऐसे में बाराबंकी सिर्फ एक उदाहरण है कि देश में राज्‍यों को ओडीएफ सिर्फ कागजों में घोषि‍त किया जा रहा है। जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। फिलहाल 2 अक्‍टूबर 2019 तक बेस लाइन के आधार पर उत्‍तर प्रदेश को भी खुले में शौच मुक्‍त घोषित कर दिया जाएगा।

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